Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी को कहीं पिछली बार से भी अधिक सीट न मिल जाये

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 20, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ममता बनर्जी को कहीं पिछली बार से भी अधिक सीट न मिल जाये

294 उम्मीदवारों में अगर 150 उम्मीदवार भाड़े पर लाये गए हैं, तो देश को भी हैरत हो रही है कि बंगाल में भाजपा आरएसएस ने आखिर काम क्या किया ? जैसे-जैसे समय गुजर रहा है, नकली रंग रोगन उतर रहा है. मुझे तो अब डर है कि ममता बनर्जी को कहीं पिछली बार से भी अधिक सीट न मिल जाये.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

भाजपा की खस्ताहाल स्थिति को देखते हुए ममता विरोधी वोट जो लेफ्ट से छिटककर 2019 लोकसभा चुनावों में भाजपा की झोली में गिर गए थे, वे वापस आ सकते हैं. क्योंकि जिन्होंने उन्हें तृणमूल राज में सताया था, वे तो भगवा रंग में वोट मांग रहे हैं. 10 साल की सत्ता विरोधी लहर का फायदा लेफ्ट को मिलना था, लेकिन उसे बड़ी तेजी से भाजपा ने हथिया लिया क्योंकि उसके पास फायर के खिलाफ फायर करने की डबल क्षमता थी.

इससे एक बात बेहद स्पष्ट समझ आती है. यह त्रिपुरा में भी देखने को मिला था. वाम दलों के नेता 60-70-80 पार हैं, जिनके पास लड़ाकू तेवर सत्ता समायोजन में बहुत पहले ही खत्म हो चुका था इसलिए हर मुद्दे पर लड़ाई लड़ते हुए भी उसे औपचारिक खानापूर्ति से अधिक कहीं किसी को नजर आता था. जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय वसूली भाइयों से खुद को बचाने के लिए ही भाजपा की शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

आज जब अधिकतर भ्रष्टाचार में लिप्त तृणमूल महारथी भाजपा में जा चुके हैं, तो ममता के पास चुनाव जीतने पर पार्टी को बदलने का अवसर है. यह बहुत बड़ी जीत होगी. अभी से ममता के प्रति केंद्र सरकार के विकल्प तक की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है.

तमाम प्रचार, एईडी, सीबीआई के बावजूद जमकर मुकाबले में खड़े होने वाले लोगों के सामने भाजपा के मोम की तरह पिघलकर गिर जाना बंगाल में देखा जा सकता है. असम, केरल तमिलनाडु में सब कुछ चुपके से सफाई अभियान चल रहा है.

2 मई के बाद देश का किसान जो फैसला सुनाएगा उसे 130 करोड़ को मानना चाहिए और वह फैसला हम सबकी किस्मत को एक बार फिर से बदलने के लिए होगा.

  • रविन्द्र पटवाल

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

तटस्थ बुद्धिजीवी

Next Post

बैंकों के निजीकरण के खिलाफ बैंकर्स के हड़ताल पर बनते चुटकुलों पर जवाब

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

बैंकों के निजीकरण के खिलाफ बैंकर्स के हड़ताल पर बनते चुटकुलों पर जवाब

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

तानाशाह का नया फ़रमान

January 23, 2021

बसन्त कभी अकेला नहीं आता

December 25, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.