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अरविन्द केजरीवाल और मोदी : दो सत्ता, दो निशाने

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 20, 2017
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arvind kejriwal aur modi

देश में एक साथ दो सत्ता, राजसत्ता पर आसीन हुई. केन्द्र की सत्ता पर भाजपा की ओर से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री के पद पर और उसी केन्द्र की भाजपा सरकार के ठीक नाक के नीचे एक दूसरी सत्ता अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी एक आधी-अधूरी सत्ता के साथ अस्तित्व में आई.

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दोनों सत्ता लगभग एक साथ अस्तित्व में आई पर दोनों के दो विपरीत निशाने हैं. केन्द्र की ताकतवर सत्ता नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने देश भर में एक अजीब तरह की राजनीति का सूत्रपात करते हुए देश में जनता की सारी दुर्दशा का आरोप पिछले 70 साल को एक मात्र जिम्मेदार मानते हुए देश भर में कोहराम मचा दिया है. वे जब 70 साल की गिनती करते हैं तो देश के अब तक के सारे प्रधानमंत्री – अटल बिहारी वाजपेयी सहित – को अक्षम, मूर्ख और भ्रष्ट करार देते हुए खुद के तीन साल को भी उसी में गिन लेते हैं, फिर वे शानदार तरीके से दावा करते हैं कि मोदी के तीन साल में देश फर्श से अर्श तक पहुंच गया है. मंगलयान से लेकर नये पुलों के उद्घाटन का भी श्रेय खुद लेते हैं, जिसका शुभारंभ कांग्रेस के शासनकाल वाले प्रधानमंत्रियों ने किया था.

केन्द्र की मोदी सरकार के साढ़े तीन साल के कामों को अगर सरसरी तौर पर देखा जाये तो वे देश भर में एक झूठी आशावाद को पैदा किया है, जिसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है. सत्ता में आने के साथ ही विदेश भ्रमण का जो दौर शुरू हुआ था, वह आज तक कायम है, जिसका कोई फल देश की जनता को नहीं मिला है. देश भर में शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार जैसी बुनियादी समस्याओं को हल करने की जगह काल्पनिक मुद्दों को आधार बना दिया है, जिसमें गाय, गोबर, गोमूत्र, श्रीराम, राम मंदिर, श्मसान, कब्रिस्तान, गोरक्षा आदि जैसे मुद्दों के आधार पर देश भर की आम जनता को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार से न केवल वंचित कर दिया है, वरन् सारे देश को नोटबंदी और जीएसटी के माध्यम से भूखा-नंगा बना दिया है.

वहीं, अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में बनी एक दूसरी सत्ता ने अपना शुभारम्भ जनता की सेवा से किया है. जबकि केन्द्र की सत्ता पर विराजमान नरेन्द्र मोदी की सरकार हनीमून मनाने से शुरू होती है, जो आज तक हनीमून पोज में ही है.

अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में बनी सत्ता अपने पहले ही दिन से जनता के हितों में निर्णय लेना शुरू करती है. वह अपने वायदे के अनुरूप दिल्ली की अपनी जनता को पानी मुफ्त और बिजली आधी दर पर देने का निर्णय सुनाती है और धरातल पर लागू होना सुनिश्चित करती है. किसानों के फसल मुआवजा 50 हजार प्रति हेक्टेयर की दर से भुगतान करती है तथा जमीन अधिग्रहण जैसे मुद्दों को अपने हाथों में लेते हुए 30 लाख से बढ़ाकर तीन करोड़ रूपये करने का निर्णय लेती है.

दिल्ली की जनता की बुनयादी समस्याओं शिक्षा, चिकित्सा को अपने अद्भूत कौशल से हल करते हुए सरकारी विद्यालयों को उच्चस्तरीय बनाया और छात्रों को मुफ्त शिक्षा देने की संवैधानिक अधिकारों को अमली जामा पहनाया.

वहीं चिकित्सा के क्षेत्र में शानदार पहल लेते हुए मोहल्ला-क्लिनीक और पाॅली-क्लिनीक जैसीे कारगर व्यवस्था का निर्माण करते हुए मुफ्त चिकित्सा, मुफ्त दवाई एवं मुफ्त जांच – चाहे वह किसी भी मूल्य का क्यों न हो – को सुनिश्चित किया. वहीं आवासविहीन परिवारों के लिए घरों का निर्माण कराया और उनमें वितरित किया.

अभी हाल में 40 प्रकार की सरकारी सेवाओं को आम जनता तक पहुंचाने के लिए दिल्ली सरकार स्वयं पहल लेकर घर-घर जाकर देने का पहल किया है, जिसमें राशन कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र आदि जैसी छोटी-छोटी पर जनता की महत्वपूर्ण समस्याओं को घर पर जाकर निपटाने के लिए कारगर कदम उठाये.

आज दिल्ली की आम आदमी पार्टी के पास जनता की सेवा में किए गए कामों की एक लम्बी फेहरिश्त है, जबकि इसके विपरीत केन्द्र की भाजपा सरकार के पास देश की जनता के सामने दिखाने के लिए एक भी काम नहीं है. वह केवल एक से बढ़कर एक शिगूफे छोड़ने और काल्पनिक मुद्दों के आधार पर देश की जनता को बांटने के कामों में मशगूल है.

केन्द्र की मोदी सरकार, दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार को भी जनता की सेवा से महरूम करने के लिए रोज ही नये टंटा को जन्म दे रही है, दर्जनों की तादाद में उसके फैसलों को पर कुंडली मार कर बैठे हुए है, अपने नये दलाल एलजी अनिल बैजल के माध्यम से दिल्ली में केवल बाॅस बनकर दिल्ली विधानसभा को कमतर दिखाने और जनता के नजर में बदनाम करने का दुश्चक्र चलाने में  दिन-रात एक कर रहा है, और दिल्ली की सरकार को दिल्ली की जनता की सेवा करने से रोक रही है.

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार जहां रोजगार के नये-नये आयाम खोल रही है, वहीं केन्द्र की मोदी सरकार लाखों की तादाद में नौकरियां खत्म कर रही है. देश की जनता पर आये दिन मंहगाई लाद रही है, सरकारी संस्थानों रेलवे, एयरलाईन्स को निजी हाथों में बेच रही है. लोगों को भूखमरी के कागार पर धकेल रही है. घोटालों और भ्रष्टाचारों की बाढ़ ले आई है.

एक ओर लोगों को बेहतर जिन्दगी देने के लिए लड़ती दिल्ली की सरकार है तो वहीं लोगों को भूखे-नंगे बना डालने पर आतुर भाजपा की केन्द्र सरकार है.

यह दोनों सत्ता प्रतिष्ठान देश के सामने दो आयाम पेश कर रही है. यह देश की जनता को जानना और समझना होगा कि आखिर वह किस रास्ते को चुनना पसंद करती है, भूखमरी की अथवा देश की जनता की बुनियादी समस्याओं को दूर करने की.

मोदी सरकार जहां देश भर में भूखमरी, बेरोजगारी, अशिक्षा, मौतों का जाल फैला रही है, तो वहीं दिल्ली की सरकार अपनी सीमित अधिकारों के ही बल भूखमरी की समस्याओं को दूर करते हुए आम आदमी की शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लड़ रही है.

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