Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

लाॅकडाउन के नाम पर भयानक बर्बरताओं को महसूस कीजिए

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 19, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

लाॅकडाउन के नाम पर भयानक बर्बरताओं को महसूस कीजिए

दूर के अत्याचारों की कथा पढ़ते हुए हम हैरान-परेशाान ज्यादा होते हैं. जब किसी दिन हमें अमेरिका के मूल निवासियों के नरसंहार की कहानियां पता चलती है तो हम काफी उत्तेजित (शायद रोमांचित) हो जाते हैं. हम अपने जैसे कम जानकारों के बीच यह सब दोहराते हैं कि किस तरह अमेरिका में गए गोरों ने वहां के मूल निवासियों की जगह-जगह घेरेबंदी की, उनका खाना-पीना बंद कर दिया और उन्हें तड़पा-तड़पा कर मार दिया. दूसरे देशों के यातानघर, इंसानी बूचड़खाने, बर्बरताएं, दास प्रथा जैसी अमानुषिकताएं हमें अफसोस से भर देती हैं कि मनुष्य का इतिहास कितना शर्मनाक है लेकिन जरूरी नहीं कि तब भी हम अपने आसपास की भयानक बर्बरताओं को महसूस कर पाएं. हम उन पर उछल-उछल कर गर्व नहीं भी कर रहे हों तो भी उन बर्बरताओं से बने अपने शरीर और उस से मिली अपनी सांसों को पहचान पाना आसान नहीं होता.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

इस वक्त देश के विभिन्न हिस्सों को छोड़िए, देश की राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में ही जो दृश्य हैं, वे जीनोसाइड के दृश्य नहीं हैं तो और क्या हैं ? यह बात अलग है कि अदालत हमें पहले ही बता चुकी है कि जीनोसाइड एक विदेशी अवधारणा है, हमारी नहीं. एक-दो दिन कोई भोला मानुष मान सकता है कि बड़ी भूल हुई या अचानक अव्यवस्था फैल गई लेकिन, 50 दिनों तक लोगों को सड़कों पर मारा-पीटा, दौड़ाया जा रहा हो और फिर भी कोई न माने कि सब कुछ हांका लगाकर सुनियोजित ढंग से किया जा रहा है, तो यह साफ है कि समाज का बड़ा हिस्सा इस बर्बरता में शामिल है. उसी दिन से जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक लॉकडाउन का ऐलान किया था, कौन नहीं जानता था कि उसी वक्त कारखानों और किराये के घरों से मजदूरों को लात लगा दी जाएगी, उनकी तनख्वाहें भी मार ली जाएंगी और उनके लिए कोई सहानुभूति तक नहीं उपजेगी.

यूं, यह कोई साधारण बात नहीं है कि करोड़ों लोग सड़कों पर इस तरह मारे-मारे फिर रहे हैं. उन्हें दुत्कारा जा रहा है, वे लाशों में बदल रहे हैं, बच्चे एक पूरी उम्र की यातनाओं से कई गुना ज्यादा कमसिनी में ही झेल कर दम तोड़ रहे हैं और सब कुछ साधारण-सी बात की तरह है. टेलीविजन के एंकर और नेता मजे से महफिल लगाते हैं, लोग आईटी सेल के मैसेज आगे बढ़ाते हैं और जीनोसाइड और लूट के नये दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं. यह सब इतने सहज ढंग से हो पा रहा है तो इसकी वजह सत्ता में फासिस्टों का होना और पूंजीवाद के साथ गठजोड़ से अपराजेय-सा हो जाना है, पर वजह सिर्फ इतनी ही नहीं है. इसकी वजहें हमारे समाज में मौजूद हैं. इन मजदूरों के साथ यह बे-दिली अचानक पैदा नहीं हुई है, बस यह एक बहुत बड़े पैमाने पर प्रकट हो गई है. यह सिर्फ इस सत्ता की बर्बरता नहीं है, उस कथित सभ्य समाज की बर्बरता है, जो कोरोना आने से पहले रोज अपने खेतों में, फैक्ट्रियों में, बसों में, रेलों में, घरों में, अपनी बातों में, अपने दिलों में, अपने दिमागों में इन लोगों से, इनके बच्चों से घृणा के साथ पेश आता रहा है, वरना क्या यह संभव था कि भले ही सत्ता न चाहती, इतना बड़ा समाज उनकी मदद के लिए खड़ा न हो जाता. कोरोना के कारण ऐसा न हो पाने का बहाना न कीजिएगा.

सत्ता ने मुसलमानों के खिलाफ नफरत और उत्पीड़न के अभियान चलाकर नफरत को गहरा करने का काम जरूर किया पर यह नफरत हमारे यहां सदियों से प्रचुर मात्रा में है, इसे बस हवा दी गई है. हमारी बर्बरता हमारी जड़ों में है. क्या हम स्वीकार कर सकते हैं कि हम एक ऐसी वर्ण व्यवस्था के साथ बड़े होते हैं, जिसे हमारी महान परंपरा बताया जाता है और जिस पर गर्व करते हुए हम बड़े होते हैं. हम अपने ही शहरों, कस्बों और गांवों में दलितों की बस्तियों के अलग-थलग और बुरी स्थिति में होने से परेशान नहीं होते. हम छुआछूत, अत्याचार, उन पर सामूहिक हमलों, अपने ही परिवार के लोगों के मुंह से उनके प्रति आम बोलचाल में नफरत के वमन वगैरह को लेकर इतने सहज रहते हुए बड़े होते हैं कि हम मान ही नहीं पाते कि हमारे यहां ईंट-पत्थरों की इमारतें बनाए बिना ही सदियों से खुले में डिटेंशन सेंटर चलाए जाते हैं, जिन्हें हम बेहतर बदलाव की शक्तियां कहते हैं, उनमें से ही आए दिन बड़े-बड़े लोग इसे जायज ठहराते रहते हैं.

हम सभी जानते हैं कि फिलहाल अपने ही देश में निरीह जानवरों की तरह मारे-मारे घुमाए जा रहे लोगों में से 99 फीसदी लोग दलित, ओबीसी, मुसलमान, आदिवासी समुदायों के हैं, तो समाज क्यों विचलित होने लगा ! यह उसके लिए राहत की बात क्यों न होगी ?

  • धीरेश सैनी

Read Also –

लॉकडाऊन का खेल : एक अन्तर्राष्ट्रीय साजिश
डॉ. सुधाकर राव : सुरक्षा किट की मांग पर बर्खास्तगी, गिरफ्तारी और पिटाई करनेवाली पुलिस और मोदी सरकार मुर्दाबाद
मोदी सरकार ने देश को मौत के मुंंह में धकेल दिया है
मजदूरों का लोंग मार्च राजनीतिक प्रतिरोध नहीं है
आरोग्य सेतु एप्प : मेडिकल इमरजेंसी के बहाने देश को सर्विलांस स्टेट में बदलने की साजिश
21वीं सदी के षड्यंत्रकारी अपराधिक तुग़लक़

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

भारत के मध्यम वर्ग को पैकेज नहीं, थाली बजाने का टास्क चाहिए

Next Post

लाॅकडाउन की आड़ में लगातार गिरफ्तारी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

लाॅकडाउन की आड़ में लगातार गिरफ्तारी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

Satyameva Jayate

January 10, 2024

गांधी जी का देसी अर्थशास्त्र

January 30, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.