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8 नवम्बर : नोटबंदी दिवस

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 8, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
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आज से तकरीबन तीन-चार साल पहले लिखा गया यह लेख आज नोटबंदी की बरसी पर प्रकाशित कर रहा हूंं ताकि अमीर और काला धन रखने वाले कितने परेशान थे, आप पुनः स्मरण कर लें – फरीदी अल हसन तनवीर

8 नवम्बर : नोटबंदी दिवस

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जवान सीमा पर शहीद होता है तो संघी पूरे उत्तर भारत में शौर्य यात्राएं निकाल उसका क्रेडिट तक चुरा लेते हैं. और आज कमाल की बात देखिये कि आज नोटबन्दी दिवस है और एक भी डल्ला दुनिया के सबसे बड़े हार्डवर्कर की पहली इतनी बड़ी योजना का कहीं भी नाम तक न ले रहा, सेलिब्रेशन तो दूर की बात है.

इसी वैचारिक पनौती की वजह से बेचारों को सरदार पटेल की छवि का अपहरण कर गोद लेना पड़ता है. अम्बेडकर के साथ गांधी को भी अपना बताना पड़ता है. नोटबन्दी दिवस के इस पावन पर्व पर एक बार फिर पुनः प्रस्तुत है. एटीएम में बहार है ?

आज तो कमाल हो गया. सुबह ही शहर के पॉश इलाके के एटीएम पर लाइन में इस सोच के साथ लगने पहुंंच गया कि पूरा इलाका अरबपति लोगों का है. उनमें से कोई भी ₹4000 निकालने लाइन में लगने नहीं आयेगा इसलिये अपना काम जल्दी हो जायेगा. लेकिन ये क्या वहां तो कई बड़े-बड़े मुझसे पहले ही लाइन में खड़े थे.

अभी एटीएम ने पैसा देना शुरू नहीं किया था, पर उसके गेट पर ही पनामा लीक्स वाले बड़े बच्चन अपना कार्ड लिए इंतज़ार में उसी स्टाइल से खड़े थे मानो कह रहे हों, ‘जहांं से हम खड़े होते हैं लाइन वहीं से शुरू होती है बरखुरदार.’ उनके पीछे विजय माल्या अपने बेटे सिद्दार्थ माल्या के साथ ऐसे खड़े थे जैसे RCB का झंडा लिए अभी-अभी विराट कोहली को नीलामी में खरीद कर हटे हों.

हैलीकॉप्टर घोटाले के नामजद एयरफोर्स ऑफिसर त्यागी जी और उनके भाई भी चार हज़ार के लिए अपने नंबर आने का इंतज़ार उसी मुद्रा में कर रहे थे जैसे कभी इटली और यूरोप के लाखों रुपये टिकट वाले ओपेरा देख रहे हो. ललित मोदी अपनी पत्नी को इलाज करवाने कहीं बाहर ले जाने के लिए पैसे निकालने विशेषकर सुषमा जी से मानवीय आधार पर परमिशन लेकर आये थे.

ललित के पीछे ही कुरैशी भी लाइन में खड़े बतिया रहे थे. तभी एक शानदार फरारी कार आकर वहां रुकी. दरवाज़ा खुला और ये क्या हथियार सौदों के विख्यात दलाल अभिषेक वर्मा जिनके द्वारा खिंचवाए वरुण गांधी के बेहतरीन पोज़ अभी हाल में ही रिलीज़ हुए थे, अपनी विदेशी पत्नी के साथ हाथ में एटीएम कार्ड पकडे कार से उतर रहे थे.

क्लीन चिट पाये येदुरप्पा, रेड्डी ब्रदर्स, कई माइन ठेकेदार, प्राइवेट कॉलेजेस और चिकित्सालयों के मालिक, कई बड़े बिल्डर्स, प्रॉपर्टी डीलर्स जौहरी, शेयर दलाल, इन्वेस्टमेंट कंपनियों के मालिक और नामी हीरा व्यवसायियों के साथ लाखों रुपये फीस लेने वाले कई नामी वकील और डॉक्टर भी लाइन में खड़े-खड़े आज की दिहाड़ी मारे जाने का रोना रोते हुए बतिया रहे थे.

प्रेस्टीट्यूट नाम से विख्यात कुछ पेड न्यूज़ वाले एंकर्स के साथ राज्य सभा सीट खरीद कर वोटों को काले बाज़ार से खरीद राज्य सभा पहुंचे भारत के ‘मीडिया मुग़ल’ कुछ अख़बार के संपादकों को खड़े खड़े इस नोटबंदी योजना के राष्ट्रवादी फायदे गिना रहे थे.

कुछ पीछे कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा, टीएमसी, जनतादल, डीएमके, एडीएमके, मीम और बाकी अन्य कई पार्टीयों के करोड़पति सांसद विधायक और पदाधिकारी खड़े हुए अपने पीछे खड़े धर्मगुरुओं श्री श्री, रामदेव, सिनेमा वाले बाबाजी और जुमा मस्जिद के इमाम से आशीर्वाद ले उनसे लाइन में आगे लग पहले पैसा निकाल लेने का नम्र निवेदन कर रहे थे.

सबसे पीछे सुपारी सूट पहने ईमानदार अफसरों का एक ग्रुप खड़ा था. क्षेत्र के RTO, इनकम टैक्स अधिकारी, बिजली विभाग और PWD के अधिकारी खड़े खड़े रुमाल से माथे पर बह आये पसीने को पोंछ रहे थे. इन्ही अधिकारियों के साथ इंजिनीअर यादव सिंह जी और उत्तर प्रदेश की श्रीमती यादव और श्री सिंह खड़े थे. दोनों अधिकारी उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड मुख्य सचिव रह चुके थे. अधिकारियों के पीछे पुलिस और बाबू लोग थे. बेचारे हज़ार दो हज़ार तो यों ही दिन में कई बार झटक लेते थे. आज 4000 के लिए लाइन में लग परेशान होना पड़ रहा था.

तभी मुंह ढंके कुछ लोग छिपते छिपाते आये और लाइन से पीछे हटकर सकुचाये से खड़े हो गए. यकायक हवा के एक झोंके ने उनके चेहरे ढंके कपड़ों को हिला दिया. हवा की इस शैतानी ने मुझे उनके चेहरे दिखा दिए. ये तो हमारे देश में आतंक फैलाने वाले हाफिज सईद, सलाहुद्दीन, मसूद अज़हर और दाऊद आदि के लोकल प्रतिनिधि थे और इस असमंजस में थे कि 4000 निकाल कर ही टेरर को चालू रखा जाये या बैंक वाली लाइन में लगकर पेनाल्टी अदा कर ब्लैक को वाइट कर अपना काम आगे से वाइट मनी से लीगल तरीके से चलाया जाए.

कसम से देश के इतने महान लोगों को अपने साथ एक ही लाइन में हैरान परेशान और बदहवास खड़े देख कर मैंने मोदी जी को मन ही मन शुक्रिया अदा किया. अब जाकर सच समझ आया. कितनी सच्चाई है इस बात में कि बड़े लोग और काले धन के स्रोत ही इस नोटबंदी से परेशान, हैरान और बदहवास हो गए हैं.

राम खिलावन, मुसद्दी लाल और रहीमन बी के लिए तो अब बस बागों में बहार है. ये सब देख मेरा सीना फूल कर 56 इंच का हो गया. क्या आपका सीना भी कहीं 56 इंची हुआ ?

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