Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

लॉकडाऊन की हकीकत : गुंडों की सरकार

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 5, 2020
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

लॉकडाऊन की हकीकत : गुंडों की सरकार

लॉकडाऊन के नाम पर मोदी सरकार देश को नोटबंदी से भी भयावह खाई में धकेल चुकी है. ‘आपदा में राहत की तलाश’ करते सरकारी और गैर-सरकारी गुंडे लोगों की आखिरी सांस तक निचोड़ डालने पर आमादा है. वह हर संंभव तरीके का इस्तेमाल कर लोगों को लूट रहा है. ऐस
ही लूट का एक उदाहरण सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल हुआ है.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

मैं दिल्ली में दिहाड़ी का काम करता हूं. फरवरी, 2020 में अपने घर खगड़िया जिला आया. बाहर रहने से अपने परिवार की याद आती रहती थी, सोचा थोड़ा कम ही कमाऊंगा लेकिन अपने परिवार के साथ रहूंगा. सोचा खगड़िया में ही कोई रोजगार करूंगा.

दिल्ली से कमा कर लगभग ₹20,000 लाया. कुछ अपने एक संबंधी से ₹10,000 लेकर के कुल ₹30,000 एक ई-रिक्शा वाले एजेंसी को दिया. उन्होंने ₹130,000 में एक ई-रिक्शा दिया, जिसमें ₹100,000 का किस्त 12 महीने का लगभग ₹8000 प्रतिमाह तय किया. किसी प्रकार एक किस्त जमा कर पाया तो करोना महामारी के चलते पूरे देश में लॉकडाऊन लग गया.

इस 4 महीने में घर के लिए 2 जून की रोटी का भी इंतजाम करना मुश्किल हुआ, लेकिन किसी तरह जी रहा था. ट्रेन और बस चल ही नहीं रही है कि सवारी मिलेंगे कहां से ! कभी-कभी गांव में किसी की तबीयत खराब होती है, गांव से शहर किसी डॉक्टर के यहां दिखाने ले जाता हूं तो एक भाड़ा ₹100 मिल जाता है. घर में खाने के लिए अन्न नहीं है. मेरे साथ बहुत से ई-रिक्शा वाले के परिवार के साथ यही परेशानी है.

आज मैं अपने गांव से खगड़िया शहर एक मरीज को डॉक्टर के यहां ले गया लेकिन हमें क्या मालूम था कि खगड़िया नगर में नगरपालिका के कार्यपालक पदाधिकारी के सरकारी गुंडे यहां हमें तंग करेंगे ! एक आदमी आया और जबरदस्ती मेरे रिक्शा को थाम लिया, बोला ‘नगरपालिका का टैक्स जमा नहीं किए हो. तुम्हारे रिक्शे को हम जब्त करते हैं, अन्यथा ₹850 का अभी चालान जमा करो.’

मेरे पास उस मरीज से मांग कर के किसी तरह से ₹200 का जुगाड़ हो पाया लेकिन वह मानने के लिए तैयार नहीं था. मैं रो रहा था वह मुझे गाली दे रहे थे. हमें मारने के लिए हाथ भी उठाएं. मैं डर के मारे समर्पण कर दिया. फिर अपने कुछ परिचित लोगों को फोन किया. वह किसी की बात मानने के लिए तैयार नहीं थे. एक परिचित ने सारे ₹850 रोहित राज के नाम से उसके पेटीएम पर भेजें, तब जाकर के हमें और हमारा रिक्शा छूट पाया.

साहब, हम एक गरीब आदमी इस लॉकडाउन में सारे ₹850 कहां से लाएं ? घर में एक शाम खाना बनता तो किसी शाम खाना बनता भी नहीं है. साहब 4 महीने हो गए पता नहीं यह लॉकडाऊन कितना दिन चलेगा. हम रिक्शावाले कैसे परिवार का जिंदगी बसर करेंगे ? हम लोग के पास तो एक धुर जमीन भी नहीं है, जो खेती करके कुछ अनाज हो सके.

काम धंधा बंद है कुछ समझ में नहीं आ रहा, ऊपर से बिहार सरकार के पोषित गुंडे हमें जान मारने पर उतारू रहते हैं. साहब स्थिति तो यह हो गई है कि रोटी के लिए अपने और अपने परिवार को जिंदा रहने के लिए हम रिक्शा वालों को अपने परिवार से हो सकता है धंधा भी करना पड़ जाए. हम मजबूर हैं. आप राहत नहीं दे सकते हैं तो कम से कम अत्याचार तो बंद करें.

वहीं, दूसरी ओर हजारों की तादाद में ऐसे वीडियो वायरल हुए है, जहां पुलिसिया गुंडे गरीब दुकानदारों के दुकान लूटते, ठेला उलटते और लोगों को पीटते देखे गये हैं. इनमें से एक विडियो हम यहां पेश कर रहे हैं, जिसे छिपाकर रिकॉर्ड किया गया है.

http://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2020/08/VID-20200729-WA0029.mp4

पुलिसिया गुंडे हो या सरकारी गुंडे, इन सबों का एकमात्र उद्देश्य जनता को लूटना और विरोध को किसी भी हद तक जाकर खत्म करना है. इसके लिए पिटाई, वसूली से लेकर फर्जी एफआईआर कर जेल भेजे जाने की कबायद तक शामिल है. यह सभी निश्चित तौर पर सरकारी संरक्षण के वगैर असंभव है, जिसे हम गुंडों की सरकार भी कह सकते हैं अर्थात, गुंडों के द्वारा, गुंडों के लिए, गुंडों की सरकार.

Read Also –

सेना, पुलिस के बल पर आम जनता को कुचलने की निःशब्द और क्रूर कोशिश का नाम है – कोरोना महामारी
लॉकडाऊन : भय, भूख और अलगाव
लाॅकडाउन के नाम पर भयानक बर्बरताओं को महसूस कीजिए
अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत कोरोना के नाम पर फैलाई जा रही है दहशत 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

बड़ी पूंंजी के प्रति समर्पित नई शिक्षा नीति, 2020

Next Post

गोलवलकर के हिन्दुत्व की घातक राह

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

गोलवलकर के हिन्दुत्व की घातक राह

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

देश भर के विश्वविद्यालयों में संघर्ष कर रहे साथियों के नाम

January 4, 2024

जांच चल रही है

July 2, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.