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वेंटिलेटर : मेक इन इंडिया के नाम पर हुई क्रूरता और मौत की कहानी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 14, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
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वेंटिलेटर : मेक इन इंडिया के नाम पर हुई क्रूरता और मौत की कहानी

ये कहानी बहुत ही क्रूर है. सकारात्मकता की साधना कर रहे लोग इसे न पढ़ें. ये मेक इन इंडिया के नाम पर हुई क्रूरता की कहानी है. ये जान बचाने के नाम पर जान ले लेने की कहानी है. ये महामारी में जान गवां रही जनता को लूटने की कहानी है. कोई मेरे लिए एक फर्जी वेबसाइट बना दे तो इसे वहां छाप दूं. सारे मंत्री और आईटी सेल वाले टूटकर शेयर करेंगे. दुनिया में हमारा डंका बजने लगेगा.

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कहानी ये है कि महामारी आई तो देश की जनता से एक संदिग्ध अकाउंट में दान देने को कहा गया. जनता ने जमकर दान दिया. फंड में कितने करोड़ इकट्ठा हुए, यह नहीं बताया गया. इस फंड से 2000 करोड़ में वेंटिलेटर खरीदे गए और देश भर के अस्पतालों में भेजे गए ​ताकि बीमार लोगों की जान ली जा सके. इन वेंटिलेटर के बारे में जानेंगे तो आप गर्व से फूलकर कुप्पा हो जाएंगे.

इस पैसे से कुछ बोगस कंपनियों को भी वेंटिलेटर बनाने का ठेका दिया गया, जिन्हें वेंटिलेटर बनाने का कोई अनुभव नहीं था. आप ईश्वर से प्रार्थना कीजिए कि आपको अस्पताल जाना पड़े तो इन वेंटिलेटर्स से पाला न पड़े.

भोपाल के हमीदिया अस्पताल को 40 वेंटिलेटर दिए गए थे, इनमें से 9 खराब हो गए. अचानक बंद होने से एक मरीज की जान भी चली गई. ईटीवी ने लिखा है कि कोरोना संक्रमितों की जान बचाने के लिए भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल में पीएम केयर फंड से 48 वेंटिलेटर भेजे गए. जेपी हॉस्पिटल में 10 वेंटिलेटर भेज गए, लेकिन ये बेहद घटिया क्वालिटी के हैं.

मध्य प्रदेश के सागर जिले के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पीएम केयर्स फंड से मिले वेंटिलेटर में शॉर्ट सर्किट हो गया. कागजों के हिसाब से यहां 72 वेंटिलेटर हैं, लेकिन उसमें से सिर्फ 5 ही काम कर रहे हैं. वन इंडिया ने लिखा है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई वेंटिलेटर कबाड़ की तरह पड़े हैं. अशोकनगर, कटनी, शहडोल, अलीराजपुर जैसे इलाकों में भी ऐसी ही हालत हैं. डॉक्टरों का कहना है कि ये इतने घटिया हैं कि सही से काम नहीं करते.

छत्तीसगढ़ के बालोद जिला अस्पताल को 6 वेंटलेटर मिले थे, उनमें दो लगाए गए हैं. छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि उसे पीएम केयर फंड से 230 वेंटिलेटर मिले हैं, लेकिन 58 काम नहीं कर रहे हैं.
डॉक्टरों ने प्रशासन को बताया कि ये वेंटिलेटर गड़बड़ हैं, न ऑक्सीजन फ्लो आता है, न प्रेशर बनता है, चलते-चलते मशीन बंद हो जाती है. ऐसे में मरीज की जान बचाना मुश्किल है.

पीएम केयर्स फंड से 80 वेंटिलेटर फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज में भेजे गए थे. इनमें से 71 खराब हैं. ये अपने आप चलते-चलते बंद हो जाते हैं. डॉक्टरों ने कहा है कि इन वेंटिलेटर की गुणवत्ता बेहद खराब है, इनका इस्तेमाल करके मरीजों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती.

नासिक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को पीएम केयर्स फंड से 60 वेंटिलेटर मिले थे. ये वेंटिलेटर किसी काम के नहीं है. प्रशासन का कहना है कि वेंटिलेटर के आधे अधूरे भेजे गए. जिस कंपनी ने वेंटिलेटर दिए, उसी को कुछ और पार्ट जोड़कर इन्हें चलाना था, लेकिन बाकी पार्ट भेजे ही नहीं. मेल करने के बावजूद कंपनी ने अपना काम पूरा नहीं किया.

झारखंड के हजारीबाग में भेजे गए 38 में से 35 वेंटिलेटर खराब पड़े हैं. भरतपुर के जिला आरबीएम अस्प्ताल में 40 वेंटिलेटर भेजे गए थे, जिनमें से 19 ही काम कर रहे हैं.

राजस्थान के जालोर जिला अस्पताल में बंद पड़े 13 नए वेंटिलेटर पर बीजेपी विधायक जोगेश्वर गर्ग नाराज हो गए. दस मई को उन्होंने ​ट्वीट किया, ‘मेरी सारी ताकत और समझ काम में ले कर थक गया. नतीजा शून्य. कलेक्टर कार्यालय के आगे खड़े होकर आत्मदाह करना बाकी रह गया है. आप कहो तो वो भी कर दूं यदि कोई गारंटी ले कि उसके बाद ये वेन्टीलेटर चालू हो जाएंगे. और बोले कि मैं आत्मदाह कर लूंगा.’ उम्मीद है कि विधायक जी को आत्मदाह नहीं करना पड़ा होगा.

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में 25 वेंटिलेटर भेजे गए थे लेकिन 9 मई तक वे चादर के नीचे सुरक्षित रखे हुए अंडे दे रहे थे. राज्यसभा सांसद किरोडी लाल मीणा 8 मई को राजस्थान के दौसा जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां पीएम केयर्स से आए 19 वेंटिलेटर बंद पड़े थे. मीणा ने नाराजगी जताई. उनकी नाराजगी किस काम की थी, ये पता नहीं चल पाया है. अस्पताल ने कहा कि पीएम केयर फंड से आए वेंटिलेटर में कमियां हैं.

अपना उत्तर प्रदेश सबसे महान है. यहां कानपुर के कांशीराम अस्पताल में 6 वेंटिलेटर डिब्बे में पैक रखे हैं. इंस्टॉल करने की जगह नहीं है. ​बलिया के अस्पताल में वेंटिलेटर रखे हैं, कोई चलाने वाला नहीं है. फिरोजाबाद के अस्पताल में भी 60 से ज्यादा वेंटिलेटर सील पैक संभाल कर रखे हैं. हाथरस के अस्पताल में 4 वेंटिलेटर खराब हैं और ताले में बंद सुरक्षित रखे हैं. इटावा के सरकारी अस्पताल में 18 वेंटिलेटर भेजे गए लेकिन 11 मई तक उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा था. गोंडा में छह वेंटिलेटर भेजे गए लेकिन चलाने वाला कोई नहीं भेजा गया.

कानपुर के हैलट अस्पताल में 55 वेंटिलेटर बंद पड़े हैं. उनमें तकनीकी गड़बड़ी है. कंपनी के इंजीनियरों ने ही इसे ठीक करने को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं. आजतक के मुताबिक, यूपी में पीएम केयर्स फंड से आए 1194 वेंटिलेटर इस्तेमाल किए गए. इसमें 188 खराब निकले और 125 इस्तेमाल ही नहीं हुए. हिमाचल प्रदेश को इस फंड से 322 वेंटिलेटर मिले जिनमें से 144 का ही इस्तेमाल हो रहा है. बाकी बंद पड़े हैं.

बिहार के सुपौल सदर अस्पताल में 6 वेंटिलेटर हैं. सरकार की तरह वे भी मजे से आराम कर रहे हैं. अररिया सदर अस्पताल में भी 6 वेंटिलेटर हैं, 8 महीनों से मौज काट रहे हैं. इनमें से एक तो आईसीयू के टॉयलेट में रखा है. अस्पताल का कहना है कि इन्हें चलाने वाला कोई नहीं है.

गोवा में बीजेपी सरकार ने पीएम केयर्स से मिले पैसे से 200 वेंटिलेटर खरीदे. इनमें से प्रति वेंटिलेटर की कीमत 2 लाख है लेकिन सरकार ने दिल खोलकर खर्च किय और 2 लाख के वेंटिलेटर के लिए 8.50 लाख रुपए भुगतान किया. गोवा के डॉक्टर आर वेंकटेश ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है.

पीएम केयर्स फंड से ​पूरे देश में जहां भी वेंटिलेटर भेजे गए हैं, सब जगह से यही शिकायतें हैं कि या तो चालू ही नहीं हुए, या पड़े सड़ रहे हैं या फिर उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है. जनता के पैसे से जनता की जान बचाने का स्वांग किया गया लेकिन असल में पैसा भी ले लिया गया और जान भी ले ली गई.

(सभी सूचनाएं विभिन्न मीडिया खबरों से ली गई हैं.)

  • कृष्णकांत

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