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Home ब्लॉग

ड्रेकुला मोदी और उसके घड़ियाली आंसू

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 30, 2017
in ब्लॉग
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विश्व के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री पद पर विराजमान कोई शख्स देश की समस्याओं को लेकर खुलेआम अपने घड़ियाली आंसू बहाए हैं. प्रधानमंत्री पद पर विराजमान शख्स देश की समस्याओं का डटकर मुकाबला करता है. उसके खिलाफ संघर्ष करता है. आसन्न समस्याओं से देश की जनता को निजात दिलाने के लिए दिन-रात एक करता है. देश की सीमाओं की रक्षा के लिए विश्वव्यापी नीतियों को मजबूत करता है.

इसके उलट समूचे विश्व में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मात्र ऐसे शख्स हैंं जो देश में समस्या उत्पन्न होने पर उस समस्या से निपटने के बजाय आंसू बहाते हैं. अपने द्वारा पाले गए गुंडों की रक्षा के लिए देश की आम जनता को अपने आंसुओं के माध्यम से गुमराह करते हैंं ताकि कहीं जनता उन गुंडों को सबक न सिखाने लगे. वहींं उन गुंडों को देश की जनता को, दलितों को, आदिवासियों और महिलाओं को मारने-पीटने और इज्जत लूटने की खुली छूट प्रदान करते हैंं.

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अपनी लज्जा की प्रकाष्ठा को कब का पार कर चुके देश के प्रधानमंत्री मोदी जो अपने 56 इंची सीना ठोक कर देश की सत्ता पर काबिज हुए हैं, देश के अंदर जब आतंकवादी घटनाएं होती है तो उसी आतंकवादियों से घटना की जांच भी करवाते हैं. सीमाओं पर जब सैनिक पाकिस्तानी सैनिकों के हाथों क्षत-विक्षत कर मारे जाते हैं तो हमारे प्रधानमंत्री पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ “जन्मदिन का केक” काटते हैं.

देश के नागरिक को जब पाकिस्तान में जासूस बताकर फांसी पर लटकाने की साजिश चल रही होती है तभी हमारे प्रधानमंत्री पाकिस्तान के 11 बंदियों को बिना शर्त रिहा कर देते हैं. हिंदुत्ववादी ताकत जब गौरक्षा के नाम पर देश के दलितों, मुसलमानों, आदिवासियों और औरतों की हत्या करते हैं तो हमारे प्रधानमंत्री उन गुंंडों से हत्या न करने की अपील जारी करते हैं और ड्रैकुला की तरह घड़ियाली आंसू बहाते हैं.


पुरानी कथाओं के रक्तपिपासु पात्र ड्रेकुला से प्रधानमंत्री मोदी की तुलना बखूबी की जा सकती है. देश की जनता के खून पसीने की कमाई पर जिस प्रकार अपने खूनी दांत गड़ाए हुए हैं और लोग दम तोड़ रहे हैं, वह ड्रेकुला जैसे भयानक खूनी दरिंदे के दरिंदगी से कम नहींं है.

नोटबंदी के नाम पर 150 से अधिक लोगों के खून मोदी के सर पर है, तो वहीं गौरक्षा के नाम पर आए दिन निर्दोष लोगों की हत्याएं भी मोदी के सर पर है. कर्ज के भयानक जाल में फंसे हजारों की तादाद में आत्महत्या कर रहे किसानों का खून भी मोदी के सर पर है तो जीएसटी जैसी लुटेरी कानून ना जाने कितने लोगों की बलि लेगा, यह भविष्य की गर्भ में है.

देश की जनता नरेंद्र मोदी जैसे ड्रेकुला के बनाए जाल में बुरी तरह फंस चुकी है. लोगों के रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य को बुरी तरह बर्बाद कर दिया है. देश की तमाम विरासतों को निजी मालिकाना में बेचा जा रहा है. देश की संसाधनों को अंबानी अडानी जैसे लुटेरों के हाथों गिरवी रखा जा रहा है. देश की जनता की खामोशी एक नई गुलामी का दौर लेकर आ रही है जो निश्चित तौर पर अंग्रेजोंं के गुलामी से कहीं ज्यादा भयानक और रक्तपिपाशु होगा.

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