Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

जब वाजपेयी ने तिब्बत चीन को गिफ्ट किया और हथियार ना प्रयोग करने वाले समझौते की नींव रखी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 27, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

जब वाजपेयी ने तिब्बत चीन को गिफ्ट किया और हथियार ना प्रयोग करने वाले समझौते की नींव रखी

अटल बिहारी बाजपेयी का चीन के साथ संबंधों में गहरा योगदान है. 1950 के स्वयंसेवक अटल के चीन के लिए नकारात्मक विचार मोरारजी सरकार में विदेश मंत्री अटल और बाद में प्रधानमंत्री बनते-बनते एकदम बदल गए थे. फ़रवरी, 1979 में अटल बिहारी बाजपेयी चीन के प्रभावशाली नेता तेंंग श्याओ पिंग से मिलने गए.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

1962 के युद्ध के बाद 17 साल तक चलते आ रहे तनाव को वाजपेयी ने भारत-चीन के बीच ये पहली हाई-लेवल राजनैतिक मीटिंग से ख़त्म किया. यहां से ही भारत-चीन के नए सम्बन्धों की शुरुआत हुई थी, जो आज तक चल रही है. इस मुलाकात में वाजपेयी से तेंग ने कहा कि ‘हम एशिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश आपस में दोस्त क्यों नहीं हैं ?’ चीन का उद्देश्य भारत के बाजार में सामान बेचना था इसलिए तेंग ने कहा कि ‘हमारे द्विपक्षी व्यापारिक समझौते हमारी सीमाओं के विवाद के कैदी नहीं बनने चाहिए.’

व्यापारिक समझौते को अलग रखते हुए सीमा विवाद को बिना सेना का प्रयोग किये लाईन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के स्टेटस को बातचीत से सुलझाने की बात हुई. कहते हैं 1993 में सीमा पर हथियार ना प्रयोग करने वाले समझौते की नींव यही रखी गयी थी. 2004 में तेंग की जन्मदिन पर वाजपेयी ने इस मुलाकात की बातों को दोहराया भी था.

दिसंबर, 1982 में दिल्ली से इंडियन कौंसिल ऑफ़ सोशल साइंसेज रिसर्च के एक दल ने रिसर्च के दौरान जब तेंग से इस मुद्दे पे पुछा तो उन्होंने बताया की ‘जब 1979 में आपके विदेश मंत्री अटल बिहारी चीन आये थे, तब मैंने उन्हें एक ‘पैकेज समाधान’ दिया था कि चीन-भारत के बीच सिर्फ सीमा विवाद है. दोनों देशों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यदि दोनों देश थोड़ा-थोड़ा कन्शेसन देने को राजी हो जाएंं तो ये समस्या हम सुलझा सकते हैं, हम दोनों को अपनी जनता को समझाना पड़ेगा लेकिन 1950 की दोस्ती वापस कायम की जा सकती है.’

ध्यान दीजिये यहां चीन भी अपने दावे से पीछे जाने की बात कर रहा था और बॉल अटल जी के पाले में थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, अन्यथा ये समस्या तभी हमेशा के लिए सुलझ गयी होती.

2003 में अटल जी दोबारा चीन गए लेकिन इस बार चीन बिलकुल 1979 की अपेक्षा बदल चुका था. अटल जी और उनके दल ने पुडोंग डिस्ट्रिक्ट की हुआंग्पू नदी में नाव की सैर की तो किनारे के दूसरी ओर अब गगनचुम्बी इमारतें बन चुकी थी. अटल जी ने इसी विजिट के दौरान तिब्बत के स्वतन्त्र क्षेत्र को रिपब्लिक ऑफ़ चीन के ‘अभिन्न हिस्से’ का दर्जा दे दिया.

उस समय के विदेश निति जानकारों ने इसकी निंदा की, बल्कि उस समय के राजदूत वगैरह डिप्लोमेट्स की नजर में भी ये गलत था क्योंकि इसके बाद भारत ने चीन के सामने तिब्बत कार्ड खेलने का अवसर हमेशा के लिए खो दिया था. इससे पहले जब चीन हमारी जमीं पे दावा करता तो हम तिब्बत को चीन का हिस्सा ना मानने का कार्ड खेलते. तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा पहले ही भारत में शरणार्थी थे. हालांंकि वाजपेयी को ये बात जमीनी हकीकत के हिसाब से ठीक लगी और इसी दौरे में चीन ने भी सिक्किम को भारत का हिस्सा मान लिया. इसी के साथ दोनों देशों में द्विपक्षीय व्यापार के करार भी हुए और व्यापार बढ़ना शुरू हुआ.

तिब्बत देकर वाजपेयी ने भारत-चीन सीमा पर बिना हथियार प्रयोग किये LAC विवाद सुलझाने के लिए बातचीत के प्रधानमंत्रीस्तरीय प्रतिनिधि नियुक्त किये. वाजपेयी के खास राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा और बेन जियाबो के खास चाइनीज स्टेट कौंसिलर दाई बिंगगुओ को ये काम सौंपा गया.

वाजपेयी जी की मृत्यु पर वेन जिआबाओ ने कहा था, ‘वाजपेयी जी ओपन माइंडेड नेता थे. वो भूतकाल के कड़वे प्रसंगों की बजाय वर्तमान स्थिति को देखते हुए कुछ देकर कुछ लेकर सीमा विवाद को सुलझाने में विश्वास रखते थे, उन्होंने व्यापार और स्ट्रेटजी पे ध्यान दिया. मोदी उन्हीं की पार्टी के नेता हैं. उनके पास दूसरा वाजपेयी बनने का सुनहरा अवसर है.’ हालांंकि ऐसा हो ना सका क्योंकि वाजपेयी जी देश के लिए काम करते थे और मोदी जी अगले चुनाव जीतने के लिए.

भारत और चीन के बीच की सीमा संधि-समझौते :

सितम्बर, 1993 में भारत और चीन के बीच में Border Peace and Tranquillity Agreement (BPTA) साइन हुआ, जिसमें वाजपेयी के शुरू किये ड्राफ्ट पे मुहर लगी. इस एग्रीमेंट में लिखा था कि ‘दोनों देश एक कॉमन LAC को संज्ञान में लेते हैं. भारत और चाइना दोनों देश सीमा पर पेट्रोलिंग के दौरान हथियारों का प्रयोग नहीं करेंगे और जल्द ही LAC से जुड़े राजनैतिक नक़्शे एक दूसरे देश को मुहैया कराएंंगे ताकि सीमा निर्धारण हो सके.’ इसे ‘मदर एग्रीमेंट’ भी कहा जाता है क्योंकि बाकि सारे एग्रीमेंट इसके सपोर्टिव डॉक्युमेंट की तरह हैं.

हालांंकि चीन ने जानबूझ के ऐसा नहीं किया. 1996 में इसमें एक सप्लीमेंट एग्रीमेंट भी जोड़ा गया. 2005 में बॉर्डर पेट्रोल का एग्रीमेंट साइन हुआ क्योंकि दोनों के पेट्रोलिंग पॉइंट्स में बहुत कन्फ्यूजन हो रही थी. चौथा एग्रीमेंट ऑपरेशन और वार्ता के लिए सन 2012 में हुआ. आखिरी पांचवां एग्रीमेंट सन 2013 में Border Defence Cooperation Agreement हुआ.

आज जो संधियां भारत चीन के बीच है, वो उस समय की मांग थी और उस समय अटल बिहारी चीन के खिलाफ नकारात्मक विचार रखते थे, चीन से युद्ध की बात करते थे लेकिन खुद विदेश मंत्री बने तो बिना हथियार सुलझाने की बात की और प्रधानमंत्री बने तो तिब्बत चीन को दे आये. शायद उन्हें उस समय देश के लिए वही सही लगा होगा, आज भक्त लोग इसका श्रेय किसे देते हैं ?

  • लक्ष्मी प्रताप सिंह

Read Also –

विश्वसनीय चीन बनाम अविश्वसनीय अमेरिका
लद्दाख में चीन और मोदी सरकार की विदेश नीति
चीन-अमेरिकी मंसूबे और भारत का संघर्ष
चीन के साथ लगातार बिगड़ते संबंध
भारत चीन सीमा विवाद और 62 का ‘युद्ध’
अगर चीन ने आज भारत पर युद्ध की घोषणा की तो क्या होगा ?
चीनी हमले से अन्तर्राष्ट्रीय मसखरा मोदी की बंधी घिग्गी
चीन एक नयी सामाजिक-साम्राज्यवादी शक्ति है !
चीन से झड़प पर मोदी सरकार और भारतीय मीडिया का चेहरा

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

इतिहास के सबक : अभी भी वक्त है – दुनिया के मजदूरों एक हों

Next Post

हिन्दू और मुस्लिम दोनों का मूल स्वभाव है – लड़ना

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

हिन्दू और मुस्लिम दोनों का मूल स्वभाव है - लड़ना

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

प्रेस कॉम्फ्रेंस : राजद के दलित विधायक के साथ पुलिस की मौजूदगी में भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं का मारपीट और दुर्व्यवहार

June 2, 2024

विश्व बैंक ने की दुनिया में मंदी आने की घोषणा, क्या हम लोग इसका मतलब समझ पा रहे हैं ?

September 22, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.