Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

दण्डकारण्य के जंगलों में आज एक बार फिर पुलिस-माओवादियों के बीच मुठभेड़ जारी है…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 21, 2024
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
दण्डकारण्य के जंगलों में आज एक बार फिर पुलिस-माओवादियों के बीच मुठभेड़ जारी है...
दण्डकारण्य के जंगलों में आज एक बार फिर पुलिस-माओवादियों के बीच मुठभेड़ जारी है…

दण्डकारण्य के जंगलों (बीजापुर) में आज एक बार फिर पुलिस-माओवादियों के बीच मुठभेड़ जारी है. तत्काल मिली सूचना के अनुसार एक माओवादियों के मारे जाने की खबर मिली है. पिछले चंद दिनों में माओवादियों पर छत्तीसगढ़ पुलिस के द्वारा एक के बाद एक हमले जारी हैं. पिछले दिनों 6 माओवादियों, फिर 13 माओवादियों और फिर 29 माओवादियों का नरसंहार मुठभेड़ द्वारा किया जा रहा है.

माओवादियों पर एक के बाद एक लगातार इस हमले से ऐसा लगता है मानो माओवादियों को दण्डकारण्य की जंगलों से उखाड़ फेंका जायेगा, जैसा कि तड़ीपार से गृहमंत्री बने अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतने के पहले और बाद में ऐलान किया था. परन्तु माओवादी आंदोलन के जानकार बताते हैं कि माओवादियों को ‘खत्म’ करने की कार्रवाई करते-करते कहीं अमित शाह और भारत सरकार को यह भारी न पड़ जाये.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

जैसा कि 29 माओवादियों के मारे जाने के बाद माओवादी संगठन की ओर से जारी एक प्रेस नोट में बताया गया है कि माओवादियों ने अपनी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) को आदेश दिया है कि पूरे छत्तीसगढ़ में जहां भी भाजपाई मिले, उसे खत्म कर दो.

ज्ञात हो कि सलवा-जुडूम चलाने वाले कांग्रेस के महेन्द्र कर्मा के साथ-साथ माओवादियों ने छत्तीसगढ़ में पूरे कांग्रेसी नेतृत्व को ही खत्म कर दिया और कांग्रसियों को छत्तीसगढ़ में नेतृत्व के लाले पड़ गये थे. भाजपाईयों की इस हरकत से तो ऐसा लगता है कि भाजपाईयों को समूचे देश में ही नेतृत्व के लाले न पड़ जाये.

बहरहाल, छत्तीसगढ़ में अभी मुठभेड़ जारी है और संभव है आज शाम तक फिर बड़ी संख्या में माओवादियों के मारे जाने की खबर भी सामने आ जाये, लेकिन इससे एक चीज तो साफ हो जाती है कि शांत पड़े माओवादियों को जिस तरह भाजपा सरकार और उसकी पुलिस उसको उकसा रही है, कहीं माओवादी बेहद खूंख्वार होकर बड़े हमले को न अंजाम दे जाये.

क्योंकि माओवादियों के इतिहास को अगर हम ध्यान से देखे तो माओवादियों द्वारा बहुत बड़ी-बड़ी कीमतें (एक अपुष्ट आंकड़े के अनुसार माओवादियों ने अब तक अपने नेताओं, समर्थकों समेत तकरीबन 8 लाख लोगों की शहादतें दी है) चुकाने के बाद भी खत्म होना तो दूर उल्टे और ज्यादा मजबूत हो गये हैं और भारत सरकार के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी.

पश्चिम बंगाल की नक्सलबाड़ी गांव से शुरू हुआ मजदूर-किसानों का जनवादी आन्दोलन आज अपने छठे दशक में है और समूचे देश में जल-जंगल-जमीन की नारों को बुलंद करते हुए फैल गया है. पश्चिम बंगाल में उठे नक्सलबाड़ी आन्दोलन के खिलाफ भारत सरकार की दमनात्मक क्रूर हिंसा में महज एक साल में ही 20 हजार से अधिक बंगाली युवाओं को क्रूरतापूर्ण तरीकों से क्रूर यातना देते हुए मौत के घाट उतार दिया गया था.

नक्सलबाड़ी आन्दोलन के प्रणेता चारू मजुमदार की पुलिस थाने में मौत की नींद सुला देने के बाद भारत सरकार को यह यकीन हो गया था कि उसने सफलतापूर्वक नक्सलबाड़ी आन्दोलन को खत्म कर दिया है. लेकिन जल्दी यह सरकार की यह खुशफहमी धूल में मिल गई और देश भर में नक्सलबाड़ी से निकली ‘चिन्गारी’ समूचे देश में फैल गई और आज वह माओवादी की शक्ल में सरकार से दो-दो हाथ कर रही है.

सवाल है कि यह नक्सलबाड़ी और माओवादी है क्या ? जवाब है भूखी-उत्पीड़ित और उपेक्षित जनसमुदाय के द्वारा अपनी आजादी के लिए युद्ध की उद्घोषणा का नाम नक्सलबाड़ी है और उसी नक्सलबाड़ी का विकास माओवादी है. दरअसल, नक्सलबाड़ी और माओवादी उसका उपनाम है, जिसे प्रतिक्रियावादी सरकार ने उस आंदोलन को नाम दिया है.

असलियत में यह कम्युनिस्ट पार्टी है, यानी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी. नक्सलबाड़ी के नाम से मशहूर पार्टी का नाम है – भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) और माओवादी का असली नाम है – भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी).

तो देखा आपने आप जिसे नक्सलबाड़ी और माओवादी कहते हैं वह असलियत में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी है, जिसका सर्वेसर्वा कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स थे, जिसका बाद में विकास लेनिन और फिर माओ त्से-तुंग ने किया था. दूसरे शब्दों में आप यह भी कह सकते हैं कि भारत भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद माओवादियों का वैचारिक पुरखा हैं.

फिर आप कह सकते हैं कि आखिर माओवादी हथियार क्यों उठा लिये ? जवाब है माओवादियों को हथियार उठाने का आदेश ही कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने दिया है, जिसे भारत की जमीन पर भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद जैसे युवाओं ने लागू भी किया था. जैसा कि माओ त्से-तुंग बताते हैं कि ‘मार्क्सवाद के अंदर बहुत से सिद्धांत हैं, लेकिन अंतिम रूप से उन सबको सिर्फ एक पंक्ति में समेटा जा सकता है- ‘विद्रोह न्यायसंगत है.’

तो दूसरे शब्दों में आप यह भी कह सकते हैं कि भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद के राजनैतिक विरासत को आज माओवादियों ने ही थाम रखा है और उनके सपनों को पूरा करने का जिम्मा अपने कंधों पर उठा लिया है. अगर आप अपने पुरखा भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद से नफरत करते हैं तभी आप माओवादियों से नफरत कर पायेंगे वरना कतई नहीं.

Read Also –

वार्ता का झांसा देकर माओवादियों के खिलाफ हत्या का अभियान चला रही है भाजपा सरकार
दस्तावेज : भारत में सीपीआई (माओवादी) का उद्भव और विकास
किसी भी सम्मान से बेशकीमती है माओवादी होना
किसी भी स्तर की सैन्य कार्रवाई से नहीं खत्म हो सकते माओवादी

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

यह आर्तनाद नहीं, एक धधकती हुई पुकार है !

Next Post

बाबा रामदेव श्रद्धा और अंधश्रद्धा के कांबो से पीड़ित रोगी समाज के लक्षण हैं

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

बाबा रामदेव श्रद्धा और अंधश्रद्धा के कांबो से पीड़ित रोगी समाज के लक्षण हैं

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

सावरकर को ‘वीर’ नहीं गद्दार सावरकर कहना चाहिए

December 3, 2023

कोरोना से लड़ने के दो मॉडल

March 27, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.