Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

लालू प्रसाद यादव को खत्म करने की ब्राह्मणवादी साजिश की गूंज सदियों तक गुंजती रहेगी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 5, 2022
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
लालू प्रसाद यादव को खत्म करने की ब्राह्मणवादी साजिश की गूंज सदियों तक गुंजती रहेगी
लालू प्रसाद यादव को खत्म करने की ब्राह्मणवादी साजिश की गूंज सदियों तक गुंजती रहेगी

ब्राह्मणवादी सिस्टम में रहते हुए ब्राह्मणवाद के खिलाफ बोलना पानी में मगरमच्छ से दुश्मनी मोल लेना है, और ठीक यही दुश्मनी संयुक्त बिहार के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता लालू प्रसाद यादव ने मोल ले ली, जब वे दलितों, पिछड़ों, बंचितों की आवाज बनकर उभरे और बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने जिन्होंने सीधे-सीधे ब्राह्मणवादी सिस्टम को चैलेंज किया और ब्राह्मणवादी आतंक की खुलकर मुखालफत करते हुए दलितों, पिछड़ों, वंचितों के मूंह में आवाज दी ताकि वह भी इस संवैधानिक व्यवस्था में बराबर का हक पा सके.

लेकिन ब्राह्मणवादी व्यवस्था को संवैधानिक व्यवस्था से चुनौती देने वाले लालू प्रसाद यादव को इस बात का संभवतः भान न रहा होगा कि वह जिस ब्राह्मणवादी व्यवस्था की मुखालफत कर रहे हैं और जिस वंचितों के लिए कर रहे हैं, दरअसल उसकी नींव बहुत गहरी है और उसकी पैठ इस संवैधानिक व्यवस्था के अंदर भी घुसी हुई है. और जिस वंचितों की आवाज बने हैं वे वंचित अभी तक इतने बुलंद नहीं हो पाये हैं कि मुसीबतों की घड़ी में उनके पीछे डटकर खड़े हो सके.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

बहरहाल, ब्राह्मणवादी व्यवस्था के विरुद्ध लड़ते हुए लालू प्रसाद यादव के खिलाफ संवैधानिक व्यवस्था के अंदर तक बैठे ब्राह्मणवादियों ने एकजुट होकर जाल बुनना शुरू कर दिया, और उसे मौका मिला चारा घोटाले के रुप में. भारत मे चारा घोटाला एकमात्र ऐसा घोटाला है जिसमें इस घोटाले को पर्दाफाश करने वाले को ही अभियुक्त बना दिया गया और जेल की सलाखों तक पहुंचा कर उनका राजनीति हत्या का खुला घोषणा कर दिया.

मनीष सिंह लिखते हैं – समोसे में आलू अब भी है, पर बिहार में लालू नही है. वे झारखंड की जेल में सजा काट रहे हैं. भारत के इतिहास में पहली बार कोई मुख्यमंत्री फर्जी बिल बनाने और उसे पेमेन्ट करने के लिए जेल गया है. मजे की बात यह है कि कोई भी मुख्यमंत्री न बिल बनाता है, न चेक साइन करता है, न कोषागार जाकर आहरण करता है. तो जरूर फ़्रॉड करने वाले अफसरों ने सारे पैसे लालू को सौंपे होंगे ?

जी नही, ऐसा भी नहीं है. मामला क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी का है. मुख्यमंत्री ने आपराधिक षड्यंत्र किया, ऐसा गवाहों के बयानों में आया है. गवाहों के बयानों में उस मुख्यमंत्री की कॉन्सपिरेसी भी आई थी, जिसने अपने गुंडों को तीन दिन तक, अपनी राजधानी में मौत का नंगा नाच करने की छूट दी थी. जिसने सेंट्रल फोर्सज को दो दिन एयरपोर्ट से बाहर आने की इजाजत न दी थी. गवाह उसकी बैठकों, उसके निर्देशो के भी थे, लेकिन वो मुख्यमंत्री जेल में नहीं है.

दरअसल गवाह ही जेल में है.वो आईपीएस उम्र कैद भुगत रहा है, लेकिन वो किस्सा अलग है, आदमी अलग है, तो न्याय का आचरण भी अलग है. मजे की बात कि जिस षड्यंत्र को रचने का आरोप लालू पर साबित हुआ है, वह उनके 20 साल पहले से चल रहा था. यानी 1978 से पशुपालन विभाग, अपनी आवंटन राशि से अधिक की निकासी कर रहा था. न AG ने पकड़ा, न सीएजी ने…, सब सोए पड़े थे. तो पकड़ा किसने ? लालू ने, जिन्हें अब इसे पकडने के अपराध में सजा सुनाई गई है.

लालू प्रसाद यादव ने जांच बिठाई. एफआईआर की, एक नहीं, दो नहीं, पूरी 64 एफआईआर. छापे मरवाये, अफसरों को सस्पेंड किया. जांच कमीशन बिठाया कि इस बीच PIL दाखिल हो गयी क्योंकि भावी उपमुख्यमंत्री, सुशील कुमार मोदी को यकीन नहीं था कि लालू सरकार निष्पक्ष जांच करेगी. सो हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि मामला सीबीआई तोता को दे दिया जाये.

अब सीबीआई तोता ने सभी दर्ज 64 केस हैंडओवर ले लिए. खुद भी नई एफआईआर दर्ज की और इसमें लालू को ही नामजद कर दिया. वैसे तो शुरुआती जांच में नीतीश कुमार का भी नाम सीबीआई के दस्तावेजों में है लेकिन वे समता पार्टी बनाकर बीजेपी से मिल चुके थे. लेकिन लालू प्रसाद यादव ने बीजेपी से हाथ न मिलाया – न 1996 में, न 2016 या 2021 में. इसलिए 22,000 करोड़ के सृजन घोटाले में नीतीश सुरक्षित हैं. वे तीसरी बार अबाधित राज कर रहे हैं और लालू प्रसाद यादव जेल में हैं.

लालू तीसरे मामले में जेल जा चुके हैं. उनके केस में न कोई गवाह पलटता है, न बयान बदलता है. सबको बीस साल पहले का सब घटनाक्रम, एकदम साफ-साफ याद है.

लालू से नफरत की जा सकती है. कारण वास्तविक है. उनका दौर, बिहार में ‘ऊंची जात’ के परंपरागत आतंक को पलटकर ‘नीची जात’ के आतंक को स्थापित करने का रहा है. इस क्रम में कानून व्यवस्था का भट्ठा बैठा और बिहार अराजकता के गर्त में डूब गया.

यह अवश्य उनका अपराध है, इसकी सजा जनता की अदालत ने बार बार दी है लेकिन सेंट्रल एजेंसीज, विरोधी सरकार और उसके वेतन प्रमोशन पर जी रहे अफसरों की गवाही के आधार पर लालू प्रसाद यादव की न्यायिक हत्या पर मेरी असहमति है. इसलिए कि यह भारत की राजनीति में अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने की एक नई परिपाटी बिठाएगी. आने वाले दौर में सत्ता में बैठे लोग, अपने से पहले सत्ता में रहे लोगों के साथ वह सदाशयता न बरतेंगे, जो 70 साल की रवायत रही है.

याद रहे, लालू का मुकदमा, बदले की राजनीति के लिए, न्यायिक प्रक्रिया को मैनिपुलेट करने और सरकारी अफसरों से नेताओं को फंसवाने के कोर्स की प्रशिक्षण पुस्तिका बनेगी. तो आज जश्न मनाने वाले सुन लें – लालू की राजनैतिक हत्या, अब एक नजीर बनने वाली है.

लालू प्रसाद यादव को राजनैतिक प्रतिद्वंदिता में राजनैतिक चुनौती के रूप में राजनैतिक प्रतिद्वन्दी, मीडिया, प्रशासन ने मिलकर चुनिंदा जजों से एक मामले के अनेक मामले बनाकर शिकार बना दिया अन्यथा, चारा घोटाले का सनातनी पितामह जगन्नाथ मिश्र, सृजन घोटाले का बादशाह सुशील मोदी, व्यापम महाघोटाले का सरताज शिवराज चौहान, रक्षा सौदे की रिश्वतखोर जार्ज फर्नांडिस की प्रेयशी जया जेटली जो इनमें से प्रत्येक चारा घोटाले से सैकड़ों गुना डकारे बैठे, वो जेल में होते, लालू प्रसाद नहीं.

व्यापम घोटाले में शिवराज ने घोटाला मालूम होने पर एक एफआईआर किया, जिम्मेदारी खत्म, क्लीन चिट. वही लालू प्रसाद यादव को पता चलने पर 64 एफआईआर दर्ज करते हैं, जिम्मेदारी से नहीं भागे. गिरिराज सिंह के यहां सीबीआई रेड में 2 करोड़ बरामद, मामला रफा-दफा. जया जेटली को मामूली सजा, फैसले के साथ जमानत आदेश नत्थी.

लालू की सुनवाई में चुनिंदा जज शिवपाल सिंह पूर्वाग्रही, जातिद्वेष की मानसिकता से सुनवाई में और बाद में फैसले में भी गैरजरूरी राजनैतिक, जाति और सामाजिक स्तर सूचक टिप्पणियां पेश करते, रिकॉर्ड सजा, इस बात का ध्यान रखकर कि राजनैतिक भविष्य नष्ट हो सके. नरेंद्र मोदी, स्मृति ईरानी की नकली डिग्रियों के मामले में 8 वर्ष से कोई सुनवाई नहीं हुई. झारखण्डी बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भी नकली एमबीए/ पीएचडी की डिग्री गले में डालकर शान से घूम रहा है, जबकि ऐसे ही आरोप में दिल्ली की आप सरकार में मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर पर आरोप लगते ही जांच, कार्यवाही और सजा हो जाता है ?

मात्र जन्मदिन की गलती पर अब्दुल्ला आजम को जेल में बंद कर दिया जाता है लेकिन बीजेपी नेताओं के खिलाफ कोई जांच नहीं, कोई कार्रवाई नहीं. विपक्षी नेताओं के खिलाफ गंध आने पर सूंघकर मीडिया से प्रचार-प्रसार करवा कर आरोपों की तुरंत-फुरंत जांच और उन चुनिंदा जजों की अदालत में मामले, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के 5 वरिष्ठ जज अपने सार्वजनिक मंच से सामूहिक रूप से स्पष्ट कर चुके हैं. इस देश में कानून के दोहरे मापदंड एवं कार्यवाही के लिए दोगली जातीय मानसिकता हैं.

लालू प्रसाद यादव को इस उच्च जातीय मानसिकता वाली कानून ने सजा दी है, बिकी हुई न्यायपालिका, विरोधियों को ठिकाने लगाने की सरकार की कार्यशैली ने लालू प्रसाद यादव को खत्म करने की अच्छी तैयारी की है लेकिन लालू प्रसाद यादव की भाजपा जैसे गुंडों के साथ न जाकर जो मिसाल कायम किया है, उसकी अनुगुंज सदियों तक रहेगी.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

उत्तर प्रदेश का चुनाव : पाखंड या रोजगार का सवाल

Next Post

हूर्रे, बौका बोला – ‘भागलपुर में धमाके से हुई जनहानि की खबर पीड़़ा देने वाली है’

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

हूर्रे, बौका बोला - 'भागलपुर में धमाके से हुई जनहानि की खबर पीड़़ा देने वाली है'

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जम्मू-कश्मीर : धारा 370 में संशोधन और उसका प्रभाव

August 6, 2019

मोरबी पुल हादसा : 140 लोगों की अकाल मृत्यु से जुड़ी जांच कहां तक पहुंची ?

January 19, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

March 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

March 7, 2026

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.