Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अगर आप बच्चों के जिंदा रहने लायक धरती रखना चाहते हैं तो…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 11, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

आपके बच्चों की ज़िन्दगी बचाने की लड़ाई आदिवासी लड़ रहे हैं और आप आदिवासियों को अपने विकास का दुश्मन, अमीरी में रुकावट और अय्याशी भरी ज़िन्दगी का रोड़ा समझ रहे हैं. और जो आपके बच्चों की मौत की तैयारी कर रहा है, उसे आप अपना सबसे बड़ा खैरख्वाह समझे हुए हैं.

अगर आप बच्चों के जिंदा रहने लायक धरती रखना चाहते हैं तो...

हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार, प्रसिद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता

50 डिग्री गरमी के बाद एयरकंडीशनर काम करना बंद कर देते हैं. 52 डिग्री तापमान होने के बाद चिड़ियां मर जाती हैं. 55 डिग्री तापमान होने पर इंसान का खून उबल जाता है और इंसान मर जाता है. सारी दुनिया में गर्मी बढ़ती जा रही है. जंगलों को काटना इसकी सबसे बड़ी वजह है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

आप सरकार चुनते हैं ताकि सरकार जंगलों को काटने वाले लोगों पर रोक लगाए लेकिन अगर सरकार ही जंगल कटवाए तो तापमान को 55 डिग्री होने से कौन रोक सकता है. हो सकता है तापमान आपकी ज़िन्दगी में इतना ना बढ़े कि आपका खून उबल जाय और आप मर जाएं लेकिन ऐसा आपके बच्चों के साथ ज़रूर होगा लिख लीजिए.

मोदी मुसलमानों को डरा कर रखता है, तो आपको अच्छा लगता है लेकिन मोदी आपके बच्चों को खून उबलवा कर मरवा देगा, तब मुसलमानों के डरे होने से भी आपके बच्चे को कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि बच्चा तो मर जाएगा. अगर आप बच्चों के जिंदा रहने लायक धरती रखना चाहते हैं तो मुझे आपसे कुछ कहना है.

मोदी के सबसे पक्के दोस्त हैं पूंजीपति. यह पूंजीपति मोदी को चुनाव में पैसा, अपना जहाज़ देते हैं. बदले में मोदी ने पूंजीपतियों को आदिवासी इलाके में जमीनें देता है. आदिवासी इलाकों को भारत के शरीर का फेफड़ा कह सकते हैं. ये इलाके इतनी ऑक्सीज़न पैदा करते हैं कि आप उसकी कीमत का अंदाजा भी नहीं लगा सकते. ऑक्सीज़न की कीमत का अंदाजा तो पूंजीपति को भी होना चाहिए.

अगर कोई अडानी की नाक और मुंह सिर्फ एक मिनट के लिए दबा कर रखे तो अपनी नाक मुंह छोड़ कर बस एक बार सांस लेने के लिए अडानी कितने पैसे दे सकता है ? आप ठीक सोच रहे हैं अडानी एक सांस के लिए अपनी अरबों रूपये की दौलत दे सकता है.

अगर एक सांस की कीमत इतनी ज़्यादा है तो आपके आने वाले करोड़ों बच्चों की सांस की कीमत कितनी होगी ? रहने दीजिये, हिसाब मत लगाइए क्योंकि इसका हिसाब लगाने की पढ़ाई आपको नहीं सिखाई गई है.

तो पूंजीपतियों को मोदी ने आदिवासी इलाकों में जो खदानें जंगल और जमीनें सौंपी हैं उस पर करोड़ों पेड़ लगे हुए हैं. पूंजीपति उन खनिजों को खोद कर विदेशों को भेजेंगे. आदिवासी जानते हैं कि यह जंगल दुबारा नहीं लगाया जा सकता. तो पैसा कमाएगा पूंजीपति और मरेगा आपका बच्चा.

जहां खनिज खोदा जाता है, वहां का पूरा इलाका बर्बाद हो जाता है. खनिज लाने, ले जाने और खुदाई के विस्फोट से जो धूल उड़ती है, उससे लोगों को अस्थमा, टीबी और सिलिकोसिस हो जाती है. खदान से उठने वाली लोहे की धूल फसलों पर जम जाती है. खेती करना नामुमकिन हो जाता है. खनिजों को ट्रकों में लादने से पहले धोया जाता है. उससे नदी बर्बाद हो जाती है.

ऐसा नहीं है कि आपके बच्चों की किसी को परवाह नहीं है. बहुत सारे लोग हैं जो आपके बच्चों की ज़िन्दगी के लिए लड़ रहे हैं लेकिन मोदी ने उन्हें जेल में डाल दिया है.

मोदी कहता है ये लोग मुझे मारना चाहते हैं. सच ही कहता है मोदी. अगर जंगल काटना बंद हो जाएगा तो मोदी को चुनाव लड़ने के लिए पैसे कौन देगा ? और अगर चुनाव के लिए पैसा ना मिले तो नेता तो मर ही जाएगा. सुधा भारद्वाज, सोनी सोरी और अन्य अनेकों सामाजिक कार्यकर्ता जिन्होंने जंगलों की कटाई और आदिवासियों की ज़मीन ना छीनने के खिलाफ आवाज़ उठाई, उन्हें जेलों में डाला गया. बहुतों को गोली से उड़ा दिया गया.

वैसे तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सुरक्षित जंगल को किसी भी दूसरे इस्तेमाल के लिए नहीं दिया जा सकता लेकिन सरकार और पूंजीपति सुप्रीम कोर्ट की बात भी नहीं मानते. आदिवासी सुप्रीम कोर्ट की बात मानने की जिद करता है, इसके लिए आदिवासी आन्दोलन करता है.

आदिवासी तो देश जंगल बचाने की बात कह रहे हैं और अगर कोई सही बात कह रहा है तो कोई यह बिलकुल नहीं कह सकता कि क्योंकि यह लोग नक्सलियों के समर्थक हैं इसलिए हम संविधान और सर्वोच्च न्यायालय की बात नहीं मानेंगे ? मोदी से संविधान और सर्वोच्च न्यायालय की बात मानने के लिए हर नागरिक कह सकता है.

तो आपके बच्चों की ज़िन्दगी बचाने की लड़ाई आदिवासी लड़ रहे हैं और आप आदिवासियों को अपने विकास का दुश्मन, अमीरी में रुकावट और अय्याशी भरी ज़िन्दगी का रोड़ा समझ रहे हैं. और जो आपके बच्चों की मौत की तैयारी कर रहा है, उसे आप अपना सबसे बड़ा खैरख्वाह समझे हुए हैं. जागो भारतवासियों जागो, अपने बच्चों को बचाओ.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

क्या आप सोवियत संघ और स्टालिन की निंदा करते हुए फासीवाद के खिलाफ लड़ सकते हैं ?

Next Post

वीडियोकॉन बिकने की कहानी और बिकता देश

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

वीडियोकॉन बिकने की कहानी और बिकता देश

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आखिर बना क्या है फिर ?

February 15, 2025

चारु मजुमदार के शहादत दिवस पर उनके दो सैद्धांतिक लेख

August 1, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.