Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

समाजवाद और धर्म निरपेक्षता के बहाने संविधान पर हमले क्यों ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 8, 2023
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

1976 में भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़े गए थे. भाजपा-आरएसएस समर्थित दो वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका के माध्यम से इन्हें हटाने की मांग करते हुए कहा था कि ‘यह संशोधन भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषय-वस्तु के विपरीत था.’

समाजवाद क्या है ?

समाजवाद एक ऐसी विचारधारा है जिसका उद्देश्य समाज में आर्थिक समानता को स्थापित करना होता है. इस विचारधारा के अन्तर्गत नागरिकों को न्याय एवं स्वाधीनता प्रदान की जाती है. साधारण भाषा में कहा जाये तो समाजवाद एक ऐसी प्रणाली है, जिसकी मदद से देश की सरकार राज्य व्यवस्था एवं आर्थिक प्रणाली को नियंत्रित करती है.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

समाजवाद देश की सरकार द्वारा संचालित किया जाने वाला एक सामाजिक कार्य है, जिसका उद्देश्य देश के नागरिकों को लाभ पहुंचाना और समाज के सभी वर्गों के बीच समानता को स्थापित करना होता है. इस व्यवस्था के अन्तर्गत देश की अर्थव्यवस्था पर हर नागरिक का सामाजिक रूप से पूर्ण नियंत्रण रहता है.

समाजवाद में मनुष्यों की समस्या कैसे खत्म होती है ?

समाजवाद में मानव की मूल समस्याओं को देश की सरकार प्राथमिकता के स्तर पर हल करती है- मसलन, रोजगार, आवास, शिक्षा, चिकित्सा, इन्फ्रास्ट्रचर आदि. यानी, देश के तमाम नागरिकों को आवास, शिक्षा, चिकित्सा जैसी मूलभूत समस्याओं को त्वरित आधार पर हल करता है और इसे तमाम नागरिकों के लिए मुफ्त में उपलब्ध कराती है. रोजगार को हरेक नागरिक को पाना एक कानूनी अधिकार होता है. इस कारण समाजवादी व्यवस्था में अशिक्षा, बगैर इलाज मौतें, बेरोजगारी, भिखारी, वेश्यावृत्ति, चोरी, डकैती, हत्या, बलात्कार, छीनतई आदि जैसी समस्याओं से निजात मिल जाती है.

समाजवाद भारत की बहुसांस्कृतिक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में सबसे जरूरी टास्क इसलिए है कि समाजवाद ही भारत की – जहां कोस-कोस पर पानी बदले, दस कोस पर वाणी – जैसी बहुरूपी राष्ट्रीयता को एक साथ विकास होने का अवसर प्रदान करती है, जिसे संघी मान्यता के अनुसार किसी एक रंग, भाषा, संस्कृति में नहीं ढ़ाला जा सकता.

विज्ञान के विकास के लिए समाजवाद क्यों है जरूरी ?

समाजवाद दुनिया की सबसे वैज्ञानिक व्यवस्था का नाम है. चूंकि यह व्यवस्था सबसे ज्यादा वैज्ञानिक है, इसलिए केवल इसी व्यवस्था में विज्ञान का सर्वाधिक विकास हो सकता है. इसे दो उदाहरणों से समझा जा सकता है-

जियो वनाम स्टारलिंक : भारत की अर्द्ध सामंती-अर्द्धऔपनिवेशिक समाजव्यस्था जिसमें हम रह रहे हैं, भारतीय दलाल पूंजीपतियों ने जियो के माध्यम से सर्वाधिक तेज इंटरनेट को ‘कर लो दुनिया मुट्ठी मेें’ कहते हुए स्थापित किया कि यह सारी दुनिया को जोड़ता है और सबसे आधुनिक और सबसे तेज-सबसे सस्ता इंटरनेट देता है.

लेकिन जियो का यह इंटरनेट कोरोना महामारी के दौरान करोड़ों भागते भारतीय प्रवासियों के दुःखद जीवन को आसान बनाने के बजाय भारत की अर्द्ध सामंती-अर्द्धऔपनिवेशिक समाजव्यस्था ने इसे आपदा में अवसर का नाम देते हुए जियो रिचार्ज का ऐन मौके पर न केवल कीमत ही बढ़ा दिया अपितु रिचार्ज की अवधि खत्म होते ही तुरंत न कवेल आउटगोइंग बल्कि इनकमिंग कॉल को भी बंद कर दिया गया था.

अब इसके दूसरे पहलू पर आते हैं- भारत में प्रधानमंत्री के विज्ञापन ब्यॉय के बाद अभी जियो चालू ही हुआ था कि दुनिया में लगातार हो रहे वैज्ञानिक विकास ने एलन मस्क की स्टारलिंक नामक सैटेलाईट इंटरनेट का विकास हो गया, जो न केवल बेहद सस्ता और तेज था अपितु समूची दुनिया में एक समान इंटरनेट की पहुंच को भी सुनिश्चित कर दिया है.

ज्यों ही स्टारलिंक की इंटरनेट ने भारत में अपनी धमक जमाई कि जियो के मालिक मुकेश अंबानी के हाथ-पांव फूल गये और भारत के प्रधानमंत्री मोदी पर दवाब डालकर फौरन स्टारलिंक को भारत में अवैध घोषित कर दिया गया. और इस प्रकार विज्ञान के बढ़ते कदम को भारत की अर्द्ध सामंती-अर्द्धऔपनिवेशिक समाजव्यस्था ने बलपूर्वक रोक दिया.

जबकि समाजवादी व्यवस्था के तहत विज्ञान को हमेशा ही बेहतर माहौल और विकास के लिए बेहतर सुविधा प्रदान की जाती है, जिस कारण विज्ञान के विकास का उन्मुक्त माहौल मिल पाता है. तभी तो महज चंद वर्षों में सोवियत संघ, चीन वगैरह जैसे जर्जर देश को समाजवादी व्यवस्था ने दुनिया की महाशक्ति पद पर बिठा दिया.

कृषि में विज्ञान के विकास के लिए समाजवाद क्यों है जरूरी ?

भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन भारत के कृषि पर सबसे ज्यादा मार भारत की अर्द्ध सामंती-अर्द्धऔपनिवेशिक समाजव्यस्था की पड़ती है. नये नये वैज्ञानिक यंत्र किसानों को बेहद आसानी और उचित कीमत पर मिल ही नहीं पाता है, जिसका परिणाम यह होता है कि कृषि का विशाल हिस्सा वैज्ञानिक यंत्रों यानी, विज्ञान के विकास का लाभ नहीं ले पाता है.

समाजवादी व्यवस्था में विज्ञान खुलकर सांसें ले पाता है, बकायदा सरकार की ओर एक हर जरूरतमंद जगहों पर कृषि यंत्रों का बंटवारा कर कृषि के विकास में असीम योगदान देता है जो केवल एक समाजवादी व्यवस्था में ही संभव है.

समाजवाद पर क्यों हो रहे हैं हमलें ?

देश की सत्ता पर काबिज भाजपा-आरएसएस की सरकार जो देश में मौजूदा लोकतंत्र को खत्म कर देश को पीछे की ओर ले जाकर सामंती व्यवस्था बल्कि दास-मालिक व्यवस्था में ले जाना चाह रही है, जहां राजा-रानी की कहानी को वास्तविकता में लागू करने की कोशिश की जा रही है, जहां राजा की आज्ञा मात्र से किसी का सर उड़ाया जा सकता है, तो किसी को मालामाल किया जा सकता है. जैसे आज 84 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी को जेल में डालकर तिलतिल मारा गया तो वहीं अडानी जैसे कुख्यात कॉरपोरेट को मालामाल किया गया.

संविधान पर हमले क्यों ?

यही कारण है कि आरएसएस-भाजपा की यह मोदी सरकार देश को सैकड़ों साल पीछे ले जाकर ‘ढ़ोल-गंवार-शुद्र-पशु-नारी…’ जैसी मानवद्रोही  व्यवस्था को स्थापित कर मनुस्मृति को संविधान की जगह स्थापित करने की कोशिश कर रही है, जिसके राह में संविधान की प्रस्तावना में दर्ज समाजवाद और धर्म निरपेक्षता सबसे बड़ी बाधा है.

आरएसएस-भाजपा समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता को निशाना बना रहा है. चूंकि भारत का संविधान कथनी में ही सही समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता का पक्षपोषण करता है, इसलिए भाजपा-संघ सीधे संविधान पर हमला करता है, जिसका हर जागरूक प्रगतिशील और इंसाफपसंद मनुष्यों को विरोध करना चाहिए.

  • (एक कार्यशाला में मेरे द्वारा पढ़ा गया पर्चा)

Read Also –

समाजवाद ही मानवता का भविष्य है
नेहरु द्वेष की कुंठा से पीड़ित ‘मारवाड़ी समाजवाद’ ने लोहिया को फासिस्ट तक पहुंचा दिया
प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ शब्द हटाने का बिल
लेनिन की कलम से : समाजवाद और धर्म

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

‘दलाल (ब्रोकर) को मैं मानव जाति का सदस्य नहीं मानता’ – बाल्ज़ाक

Next Post

पार्टनर, तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

पार्टनर, तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

लकड़बग्घे की अन्तर्रात्मा !

July 31, 2017

भारत सरकार का बम्पर धमाका : करोड़ों का माल कौड़ियों में

October 29, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.