Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्तियों को एक भारतीय का खुला पत्र

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 27, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

लंदन में रहने वाले पत्रकार आशीष रे ने प्रशांत भूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों को एक खुला पत्र लिखा है. पूरे पत्र का हिन्दी अनुवाद पेश है. अनुवाद संजय कुमार सिंह ने किया है.

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्तियों को एक भारतीय का खुला पत्र

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

माननीय न्यायमूर्तिगण,

मैं नहीं जानता कि भारत के 135 करोड़ से ज्यादा लोगों में कितने मेरे जैसे हैं क्योंकि मेरा जन्म विएना में हुआ था, मैंने अपना दो तिहाई जीवन लंदन में गुजारा है पर हमेशा ही भारत को अपना देश माना है.

संभवतः इससे भारत के प्रति मेरी निष्ठा और विनम्र प्रतिबद्धता का पता चलता है. इस बात का मतलब नहीं है कि भारत ने इसे नहीं माना है क्योंकि मेरे देश के प्रति मेरा सम्मान किसी तारीफ के लिए नहीं है.

हालांकि, भारत अपने तय या निर्धारित मार्ग से भटकता है तो मुझे चिन्ता होती है. जब चरण सिंह प्रधानमंत्री बने और संसद में अपना बहुमत साबित नहीं किया तो मैं परेशान हुआ था. और जब नरेन्द्र मोदी निर्वाचित हुए तब भी मैं बहुत परेशान था. दरअसल इस मामले में मुझे जिस बात का डर था, वह सच हो ही गया है.

कोविड-19 के सबसे ज्यादा मामले भारत में रोज दर्ज किए जा रहे हैं. भगवान जाने मौत के आंकड़े कहां पहुंचेंगे ? इसके लिए अवैज्ञानिक प्रक्रिया जिम्मेदार है.

औपचारिक क्षेत्र में कम से कम 12 करोड़ और संगठित क्षेत्र में दो करोड़ लोग बेरोजगार हैं. अगर इन लोगों की कमाई से परिवार का खर्च चलता है तो इसका मतलब हुआ 70 करोड़ भारतीय गंभीर मुश्किल में हैं. इस संकट का कारण यह है कि गुजरे छह साल के ज्यादातर हिस्सों में भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे खराब होती गई है. संकेतों के बावजूद कोई भी प्रोत्साहन जिसे प्रोत्साहन कहा जा सके, नहीं पेश किया जा रहा है. भारत दिवालिया हो चुका है. इसकी संप्रभु रेटिंग शून्य या बेकार से ठीक ऊपर है.

तमाम विश्वसनीय रपटों से पता चलता है कि चीनी सैनिक अभी भी लद्दाख में हमारे सीमा क्षेत्र में हैं. इससे गुजरे छह वर्षों में हमारी विदेश नीति की संपूर्ण नाकामी का पता चलता है जिससे नेपाल के साथ भारत के खास, ऐतिहासिक और विशेष संबंध भी चौपट हो चुके हैं. दूसरे देशों के संबंधों की क्या बात करूं ? भारत की स्थिति लगभग ऐसी है कि यह पड़ोसियों में किसी भरोसेमंद विदेशी सहयोगी के बिना है. इसका सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता और जरूरत पड़ने पर परंपरागत मित्र की तरह व्यवहार करने वाला रूस तटस्थ है.

कश्मीर में कश्मीरी भारतीय नागरिक हैं पर भारत सरकार ने उनके मानवाधिकारों का सबसे बड़ा और खुला उल्लंघन कर रखा है. अर्थव्यवस्था की जो बर्बादी हुई है उसकी तो गणना भी नहीं की जा सकती है. घाटी में जिस तरह लोगों को अलग-थलग कर दिया गया है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ.

उपरोक्त सभी मामलों में भारत की सर्वोच्च अदालत या तो आश्चर्जनक रूप से शांत रही है या फिर इस लायक नहीं माना है कि इस पर सुनवाई कर शीघ्रता से फैसला दिया जाए.

पहली नजर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 का उल्लंघन लगने वाले मामले में फ्रांस से राफेल विमान की खरीद के पिछले सौदे को रद्द कर नया सौदा करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन चीट दे दी.

ऐसे समय में आप अधिवक्ता प्रशांत भूषण के ट्वीट से ऐसे नाराज हो गए हैं जैसे आपने कार्रवाई नहीं की होती तो आसमान गिर जाता. जो स्थिति है उसमें उनकी नाराजगी क्या जायज नहीं है ?

ब्रिटेन में कभी-कभी सुप्रीम कोर्ट के आचरण पर सबसे दोषपूर्ण और घटिया प्रतिक्रिया सामने आती है और टैबलॉयड प्रेस में इसका आक्रामक शीर्षक भी शामिल होता है. जजों को भी ब्रिटिश विरोधी कहा गया है. हालांकि, एक बार भी अदालत ने ऐसी बकवास को महत्व देने की परवाह नहीं की है.

सही सोच वाले अच्छे काम से मतलब रखने वाले भारतीय सुप्रीम कोर्ट से भलाई करने वाले मध्यस्थ की अपेक्षा करते हैं. लोग यही समझते हैं कि जब बाकी सब नाकाम हो जाएंगे तो सुप्रीम कोर्ट हमें बचा लेगी. ऐसे लोग आज क्या सोच रहे हैं ? अगर भारत के लोगों का सुप्रीम कोर्ट पर से विश्वास उठ गया तो भारत में कुछ और बुरी बातें हो सकती हैं.

इसलिए मैं आप सबसे अपील करता हूं. मेरी उम्र आप सब से ज्यादा है. कृपया मेरी बात पर ध्यान दीजिए. मैं इतना सौभाग्यशाली हूं कि मेरे जीवन में अच्छे और उपकार करने वाले कई अनुभव हुए हैं.

भारत सर्वोपरि है. मैं आप सबसे अपील करता हूं कि भारत को निराश न करें. उम्मीद करता हूं कि आप इस हस्तक्षेप के लिए माफ करेंगे.

सादर,
आशीष रे, लंदन

Read Also –

प्रशांत भूषण प्रकरण : नागरिक आजादी का अंतरिक्ष बनाम अवमानना का उपग्रह
सुप्रीम कोर्ट : न च दैन्यम, न पलायनम !

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

पुलवामा जांंच रिपोर्ट : बस एक धुंए की दीवार

Next Post

एक झूठा आदमी जब सत्ता पर काबिज हो जाये

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

एक झूठा आदमी जब सत्ता पर काबिज हो जाये

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कोराना वायरस : अर्थव्यवस्था और प्रतिरोधक क्षमता

May 1, 2020

हत्यारा विरोध से नहीं सिर्फ अपनी मौत से कांपता है

June 15, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.