Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

तो आप मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार करना चाहते हैं ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 13, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

तो आप मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार करना चाहते हैं ?

इन दिनों सोशल मीडिया पर बहुत ज़ोर-शोर से मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार की मुहिम चलाई जा रही है. वैसे यह कोई नई सूझ नहीं है. हिंदुत्व ब्रिगेड के उत्साही विचारक-प्रचारक पहले भी यह बात कहते रहे हैं, बल्कि चोरी-छुपे इस पर अमल करने की कोशिश भी करते रहे हैं. किराये पर मकान देने में, नौकरी देने में और यहां तक कि कभी-कभी कुछ ख़रीदने-बेचने में वह इस बात का ध्यान रखते हैं कि सामने वाला मुसलमान, अछूत या पिछड़ी जाति का तो नहीं है ? बेशक, इस बार जो नया और निर्लज्ज खुलापन इस मुहिम में है, वह बताता है कि एक इंसान के तौर पर अपनी क़द्र अपनी निगाह में ही हमने घटा ली है और हिंदू होकर जीने में ही संतोष और गर्व कर रहे हैं ?

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

लेकिन आज की आर्थिक दुनिया में किसी एक समुदाय के बहिष्कार की बात इतनी भोली और मनोरंजक है कि इस पर गंभीरता से विचार करने की जगह चुटकी लेने का मन करता है. यह पूछने की तबीयत होती है कि क्या मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार संभव है ? क्योंकि जब आप बहिष्कार करेंगे तो दुनिया भर के मुसलमानों का और मुस्लिम देशों का बहिष्कार करेंगे, सिर्फ़ भारतीय मुसलमानों का नहीं. तो सबसे पहले आपको पेट्रोल-डीज़ल का इस्तेमाल छोड़ना होगा क्योंकि तेल मुस्लिम देशों से ही आता है.

मान लीजिए, आपने समझदारी दिखाते हुए तेल को बहिष्कृत सामानों की सूची से बाहर रखा तो भी गड़बड़ हो सकती है. आप मुसलमानों का बहिष्कार करेंगे तो मुसलमान भी आपका कर देंगे. संभव है, कोई दूसरा आपको तेल देना ही बंद कर दे. लेकिन किसी भी देशभक्त को इस बात से परेशान नहीं होना चाहिए कि कोई दूसरा देश उसे सामान देना बंद कर सकता है. हम याचक नहीं हो सकते. हम तेल का इस्तेमाल छोड़ देंगे. इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदेंगे. न ख़रीद पाए तो बैलगाड़ी पर चलेंगे, लेकिन पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करेंगे. लेकिन संकट और भी हैं. पेट्रोल तो आपको मालूम है कि कहां से आता है. लेकिन बहुत सारा सामान ऐसा है जिसके कारोबार या जिसकी मिल्कियत या जिसके पीछे लगी पूंजी का आपको पता नहीं चलता. आख़िर आप कैसे पता करेंगे कि कौन सा कारोबार हिंदू का है या मुसलमान का ?

जिन पान दुकानों पर गुटखा ख़रीदते हैं, वहां तो शायद प्रधानमंत्री के बताए मुताबिक दाढ़ी या कपड़े देखकर पहचान लेंगे, हो सकता है कुछ सब्ज़ी और ठेले वालों को भी पहचान लें, लेकिन जो बड़े कारोबार हैं, उनमें किसका पैसा किस रूप में लगा है, आप कैसे जानेंगे ? हो सकता है, किसी मुसलमान ने अडाणी जी के शेयर खरीद रखे हों, किसी ने मारुति के, किसी ने इन्फ़ोसिस के ? तो इसका एक तरीक़ा यह है कि उन सारी कंपनियों का माल ख़रीदना बंद कर दें जो शेयर बाज़ार में हैं और निवेशकों से पैसे लेकर कारोबार करती हैं. लेकिन फिर ख़रीदने और बेचने के लिए आपके पास बचेगा क्या ? फिर बहिष्कार का सिलसिला शुरू हो तो वह इन्हीं सामानों तक क्यों रुके ?

आपको मुसलमानों के दिए कपड़ों का भी बहिष्कार करना चाहिए. आप इतिहास में जाएंगे तो पता चलेगा कि सिले हुए कपड़े पहनने की रिवायत भी मुसलमानों से आई. महान हिंदू परंपरा में सिलना-काटना शामिल नहीं था. वहां तो बस उत्तरीय, धोती, अंगवस्त्र आदि चलते थे. तो हिंदुस्तान धोती पहनना शुरू कर दे. आपको बहुत सारी सब्ज़ियां और फल खाना भी छोड़ना होगा. सेब-अंगूर सब छोड़ने होंगे. आपको रसोई की बहुत सारी खुशबू चली जाएगी. कंद-मूल खाने का अभ्यास करना होगा. वह स्वदेशी की एक नई अवधारणा होगी जिसमें जीवन का पूरा अभ्यास बदलना होगा.

बीते एक हज़ार साल की बहुत सारी आदतों को छोड़ कर दो हज़ार साल पहले के वैदिक युग में लौटना होगा. बहरहाल, यह मज़ाक छोड़ें. क्या किसी भी स्तर पर मुसलमानों को अलग-थलग और कमजोर करने वाली यह रणनीति कायमाब होगी ? और अगर हो भी गई तो क्या इसके वही नतीजे आएंगे जो हमारी हिंदुत्व ब्रिगेड सोचती है ? क्या आप अपने समाज के 15 करोड़ लोगों को अलग-थलग आजीविकाविहीन करके जी पाएंगे ?

एक तो ऐसा कुछ नहीं होगा, क्योंकि अंततः अपनी सारी सीमाओं के बावजूद 15 करोड़ की आबादी इतनी बड़ी होती है कि वह परस्पर आर्थिक कारोबार करके भी बनी रहे. बल्कि यह संभव है कि अपने आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश में वह कुछ ऐसे तरीक़े खोज निकाले जो उसकी मौजूदा बदहाली से उसे बाहर निकालने में मददगार हों. आख़िर वह एक हुनरमंद कौम है. लेकिन यह न भी हो तो एक देश के भीतर दो देश तो बन ही जाएंगे- आपस में कटे हुए, एक-दूसरे को संदेह और प्रतिशोध के भाव से देखते हुए.

सच तो यह है कि ऐसे दो देश बनाने में हमने अभी ही कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन जब आर्थिक व्यवहार के स्तर पर यह बंटवारा हो जाएगा तो वह रेखाएं इतनी गाढ़ी हो जाएंगी कि मिटाए न मिटेंगी. तो यह हिंदू ब्रिगेड चाहती क्या है ? क्या वह वाकई हिंदुस्तान को दो हिस्सों में बांटना चाहती है ? यह हो न हो, लेकिन यह ख़याल अपने-आप में डरावना है – अमानवीय तो है ही. हालांकि फिर यह दुहराने की ज़रूरत है कि स्वस्थ आर्थिक व्यवहार अपने चरित्र में धर्मनिरपेक्ष ही हो सकते हैं और सबकुछ भले बंट जाए – कारोबार हिंदू-मुस्लिम में नहीं बंटेगा, वह अमीर-गरीब में ही बंटेगा और उन्हीं की प्राथमिकताओं से तय होगा.

  • प्रियदर्शन (NDTV इंडिया में सीनियर एडिटर हैं, से साभार)

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

गायत्री मंत्र की अश्लीलता एवं सच्चाई

Next Post

मोदी, कोरोना वायरस और देश की अर्थव्यवस्था

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

मोदी, कोरोना वायरस और देश की अर्थव्यवस्था

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

बिल गेट्स के इशारे पर देश में नाइट कर्फ्यू ?

December 29, 2021

गौतम बुद्ध की जाति ?

January 27, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.