Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

आरएसएस-भाजपा एक दिन विवेकानंद की विचारधारा को खत्म करके ही दम लेगा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 17, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

आरएसएस-भाजपा एक दिन विवेकानंद की विचारधारा को खत्म करके ही दम लेगा

जेनएयू में विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री द्वारा किया जा रहा है. आप इसे दोबारा पढ़िए. अबकी बार नाउन नहीं कलेक्टिव नाउन में पढ़िए कि एक विश्वविद्यालय में एक मूर्ति का अनावरण एक देश के प्रधानमंत्री द्वारा किया जा रहा है। क्या ये तथ्य आपको आश्चर्यचकित नहीं करता ?

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

इस पर जो राजनीति हो रही है उसके इतर आम जनता में इस भव्य आयोजन के प्रति उपजे मनोविज्ञान को पढ़िए कि किस तरह एक प्रधानमंत्री आपके मन के साथ प्रतीकों के माध्यम से खेल रहा है. वह जानता है कि आप विवेकानंद को पसन्द करते हैं. वह यह भी जानता है कि किस प्रकार की डोज कितनी मात्रा में कब देनी है. एक आध्यात्म प्रधान देश में प्रतीकों को बड़ा महत्व है.

पहले आपके मन में ये स्थापित किया गया कि जेनएयू विश्वविद्यालय देशद्रोहियों का अड्डा है, उसके इतर विवेकानंद को हिंदुत्व के सॉफ्ट पोस्टर बॉय की तरह स्थापित किया गया. एक विश्वविद्यालय को विपक्ष बना दिया गया और विवेकानंद को पक्ष बना दिया गया. अब मूर्ति स्थापना को द्वारा विपक्ष पर पक्ष की जीत के रूप में आपके मन में परोसा जा रहा है, जबकि विवेकानंद को पढ़ने और समझने वाले जानते हैं विवेकानंद का सनातन धर्म आरएसएस के राजनीतिक हिंदुत्व से एकदम उलट है.

जेनएयू विश्वविद्यालय से विवेकानंद की आइडियोलॉजी का कोई टकराव नहीं है लेकिन अपने प्रचारतंत्र के बृहद साम्राज्यवाद के बल पर आरएसएस और भाजपा इस बात को आपके मन में बिठाने में सफल हुए हैं कि वही एकमात्र पार्टी और संगठन हैं, जो विवेकानंद को लेकर संवेदनशील हैं. जबकि वही एकमात्र पार्टी और संगठन है जो विवेकानंद के हिंदुत्व पर अपने नकली हिंदुत्व को लेकर परजीवियों की तरह चिपटा हुआ है, जो एक दिन विवेकानंद की विचारधारा को खत्म करके ही दम लेगा.

लेकिन सोचने वाली बात है कि आम जन प्रधानमंत्री के मूर्ति अनावरण से प्रसन्न है लेकिन इस बात से दु:खी नहीं है कि जिस विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री इस प्रतिमा का अनावरण कर रहे हैं, ऐसे कितने विश्वविद्यालय पिछले 6 सालों में खोले गए हैं ? जबाव सबको पता है कि एक भी नहीं. भारतीय राजनीति में प्रचार तंत्र का रोल कितना बड़ा हो चुका है, आप इस बात को इस तरह देखिए कि लोग जेएनयू विश्वविद्यालय जिसमें कि गरीब से गरीब आदमी उच्च शिक्षा की तालीम ले सकता है, उस विश्वविद्यालय को खड़े करने वाले नेहरू, इंदिरा को गाली देते हैं और उसी विश्वविद्यालय में मूर्ति लगाने वाले प्रचारमंत्री की हर अदा पर गद-गद हो रहे हैं.

नेहरू थे जो सिखाते थे कि मंदिर-मस्जिद से जरूरी कारखाने और विश्वविद्यालय हैं, एक ये विचारधारा है जो आपको बताती है कि विश्वविद्यालयों और पुस्तकालयों से अधिक महत्वपूर्ण मूर्तियां हैं. अब तय आपको करना है.

  • श्याम मीरा सिंह

Read Also –

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

बीपीसीएल की बिक्री : मोदी सरकार ने एक और मुर्गी जिबह कर दिया

Next Post

सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

राम के नाम

July 31, 2022

एक फोन कॉल की दूरी पर नींबू की मंहगाई

April 11, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.