Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

हिंदी साहित्य संसार की हीन स्थिति बहुत दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 5, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

हिंदी साहित्य संसार की हीन स्थिति बहुत दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण है

द्विवेदी, निराला, रेणु

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

रामचन्द्र शुक्ल

हिंदी के अधिकांश सेवियों के जीवन के आखिरी दिन बेहद त्रासद स्थितियों में बीते. प्रेमचंद, महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, गजानन माधव मुक्ति बोध तथा फणीश्वर नाथ रेणु के जीवन के आखिरी दिनों को उदाहरण के रूप में देखा व समझा जा सकता है.

प्रेमचंद जहांं बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हिंदी के कथा संसार की नुमाइंदगी करते हैं तो इस सदी के उत्तरार्ध की नुमाइंदगी फणीश्वर नाथ रेणु जी करते हैं. ये दोनों ही अपने जीवन के 60 साल भी पूरे नहीं कर सके, जो कि एक सरकारी सेवक के सेवानिवृत्ति की उम्र होती है.

1880 में जन्मे प्रेमचंद जी का निधन 1936 में हो गया तथा 1921 में जन्मे फणीश्वर नाथ रेणु का निधन 11 अप्रैल 1977 को हो गया था. दोनों ही अपने जीवनकाल के 60 साल पूरे नही कर सके. आज भी मात्र लेखन पर गुजारा चलाने वाले रचनाकार की स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है.

हिंदी भाषा व हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सरस्वती पत्रिका के माध्यम से उत्कर्ष प्रदान करने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी को अपनी जिंदगी के आखिरी के 14-15 साल गुमनामी में अपने गांंव दौलतपुर में बिताने पड़े.

पत्रकारों तथा अधिवक्ताओं की तरह रचनाकारों के रचनाकर्म से निवृत्त हो जाने के बाद के जीवन के लिए सरकारी आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए. बेहतर हो कि संबंधित रचनाकार की रचनाओं के प्रकाशक इस काम की पहल करें, क्योंकि रचनाकार की किताबों की बिक्री का फायदा तो उन्हें ही मिलता रहा होता है.

दूसरी बात यह कि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के प्रकरण की छानबीन करने पर मुझे पता चला कि उन्होंने अपनी अधिकांश रचनाओं के प्रकाशन अधिकार खड्ग विलास प्रेस, पटना को दे दिये थे, लेकिन प्रकाशक का रवैया बाद में ठीक नहीं रहा तथा आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी को अपनी जिंदगी के आखिरी 14-15 बेहद आर्थिक तंगहाली में अपने गांंव दौलतपुर में गुजारने पड़े.

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी द्वारा हिंदी की सेवा के लिए अपनी रेलवे की सरकारी नौकरी छोड़ दी गयी थी और इंडियन प्रेस इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाली हिंदी की पत्रिका ‘सरस्वती’ के संपादक के दायित्वों का निर्वहन लगभग 20 सालों तक वे करते रहे.

बाद में जब आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की रचनाएंं उनकी मृत्यु के 60 साल बाद कापीराइट के दायरे से बाहर हो गयीं तो उनकी रचनावली का प्रकाशन सात खंडों में किताब घर द्वारा किया गया.

14 फरवरी 2021 को आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के रायबरेली जनपद स्थित गांव दौलतपुर के दर्शन करके आया हूंं. हिंदी के लिए दधीच की भूमिका निभाने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का अधबना पड़ा घर पूरे हिंदी साहित्य संसार की हीन स्थिति का परिचय दे रहा है. यह स्थिति बहुत दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण है.

महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के जीवन के आखिरी 14-15 साल बेहद त्रासद स्थितियों में बीते. उनका 1943-44 में लखनऊ छोड़कर इलाहाबाद के दारागंज में बस जाने को सही निर्णय नहीं माना जा सकता है. इलाहाबाद में महाकवि निराला को उनके जीवन के आखिरी सालों में उनकी त्रासद स्थितियों में देखने वाले जब उनकी अर्धविक्षिप्त छवि का चित्रण करते हैं तो इसे पढ़ कर व सुन कर बहुत मानसिक क्लेश व दुःख होता है.

हिंदी भाषा व साहित्य से जुड़े लोगों को इस विषय पर जरूर विचार करना चाहिए कि हिंदी के रचनाकारों को जीवन के तीसरे व चौथे चरण में किस प्रकार से सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है. यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है.

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

मंडी

Next Post

किसी देश को धार्मिक-राष्ट्र घोषित करना यानी मूर्खों के हाथ राजपाट आना है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

किसी देश को धार्मिक-राष्ट्र घोषित करना यानी मूर्खों के हाथ राजपाट आना है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अडानी के पास इतना धन आया कहां से कि वह आज दुनिया का दो नंबरी अमीर बन गया ?

September 18, 2022

युवा पीढ़ी को मानसिक गुलाम बनाने की संघी मोदी की साजिश बनाम अरविन्द केजरीवाल की उच्चस्तरीय शिक्षा नीति

September 30, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

March 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

March 7, 2026

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.