Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

पुलिस की ‘प्रतिष्ठा’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 17, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

दिल्ली के पुलिस आयुक्त ने क्षोभ व्यक्त किया है कि ‘कुछ लोग उसकी छवि ख़राब करने के लिए सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं जबकि दिल्ली पुलिस फ़रवरी दंगों की निष्पक्ष जांंच कर रही है.’

कल पूर्व जेएनयू छात्र उमर ख़ालिद की गिरफ़्तारी की व्यापक आलोचना को पुलिस आयुक्त अस्वीकार करते हैं और दंगों के लिए नागरिकता क़ानून के विरोधियों को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. उनके अनुसार प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करना दंगों की तैयारी का पहला षड्यंत्र था. फिर प्रदर्शनकारियों को भड़काना सीधे दंगों की आग लगाने के समान था.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

उमर ख़ालिद के ख़िलाफ़ ‘सबूत’ भी है—उसने एक भाषण में सरकार की आलोचना की ! मज़ेदार बात यह है कि अमरावती में उमर ख़ालिद के भाषण से दिल्ली के दंगे शुरू हो गये, जबकि प्रदर्शन स्थल पर ‘गोली मारो सालों को’ नारा लगाने से दंगों के किसी संबंध का ‘सबूत’ नहीं मिला है ! अब बताइए, कितनी निष्पक्ष जांंच है ! है कि नहीं ??

और तो और, सचमुच गोली चलाते हुए ‘ग़द्दारों’ को सबक़ सिखाने पहुंंच गए उत्साहियों से भी दंगों का कोई संबंध पुलिस को नहीं दिखाई दिया बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों द्वारा दंगा भड़काने के ‘सबूत’ पुलिस ने खोज निकाला ! तभी तो माकपा महासचिव सीताराम यचूरी, स्वराज अभियान के नेता योगेन्द्र यादव, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद, जेएनयू की अर्थशारत्र प्रोफ़ेसर जयती घोष आदि के ख़िलाफ़ ‘पर्याप्त’ सबूत मिल गए हैं, जिसके आधार पर उनके ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर कर दी गयी है. फिर भी पुलिस आयुक्त को लगता है कि लोग छवि ख़राब कर रहे हैं !!

आख़िर कुछ तो कारण है कि अनेक पूर्व पुलिस अधिकारियों ने सामूहिक तौर पर मांंग की है कि दिल्ली पुलिस दंगों की जांंच में निष्पक्षता से काम ले.

एक बात और. दिल्ली पुलिस अपने कारणों से संदिग्ध बन रही है लेकिन जिस प्रेरणा से वह ऐसा कर रही है, वही प्रेरणाएंं मुंबई पुलिस की छवि ध्वस्त करने में पूरे उत्साह से लगे हुए हैं. क्या पुलिस-पुलिस में राजनीतिक आधार पर अंतर किया जाना चाहिए ? क्या ऐसा करना राष्ट्रीय और प्रशासनिक दृष्टि से उचित है ?

बात इसलिए उठती है कि दिल्ली पुलिस जिस केंद्र की देखरेख में काम करती है, उसी राजनीतिक नेतृत्व में यूपी पुलिस काम करती है और यूपी पुलिस ने भी पक्षपात के मामलों में कम यश नहीं कमाया है. यहांं तक कि पीछे कुछ घटनाओं में अपराधियों को संरक्षण देने और सूचनाएंं पहुंंचाने में भी पुलिस के लिप्त होने की बातें बराबर उठती रही हैं.

यानी, आप सत्ता में बैठकर मनमाने तरीक़े से पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल करेंगे और सवाल उठने पर देशद्रोह के आरोप लगाकर असहमत लोगों को जेल भेज देंगे, फिर भी कोई चूंं तक न करे ! यह निरंकुश तानाशाही की ओर बढ़ने का संकेत नहीं तो क्या है ?

मुझे पता है कि इस तरह की टिप्पणी मेरे ख़िलाफ़ इस्तेमाल की जा सकती है. बहुत-से सत्ता-विरोधी ज्ञानी भी निरंकुशता का विरोध छोड़कर पूरे धार्मिक जोश के साथ मेरा विरोध करेंगे लेकिन क्या इस कारण सच न बोला जाय ?

वहीं, वरिष्ठ आईपीएस जूलियो रिबेरो की दिल्ली पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिखे हैं. दरअसल, दिल्ली दंगों की तफ्तीश, अब तक दंगों की तफ़्तीशों में सबसे विवादित तफतीश बनती जा रही है. अदालत की अनेक टिप्पणियां पुलिस थियरी के बिल्कुल प्रतिकूल हैं. सेवानिवृत्त आईपीएस अफसर और गुजरात तथा पंजाब के डीजीपी रह चुके, जूलियो रिबेरो ने दिल्ली दंगों से संबंधित मामलों की जांच पर सवाल उठाते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव को एक पत्र लिखा है. उनके पत्र का पूरा पाठ इस प्रकार है –

प्रिय श्री श्रीवास्तव,

यह पत्र मैं आपको भारी मन से लिख रहा हूं. एक सच्चे देशभक्त और भारतीय पुलिस सेवा के एक पूर्व गौरवशाली सदस्य के रूप में मैं आपसे अपील करता हूं कि उन 753 प्राथमिकियों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें, जो शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पंजीकृत हैं, और जिन्हें स्वाभाविक तौर पर यह आशंका है कि अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ व्याप्त पूर्वाग्रह और घृणा के कारण उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा.

दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ तो कार्रवाई किया, लेकिन जानबूझकर उन लोगों के खिलाफ संज्ञेय अपराधों के मामले दर्ज करने में विफल रही जिनके नफ़रत फैलाने वाले भाषणों के कारण उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क उठे थे. ऐसी स्थिति मेरे जैसे संतुलित तथा अराजनीतिक व्यक्ति को परेशान करती है, कि क्यों न्यायालय के समक्ष कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा पर दोषारोपण नहीं किया गया ? जबकि धर्म के आधार पर भेदभाव का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रही मर्माहत मुस्लिम महिलाओं को महीनों के लिए जेल में डाल दिया गया !

हर्ष मंदर और प्रो. अपूर्वानंद जैसे सच्चे देशभक्तों को आपराधिक मामलों में फंसाने की दिल्ली पुलिस की इतनी भोंडी कोशिश भी चिंता का एक और विषय है. हम, इस देश की पुलिस और भारतीय पुलिस सेवा से आने वाला इसका नेतृत्व, हमारा कर्तव्य और दायित्व है कि हम संविधान और उसके तहत अधिनियमित कानूनों का जाति, पंथ और राजनीतिक संबद्धता के बिना निष्पक्ष रूप से सम्मान करें.

कृपया दिल्ली में अपनी कमान के तहत हुई पुलिस की कार्रवाई का पुनर्मूल्यांकन करें और निर्धारित करें कि क्या उन्होंने सेवा में शामिल होने के समय ली गई शपथ के प्रति वफादारी का निर्वाह किया है ?

सादर,
जूलियो रिबेरो
आईपीएस – 53, एमएएच ( सेवानिवृत्त )

  • अजय तिवारी

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

गेस्टापो – सीक्रेट पुलिस बनाम उत्तर प्रदेश पुलिस

Next Post

आंंकड़े

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

आंंकड़े

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भारत में लोग किस मुंह से धर्म, नैतिकता, मानवता और चरित्र की बात कर लेते हैं…?

May 4, 2023

पूंजीवादी ‘विकास’ की बदौलत तबाही के मुहाने पर पहुंचा जोशीमठ

March 10, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.