Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

आम आदमी के हीरो वरवरा राव को खत्म करने की सरकारी साजिश

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 12, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

आम आदमी के हीरो वरवरा राव को खत्म करने की सरकारी साजिश

वरवरा राव

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

वरवरा राव गर अमिताभ बच्चन की तरह जवानी में सिनेमा की राह पकड़ते तो आज उनको भी चमचमाता हुआ अस्पताल मिलता. फिलहाल वे कैद हैं, बीमार हैं. ब्रश तक करने की हालत में नहीं हैं. दोनों एक ही उम्र के हैं. एक के लिए राष्ट्र दुआ मांग रहा है, दूसरे की जान का जिक्र और फिक्र कितनों को है, वो उंगलियों पर गिन लीजिए, जगह शायद तब भी बच जाए.

वरवरा राव कवि हैं, लिटररी क्रिटिक और मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता हैं. 1957 के जमाने से कविता लिख रहे हैं. आम जनता के लिए काम कर रहे हैं, लिहाजा राजनीतिक पक्षधरता भी है, जो जाहिर है सत्ता को चुभती है.

जब अमिताभ पर्दे पर नाच रहे थे, रिझा रहे थे, प्रेम में मशगूल अनाप-शनाप पैसा बना रहे थे, तब तेलुगू साहित्य के नामी आलोचकों में शुमार वरवरा राव यूनिवर्सिटी के छात्रों को तेलुगू पढ़ा रहे थे. सड़कों पर जनता के गीत गा रहे थे. सरकारों के खिलाफ जनादोलनों में लोहा ले रहे थे.

फिर भीमा कोरेगांव मामले में सरकार ने राव पर नक्सल समर्थक होने का आरोप मढ़ा. और जैसा कि इन दिनों तमाम राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ हो ही रहा है, उन्हें बंदी बनाकर जेल पहुंचा दिया गया. आज तक ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ. हमें सिनेमाई नायक चाहिए मनोरंजन के वास्ते, लेकिन हमें असल नायक भी तो चाहिए न, स्वस्थ समाज के वास्ते !

राजा को जो पसंद हो वही राग बजाने का रिवाज कोई नया भी तो नहीं न ! खैर, अब जबकि अमिताभ बच्चन की बीमारी के बाद दुवाओं की बाढ़ आई तो लगा वरवरा राव को भी याद किया जाए. आखिर एक बुड्ढे ने सिनेमा दिया है तो दूसरे ने असल जमीन के संघर्ष को तो जिंदा रखा न !

सरकारों को राजनीतिक बंदियों जो बीमार हों, क्या उनसे ठीक से सुलूक नहीं करना चाहिए ? आदमी जिंदा रहेगा तो विचारधारा की लड़ाई तो बाद में भी लड़ी जा सकती है न भई ! बाकी वरवरा राव ने न संपत्ति जोड़ी न पनामा पेपर में टैक्स चोरी का ही आरोप कभी लगा, बातें भी वैज्ञानिक ही की. ढोल थाली से शायद ही कोरोना भगाने का ढोंग ही किया होगा.

कुल मिलाकर गर विचारधाराओं की लड़ाई और दंभ अत्याधुनिक मानव समाज की परिकल्पना ही है, तब दूसरे से संवाद के बजाय कैद करने का अधिकार किसी के भी पास कैसे हो सकता है ? बुड्ढे स्वस्थ रहें, बाकी जनता को जो सहेजना-समेटना होगा वो अपने-अपने हिसाब से सहेज-समेट ही लेगी ?

वर्षों पहले (23.10.1985) कवि वरवरा राव एक कविता लिखे थे बैंजामिन मालेस की याद में. यह कविता आज खुद वरवरा राव पर सटीक बैठती है, जब शासक एक फर्जी मुकदमें में इनको कैद कर, तिलतिल मारकर इनकी आवाज बंद कर देने की साजिश कर रही है.

जब प्रतिगामी युग धर्म
घोंटता है वक़्त के उमड़ते बादलों का गला
तब न ख़ून बहता है
न आंंसू.

वज्र बन कर गिरती है बिजली
उठता है वर्षा की बूंदों से तूफ़ान…
पोंछती है मांं धरती अपने आंंसू
जेल की सलाखों से बाहर आता है
कवि का सन्देश गीत बनकर.

कब डरता है दुश्मन कवि से ?
जब कवि के गीत अस्त्र बन जाते हिं
वह कै़द कर लेता है कवि को.

फांंसी पर चढ़ाता है
फांंसी के तख़्ते के एक ओर होती है सरकार
दूसरी ओर अमरता
कवि जीता है अपने गीतों में
और गीत जीता है जनता के हृदयों में.

(रचनाकाल : 23 अक्तूबर 1985)

  • गौरव नौरियाल

Read Also –

वरवर राव की गिरफ्तारी में दिखा हिंसक पुलिस का विद्रुप ब्राह्मणवादी चेहरा
‘कौन है अरबन नक्सल ?’ संघी दुश्प्रचार का जहरीला खेल
बताइये ! इस लेखक से मोदी जी की जान को खतरा है

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

तुम धरती हो …

Next Post

स्त्री-साहस का प्रतीक

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

स्त्री-साहस का प्रतीक

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

हिरोशिमा, शिन और ‘क्लाड इथरली’ : एक लहूलुहान चेतना

August 9, 2023

‘आपकी कलम हथियार के अधिक खतरनाक है’ – NIA

September 7, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.