Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

ड्रेकुला मोदी और उसके घड़ियाली आंसू

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 30, 2017
in ब्लॉग
1
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter


विश्व के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री पद पर विराजमान कोई शख्स देश की समस्याओं को लेकर खुलेआम अपने घड़ियाली आंसू बहाए हैं. प्रधानमंत्री पद पर विराजमान शख्स देश की समस्याओं का डटकर मुकाबला करता है. उसके खिलाफ संघर्ष करता है. आसन्न समस्याओं से देश की जनता को निजात दिलाने के लिए दिन-रात एक करता है. देश की सीमाओं की रक्षा के लिए विश्वव्यापी नीतियों को मजबूत करता है.

इसके उलट समूचे विश्व में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मात्र ऐसे शख्स हैंं जो देश में समस्या उत्पन्न होने पर उस समस्या से निपटने के बजाय आंसू बहाते हैं. अपने द्वारा पाले गए गुंडों की रक्षा के लिए देश की आम जनता को अपने आंसुओं के माध्यम से गुमराह करते हैंं ताकि कहीं जनता उन गुंडों को सबक न सिखाने लगे. वहींं उन गुंडों को देश की जनता को, दलितों को, आदिवासियों और महिलाओं को मारने-पीटने और इज्जत लूटने की खुली छूट प्रदान करते हैंं.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

अपनी लज्जा की प्रकाष्ठा को कब का पार कर चुके देश के प्रधानमंत्री मोदी जो अपने 56 इंची सीना ठोक कर देश की सत्ता पर काबिज हुए हैं, देश के अंदर जब आतंकवादी घटनाएं होती है तो उसी आतंकवादियों से घटना की जांच भी करवाते हैं. सीमाओं पर जब सैनिक पाकिस्तानी सैनिकों के हाथों क्षत-विक्षत कर मारे जाते हैं तो हमारे प्रधानमंत्री पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ “जन्मदिन का केक” काटते हैं.

देश के नागरिक को जब पाकिस्तान में जासूस बताकर फांसी पर लटकाने की साजिश चल रही होती है तभी हमारे प्रधानमंत्री पाकिस्तान के 11 बंदियों को बिना शर्त रिहा कर देते हैं. हिंदुत्ववादी ताकत जब गौरक्षा के नाम पर देश के दलितों, मुसलमानों, आदिवासियों और औरतों की हत्या करते हैं तो हमारे प्रधानमंत्री उन गुंंडों से हत्या न करने की अपील जारी करते हैं और ड्रैकुला की तरह घड़ियाली आंसू बहाते हैं.


पुरानी कथाओं के रक्तपिपासु पात्र ड्रेकुला से प्रधानमंत्री मोदी की तुलना बखूबी की जा सकती है. देश की जनता के खून पसीने की कमाई पर जिस प्रकार अपने खूनी दांत गड़ाए हुए हैं और लोग दम तोड़ रहे हैं, वह ड्रेकुला जैसे भयानक खूनी दरिंदे के दरिंदगी से कम नहींं है.

नोटबंदी के नाम पर 150 से अधिक लोगों के खून मोदी के सर पर है, तो वहीं गौरक्षा के नाम पर आए दिन निर्दोष लोगों की हत्याएं भी मोदी के सर पर है. कर्ज के भयानक जाल में फंसे हजारों की तादाद में आत्महत्या कर रहे किसानों का खून भी मोदी के सर पर है तो जीएसटी जैसी लुटेरी कानून ना जाने कितने लोगों की बलि लेगा, यह भविष्य की गर्भ में है.

देश की जनता नरेंद्र मोदी जैसे ड्रेकुला के बनाए जाल में बुरी तरह फंस चुकी है. लोगों के रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य को बुरी तरह बर्बाद कर दिया है. देश की तमाम विरासतों को निजी मालिकाना में बेचा जा रहा है. देश की संसाधनों को अंबानी अडानी जैसे लुटेरों के हाथों गिरवी रखा जा रहा है. देश की जनता की खामोशी एक नई गुलामी का दौर लेकर आ रही है जो निश्चित तौर पर अंग्रेजोंं के गुलामी से कहीं ज्यादा भयानक और रक्तपिपाशु होगा.

Related Blogs :
नीलामी पर चढ़ा देश : देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों की नीलामी
आदिवासियों के साथ जुल्म की इंतहां आखिर कब तक?

Previous Post

दलित यानि दलाल राष्ट्रपति का चुनाव और आम आदमी

Next Post

अफीम के नशे से भी ज्यादा मदहोश करने वाली नशा है धर्म

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

अफीम के नशे से भी ज्यादा मदहोश करने वाली नशा है धर्म

Comments 1

  1. Pingback: Google

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

नौकरी, भाजपा की सबसे दुखती रग है…और तेजस्वी यादव की पूंजी

February 15, 2024

देखो-देखो नशे में धुत्त हत्यारा आदिवासी युवक पर मूत रहा है…

July 7, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.