Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

यस बैंक का NPA : भाजपा का झूठ कांग्रेस के मत्थे

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 16, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

यस बैंक का NPA : भाजपा का झूठ कांग्रेस के मत्थे

गिरीश मालवीय, पत्रकार
यह ‘देश नही बिकने दूंगा’ की बात करते हैं और बड़े-बड़े बैंकों में जमा आम आदमी की रकम को लूट कर अम्बानी जैसे मित्र उद्योगपतियों को बांट देते हैं और यही लोग सवाल पूछे जाने पर बिके हुए मीडिया पर 2 करोड़ की पेंटिंग को मुद्दा बना देते हैं.

जब भी बैंकों के बढ़ते हुए एनपीए की बात आती है तब मोदी सरकार कहती है, ‘यह तो कांग्रेस सरकार का एनपीए है, जो बैंकों द्वारा दर्ज नहीं किया था. उन्होंने उद्योगपतियों को बेतहाशा लोन बांटे थे.’ एक बार जरा इस संदर्भ में यस बैंक की बेलेंस शीट देखिए, आपको पता चल जाएगा कि लोन किसने और कब बांटे ?

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

वर्ष समाप्ति ऋण बकाया –

मार्च 2014         55,633 करोड़
मार्च 2015         75,550 करोड़
मार्च 2016         98,210 करोड़
मार्च 2017      1,32,263 करोड़
मार्च 2018      2,03,534 करोड़
मार्च 2019      2.41,499 करोड़

2014 से 2019 तक यस बैंक की ओर से दिया जाने वाला कर्ज 334 फीसदी बढ़ गया. नोटबंदी वाले साल 2016-17 तथा 2017-18 के 2 वर्षों में यह कितनी तेजी से बढ़ा, यह साफ दिख रहा है. यह कैसे बढ़ा ?

अब यस बैंक कह रहा है कि उसके द्वारा कॉर्पोरेट जगत को दिया गया एक-तिहाई कर्ज डूबे कर्ज की श्रेणी में आ गया है ! कितने आश्चर्य की बात है कि जो यस बैंक पिछले 10 साल से लगातार फायदा दिखाती आ रही थी, उसे इस तिमाही में इतना बड़ा घाटा हुआ है कि उससे इस बैंक की रनिंग कंडीशन में बने रहने पर ही संदेह उत्पन्न हो गया है.

डूबे कर्ज के दबाव की वजह से यस बैंक को चालू वित्त वर्ष की दिसंबर के समाप्त तीसरी तिमाही में 18 हजार 654 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. यह निजी क्षेत्र के किसी बैंक का अब तक का सबसे बड़ा घाटा है, संभवतः यह एक तिमाही में होने वाला बैंकों का सबसे बड़ा घाटा दर्ज किया है. पिछले छह महीनों में बैंक के डिपॉजिटिस में 76 हजार करोड़ रुपये की कमी दर्ज हुई, अब यह मात्र 1.65 लाख करोड़ रुपये ही रह गया है, यह बताता है कि ‘मित्रों’ को पहले से ही खबर थी कि बैंक की हालत खराब है, उन्होंने अपना पैसा निकाल लिया.

सरकार यस बैंक के रिवाइवल प्लान को पहले ही नोटिफाई कर चुकी है. यह आंकड़े जानबूझकर मोरिटोरियम हटाने की घोषणा के बाद में रिलीज किये गए हैं ताकि यस बैंक को लेकर जमाकर्ताओं में ओर पैनिक का माहौल न बने. दरअसल इन आंकड़ों से पता चल रहा है कि अब तक निवेशकों ने जितनी रकम डालने की घोषणा की है, वह ऊंट के मुंह में जीरा जितनी रकम है.

येस बैंक का एनपीए इस साल दिसंबर तिमाही में बढ़कर 18.87 फीसदी हो गया हैं. पिछली अक्टूबर-दिसंबर, तिमाही में एनपीए रेश्यो मात्र 2.10 फीसदी था, यानी एक साल की अवधि में एनपीए 9 गुना बढ़ गया. यह कैसे हुआ ? किसी के पास जवाब नहीं है ? आरबीआई जैसी नियामक संस्था अब तक क्या भाड़ झोंक रही थी ?

यह ‘देश नही बिकने दूंगा’ की बात करते हैं और बड़े-बड़े बैंकों में जमा आम आदमी की रकम को लूट कर अम्बानी जैसे मित्र उद्योगपतियों को बांट देते हैं और यही लोग सवाल पूछे जाने पर बिके हुए मीडिया पर 2 करोड़ की पेंटिंग को मुद्दा बना देते हैं. इस खेल को समझना और समझाना बेहद जरुरी है.

Read Also –

मोदी, कोरोना वायरस और देश की अर्थव्यवस्था
यस बैंक : भारत की बैंकिंग प्रणाली इतिहास का सबसे बड़े संकट
यस बैंक का बचना मुश्किल लग रहा है
बिगड़ते आर्थिक हालात, FRDI बिल की धमक और खतरे में जमाकर्ताओं की जमा पूंजी
नए नोट छापने से रिजर्व बैंक का इन्कार यानी बड़े संकट में अर्थव्यवस्था
इक्कीसवीं सदी का राष्ट्रवाद कारपोरेट संपोषित राजनीति का आवरण

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Tags: एनपीएयस बैंक
Previous Post

राहुल गांधी को वैचारिक तौर पर स्पष्ट और आक्रामक होना होगा

Next Post

एक मोदीभक्त का कबूलनामा !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

एक मोदीभक्त का कबूलनामा !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

डूबते मोदी को ‘‘नीच’’ का सहारा

December 11, 2017

संस्थाएं कमजोर हो रही हैं तो उनकी कीमत पर मजबूत कौन हो रहा है ?

January 25, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.