Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस पर बेरोजगारों के नाम रविश का पत्र

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 18, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस पर बेरोजगारों के नाम रविश का पत्र

आज राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस था. ज़्यादातर न्यूज़ चैनलों ने कवर किया है या नहीं, अब इस सवाल का मतलब नहीं है. यह सवाल होना चाहिए कि सरकार ने संज्ञान लिया या नहीं ? बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर यह आंदोलन हुआ लेकिन इसमें कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित सरकारों से त्रस्त युवा भी ट्विट कर रहे थे. बंगाल और असम से भी लोग बोल रहे थे.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

कई लोगों को यह शिकायत रहती है कि उनकी परीक्षा का ज़िक्र क्यों नहीं हुआ ? वे बार-बार मैसेज करते हैं. सिर्फ़ ज़िक्र के लिए कातर हो जाते हैं जबकि जिनका होता है उन्हीं का कुछ नहीं होता. ज़िक्र आते ही बधाई देने लगते हैं. अजीब हाल है. क्या आप सिर्फ़ ज़िक्र के लिए तरस रहे हैं ? मैं सबका न ज़िक्र करूंंगा और न संभव है.

दो साल से एक ही बात कह रहा हूंं, फिर भी लोग अपनी परीक्षा को लेकर ही मैसेज करते रहते हैं. बड़ा सवाल है परीक्षा व्यवस्था ठीक हो. भर्ती निकले और रोज़गार की शर्तें बेहतर हो. मैं हमेशा उसे ही सामने रखकर कवर करता हूंं तो मुझे अलग से अपनी परीक्षा के लिए मैसेज न करें.आज एक बार और आप लोगों की सामूहिक हार हुई है। व्यक्तिगत स्वार्थ और मेरी परीक्षा सवाल छोड़ कर उन प्रश्नों पर विचार करें.

पहले आस-पास पता करें कि लोग क्या देख रहे थे, अगर ये पता चले कि आपके घर में, यार, दोस्त, रिश्तेदार बेरोज़गारी के सवाल को छोड़ कर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के नाम पर मीडिया का अश्लील कवरेज देख रहे थे तो ये कार्यक्रम भी न देखें. आप भी वही देखें. पर आप लोगों ने कोशिश तो अच्छी की. शांति और धीरज का प्रदर्शन किया. यह सबक़ जीवन भर काम आएगा.

मेरे प्यारे बेरोज़गार मित्रों,

छोटा पत्र लिख रहा हूंं. मैं आपके आंदोलन से प्रभावित नहीं हूंं. आप में जनता होने का बौद्धिक संघर्ष शुरू नहीं हुआ है. आपकी राजनीतिक समझ चार ख़ानों तक ही सीमित है इसलिए आप लोगों से कोई उम्मीद नहीं रखता. जो युवा मीडिया और मीम से भीड़ में बदले जा सकते हैं, वे आगे भी बदले जाएंंगे. आप मुझे सही साबित करेंगे. जनता बनने की लड़ाई सबसे मुश्किल लड़ाई होती है. आप जनता नहीं बन सके. अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं और वो भी छोटी लड़ाई. आप असफलता के लिए अभिशप्त हैं.

लेकिन बार-बार नए-नए तरीक़े से संघर्ष करने की कोशिश से मैं साढ़े तीन प्रतिशत प्रभावित हुआ हूंं. मैं जातिवादी और सांप्रदायिक हो चुके नौजवानों से इतनी ही उम्मीद रखता हूंं. प्यारे मुल्क के लोकतांत्रिक वातावरण को बर्बाद करने में आप सभी का भी योगदान रहा है. मैं नेता नहीं हूंं, जो आपका वोट चाहता हूंं. मुझे सांप्रदायिक हो चुके नौजवानों का हीरो नहीं बनना है. जो युवा व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी की मीम के गुलाम हैं, मुझे उनसे उम्मीद नहीं है.

आप बेरोज़गारों ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन को अपनी बात कहने का मौक़ा चुना है. अच्छी बात है कि लगातार फेल होने के बाद भी आप नौजवान कोशिश कर रहे हैं लेकिन यह कोशिश यूपी या बिहार तक सीमित न रहे. बंगाल तक भी जाए और पंजाब तक भी. बिहार तक भी जाए और मध्य प्रदेश तक भी. रोज़गार के स्वरूप के व्यापक प्रश्नों को भी शामिल करें.

अपनी परीक्षा, अपना रिज़ल्ट की भावना आपके आंदोलन को कहीं नहीं पहुंंचने देगी. कालेजों की फ़ीस का भी हाल देख लें. कालेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की गुणवत्ता और उनकी नौकरी का हाल देख लें. ठेके पर पढ़ाने वाले शिक्षक आपका भविष्य नहीं बना सकते.

अपनी लड़ाई का दायरा बड़ा करें. लड़ाई से मेरा मतलब आरती से है. दिल्ली पुलिस ने दंगों की चार्जशीट में लिखा है कि चक्काजाम लोकतांत्रिक नहीं है. क्या पता लड़ाई लिखने पर कोई धारा लग जाए इसलिए आप आरती करें. अब वही करने को बचा है.

बेरोज़गार यह भी समझ लें कि उन्हें मीडिया में बाहर कर दिया है इसलिए बग़ैर मीडिया कवरेज के शांतिपूर्ण और शालीन संघर्ष की कामना करें. स्वाभिमान पैदा करें कि बिना मीडिया के भी वर्षों संघर्ष करेंगे. मोमबत्ती जलाने के बाद न्यूज़ चैनल न खोलें कि वहांं दिखाया जा रहा है या नहीं. न्यूज़ चैनलों ने जनता का ब्रेन वॉश कर दिया है. मानसिक रूप से बेरोज़गार कर दिया है. न्यूज़ चैनलों को बेरोज़गार कीजिए. देखना बंद करें. लोगों को समझाएंं.

आप मुख्यधारा के अख़बारों और चैनलों पर एक रुपया खर्च न करें. ख़ुद देखें कि आप क्यों पढ़ते हैं इन्हें ? इनमें ख़बर नहीं होती है. होती है तो असर नहीं होता है क्योंकि दिन रात प्रोपेगैंडा छाप कर जनता को चेतना शून्य कर दिया है इसलिए सिर्फ़ रोज़गार की लड़ाई न लड़ें. एक पाठक और दर्शक की भी लड़ाई लड़ें. कुछ वेबसाइट है जिन्हें सपोर्ट करें. पढ़ें. article14, scroll, the wire, the ken, Quint, Newslaundry, Alt News, The News Minute, Gorakhpur Times, Live Law, People’s Archive of Rural India (PARI), India Spend, media vigil, janchowk, इन सबको पढ़ें.

आपने ही प्रधानमंत्री को चुना है लेकिन मुझे बुरा लगा कि आपने उन्हें जन्मदिन की बधाई नहीं दी. छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता. अटल जी की पंक्ति है. उन्हें भी खुले मन से जन्मदिन की शुभकामनाएंं दीजिए. ट्विटर पर मैंने आपके सारे पोस्टर देखे, अगर एक पंक्ति शुभकामनाओं के लिख ही देंगे तो आपका आंदोलन छोटा नहीं होगा. उन पोस्टरों को देख कर लगा कि आपके आंदोलन में विचार की कमी है. बहुत बोरिंग है आपका आंदोलन. तभी लगा कि मुझे पत्र के ज़रिए आपसे संवाद करना चाहिए.

ख़ुद को बदलना ही पहला आंदोलन होता है, जो लिखा है उसे ध्यान से पढ़ें. आप सफल हों.

रवीश कुमार

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

युद्ध विराम

Next Post

हमारा समाज और हमारा घर बच्चों का कत्लगाह बनता जा रहा है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

हमारा समाज और हमारा घर बच्चों का कत्लगाह बनता जा रहा है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

21वीं सदी के षड्यंत्रकारी अपराधिक तुग़लक़

May 2, 2020

बस्तर में कोहराम : राष्ट्रीय लूट और शर्म का बड़ा टापू

June 18, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.