Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

इतिहास की सबसे भयंकर मंदी की चपेट में भारत

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 25, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

इतिहास की सबसे भयंकर मंदी की चपेट में भारत

अन्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कल भारत की आर्थिक प्रगति को -4.5% पर लाकर खड़ा कर दिया, पहले यह 1.9% थी. दुनियाभर के देशों की आर्थिक प्रगति का अनुमान लगाते हुए IMF ने भारत की सबसे ज़्यादा रेड मारी है.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

यथार्थ यह है कि भारत इतिहास की सबसे भयंकर मंदी की चपेट में पहुंच चुका है. अन्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कल दो अहम बात कही –

  1. पूरी दुनिया दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी मंदी झेल रही है. इससे उबरना इस बात पर निर्भर है कि सरकारें अपनी नीतियां कैसे तैयार करती हैं. भारत पर भी यह लागू होती है.
  2. IMF के मुताबिक भारत में लॉक डाउन लंबा चला. कोरोना से रिकवरी की दर धीमी रही और देश मंदी में डूब गया.

IMF ने हालांकि अगले वित्त वर्ष में भारत के 6% ग्रोथ की रफ्तार पकड़ने की उम्मीद जताई है, लेकिन खुद उसे भी नहीं पता कि यह हो पायेगा या नहीं.

कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत मंदी में ही नहीं, बल्कि उससे भी बुरी स्थिति यानी अवसाद (डिप्रेशन) में चला गया है.

JNU के सहायक प्रोफेसर सुरोजित दास का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत की ग्रोथ -15% तक जा सकती है.

जाने-माने अर्थशास्त्री अरुण कुमार ने साफ कर दिया है कि देश की 75% जीडीपी अप्रैल में ही खत्म हो गयी थी. मई में 65% जीडीपी धुल चुकी है. एक्सपोर्ट, इन्वेस्टमेंट और उपभोग- ग्रोथ के ये 3 बड़े इंजन ठप हैं. अरुण कुमार के अनुसार अगले 3-4 साल तक हालात नहीं सुधरने वाले.

इसी वित्त वर्ष की बात करें तो 204 लाख करोड़ की इकॉनमी 130 लाख करोड़ पर आ गिरी है. सरकार को टैक्स से मिलने वाला राजस्व जीडीपी की तुलना में 16% से गिरकर 8% होने जा रहा है.

इन हालात में सरकार को अपने कर्मचारियों के लिए सैलरी जुटाना भी मुश्किल हो सकता है. दिख भी रहा है, सरकार ने DA और इंक्रीमेंट रोक दिए हैं.

देश में 20 करोड़ लोग नौकरी खो चुके हैं. अगर एक परिवार में 4 लोगों को भी उन पर आश्रित मानें तो 80 करोड़ लोग भूख, तंगहाली के शिकार होने जा रहे हैं.

इन सभी लोगों को विश्व बैंक की ग़रीबी रेखा के बराबर 1.99$ की जगह 0.99$ की यानी आधी मज़दूरी का भी भुगतान करना हो तो सरकार के पास 18 लाख करोड़ होने चाहिए. मतलब सरकार को 15 लाख करोड़ जुटाने होंगे.

इसी तरह स्वास्थ्य के लिए 2 लाख करोड़ और छोटे उद्योगों के लिए 6 लाख करोड़ को भी जोड़ लें तो सरकार को लगभग 24 लाख करोड़ की ज़रूरत होगी.

इतना पैसा जुटाना मतलब जीडीपी का 50% खर्च करना. कुमार का आंकलन कहता है कि देश के अमीरों की भी दो-तिहाई संपत्ति जाने वाली है. स्टॉक मार्केट और रियल एस्टेट, दोनों में निवेश घाटे का सौदा होगा.

यानी बेहद बुरे हालात हैं. 2019-20 के स्तर तक इकॉनमी को पहुंचने में 4 साल भी लग सकते हैं. तब तक भूख, बेबसी, बेरोज़गारी लाखों जान ले लेगी.

कोई कह रहा था कि ये दुनिया खत्म होने वाली है. हो जाये. ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है !

  • सौमित्र राय

Read Also –

क्या हम वैश्विक मंदी की ओर बढ़ रहे हैं ?
कॉरपोरेटपरस्त राजनीति हाशिए पर धकेल रही है आम आदमी केन्द्रित राजनीति को
नए नोट छापने से रिजर्व बैंक का इन्कार यानी बड़े संकट में अर्थव्यवस्था
अमिताभ कांत जैसे लोगों की वैचारिक असलियत का पर्दाफाश होना चाहिए 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

यह कैसा समय है भाई ?

Next Post

अब वे झुंड में आयेंगे

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

अब वे झुंड में आयेंगे

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

महामारी भाग – 1

May 20, 2021

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन: भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

August 27, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.