Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

जब आप चुप रहोगे तो दूसरे तो बोलेंगे न !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 4, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

जब आप चुप रहोगे तो दूसरे तो बोलेंगे न !

सचिन सहित सारी देशी सेलिब्रिटी बोल रही है ‘किसानों के मुद्दे पर विदेशी सेलेब्रिटीज़ को नहीं बोलना चाहिए क्योंकि यह देश का आंतरिक मामला है’, वो एक बार के लिए सही हो सकते थे, जब वो किसानों के मुद्दों पर पक्ष या विपक्ष में अपने विचार तो रखते. लेकिन यह क्या कि आपकी जिह्वा तब खुली जब सरकार ने आपकी कलाई मोड़कर आप से देशभक्ति साबित करने को बोला.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

माफ कीजिए लेकिन आज आप सब मेरी नजर में बहुत गिर गए है. अब आप मेरे लिए देश के नहीं केवल सरकार के माउथपीस बनकर रह गए. आप देश का नहीं आप इस सरकार का बचाव कर रहे हैं. औऱ आपने साबित कर दिया है कि आपकी खुद की कोई सोच नहीं है. आप सरकार के द्वारा दी जा रही सुविधाओं या शक्तियों को बचाने के लिए उसके हर निर्णय का बचाव कर रहे हैं जबकि 2 महीने से सड़कों पर संघर्ष कर रहे किसानों के लिए आपके मुंंह से एक शब्द नहीं निकला.

दुनिया लगातार खेमों में बांंटी जा रही है और खेमे छावनियों में तब्दील हो रहे हैं. विरोध को विश्वासघात का और आंदोलन को देशद्रोह का चोला पहनाया जा रहा है. तर्क, वार्ता, संवाद, अलोचना यहांं तक की व्यंग्य की भी गुंजाइश नहीं छोड़ी जा रही है. जो भी सत्ता ऐसा करती है वह लोगों को विकल्पहीन हर रही है. और यह मूलभूत मानव अधिकारों का हनन है. ऐसे माहौल में लोग सड़क पर उतर आने और लाठियांं खाने के लिए मज़बूर हैं.

इस समय दुनिया के कई देशों में लोग अपनी सरकारों से नाखुश हैं. क्या यह मात्र संयोग है ? हमारी सरकारी व्यवस्थाएंं लगातार असहिष्णु , केंद्रित और पितृसत्तात्मक होती जा रही हैं ? राइट और लेफ्ट की विचारधाराएंं लम्बे समय से हैं और आज से पहले उनमें माध्यस्तता की तमाम संभावनाएंं थी. लेकिन अब कट्टरता और आत्ममुग्धता का नया स्तर देखा जा रहा है, जो सिर्फ़ लड़ने के लिए उकसावा मात्र रह गया है.

सबसे ज़्यादा दुःखद ये है कि मीडिया, कलाएंं, विश्वविद्यालय और न्यायालय जो नैतिकता और सत्य के पक्षधर रहे हैं, जिनकी जिम्मेदारी है कि वह एक जागरूक जन समाज बनाए, वह भी विभिन्न दबावों और प्रलोभनों के चलते लोगों के प्रति अपनी ज़वाबदेही भूल चुके हैं औऱ सरकारों के दबावों में अपने ईमान भी बेच चुके हैं. आज उन सभी सेलिब्रिटी से एक ही बात कहना चाहता हूंं कि सरकार से कब तक डरोगे ? बिगाड़ के डर से क्या ईमान की बात नहीं करोगे ?

  • अपूर्व भारद्वाज

Read Also –

 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

म्यामांर का घटनाक्रम और फ़ेसबुक

Next Post

देशभक्ति की आड़ में धूर्त्तता भरा राजनीतिक लाभ

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

देशभक्ति की आड़ में धूर्त्तता भरा राजनीतिक लाभ

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

31 जुलाई : अमर कथाकार प्रेमचन्द के जन्म दिन पर गोष्ठी

August 1, 2021

महाशिवरात्रि

March 12, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.