Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

पांचवी अनुसूची की फिसलन

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 19, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

पांचवी अनुसूची की फिसलन

Kanak Tiwariकनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़

आदिवासी अधिकारों, हितों और उन पर अत्याचारों की समस्याओं के साथ भी देश जब्त किया जाता है. लगभग अनुमान के अनुसार आदिवासी के सभी समूहों को शामिल करने वाले काउंटी में पूरी आदिवासी आबादी दस करोड़ से कम गठित होगी जो एक महत्वपूर्ण और आकार की संख्या है.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

आदिवासी भारत के मूल निवासी हैं, जो आर्य जाति से भी पुराने हैं जो बाहर से पलायन करते थे. वे आमतौर पर गरीब, अनपढ़, वशीभूत और आत्म संतुष्ट होते हैं जबकि वे अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं में अकेले और परस्पर प्रकृति और जंगलों पर निर्भर होते हैं.

तथाकथित शहरी सभ्यता के उन्नत और उन्नत होने पर अब स्मार्ट शहरों, बाजारवाद, वैश्विककरण, निजीकरण और औद्योगिककरण के कारण भी अपने विशालकाय ज़ेनिथ तक पहुंच रहा है और अनुपातपूर्ण रूप से भारत को भी लिफाफ कर रहा है.

सामाजिक और सामाजिक जरूरतों की जनसंख्या में वृद्धि के कारण, लालच, प्राकृतिक संसाधनों को ऐसे शोषणकारी मानव प्रयासों के शिकार हो गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप भूमि, खनिज संसाधनों, वन उपज, पानी और यहां तक कि सस्ते आदिवासी श्रम को भी हड़पने के लिए जंगलों का अतिक्रमण हो गया है सेवा में उनका कार्यबल.

बहुतों को पता नहीं होगा कि आदिवासीयों के अधिकारों, हितों, विशेषाधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए किए गए संवैधानिक प्रयासों पर संविधान निर्माताओं ने व्यावहारिक तरीके से चर्चा की थी 5 सितम्बर 1949 को पूर्ण होने से केवल दो महीने पहले संविधान की.

यह दुर्भाग्य की बात है कि महात्मा गांधी भी संविधान निर्माण प्रक्रिया के सदस्य नहीं हैं और जवाहर लाल नेहरू जिन्हें आदिवासियों ने सबसे भरोसेमंद बनाया था, सरदार बल्लभ भाई पटेल को भी आदिवासी अधिकार समिति के अध्यक्ष चुने गए और सबसे ऊपर डॉ. ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष के रूप में अम्बेडकर स्वतंत्र भारत में आदिवासियों की समस्याओं का सामना होने की संभावना के अनुपात में ध्यान नहीं दे पाए.

तत्कालीन बिहार के एक आदिवासी सदस्य जयपाल सिंह मुंडा की अकेली आवाज थी जो आदिवासीयों के अधिकारों के संरक्षण के लिए निश्चित गारंटी के समावेश के लिए बहुत ही सजगता से, ईमानदारी से और जबरदस्ती लड़ता था. लेकिन यह राजनीतिक लोकतंत्र में एक बैन है कि बहुसंख्यक का शासन हमेशा किसी भी छोटे अल्पसंख्यक पर कायम रहेगा, भले ही यह वास्तव में, ऐतिहासिक और यहां तक कि भविष्यवादी रूप से सही हो. ऐसा ही दु:खद मामला था जयपाल सिंह का भी.

आदिवासियों को आश्चर्यचकित किया गया था कि अचानक पारदर्शी और सहभागी तरीके से अंततः कार्यान्वित प्रावधानों के फ्रेम को डॉ. द्वारा कलमबद्ध किया गया था. समय की कथित दया के कारण ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष के रूप में अम्बेडकर भी. उन्होंने चर्चा के लिए भाग्यशाली दिन पर आम सभा के सामने रखा. जयपाल सिंह के सबसे बहादुर हमले के अलावा कुछ मदद भी सदस्य युधिष्ठिर मिश्रा और ब्रजेश्वर प्रसाद ने की.

आदिवासी जिन क्षेत्रों के करीब और घने जंगलों में पर्याप्त आबादी वाले आदिवासी क्षेत्रों के बजाय अनुसूचित क्षेत्रों के नाम पर रखा गया था. ऐसे क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के पूरे भाग्य को विस्तारित किए बिना इसे राज्य के राज्यपाल के विवेक में डाल दिया गया था, जो अंततः अनुमोदित मसौदा के अनुसार कहेगा ‘यह जनजाति सलाहकार परिषद का कर्तव्य होगा राज्य में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और विकास के लिए संबंधित ऐसे मामलों पर सलाह दें, जैसा कि राज्यपाल द्वारा उन्हें संदर्भित किया जा सकता है.’

प्रस्तावित प्रावधान की बहुत सीमित और संरक्षित गुंजाइश के कारण यह जयपाल सिंह था, जो इंटर आलिया को नियंत्रित करते हुए अपनी भविष्यवाणी की व्याख्या में अपनी कल्पना की आग पकड़ सकता था कि इसके बजाय प्रावधान को पढ़ना चाहिए कि ‘यह जनजाति सलाहकार परिषद का कर्तव्य होगा राज्य के राज्यपाल को अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और राज्य में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और विकास के बारे में सलाह दें.’

इसी तरह अंतिम मसौदे को अंतरालिया भी कहना चाहिए कि जब तक राज्यपाल न हो तब तक कोई नियम नहीं बनाया जाएगा नियमन बनाने के लिए, उस मामले में जहां राज्य के लिए जनजाति सलाहकार परिषद है, इसलिए परिषद द्वारा सलाह दी गई है.’

आधिकारिक संकल्प की ओर से मूलभूत जवाब जयपाल सिंह को खारिज करते हुए एक इलस्ट्रेलियन सदस्य के. एम. मुंशी ने दिया था कि ‘अब ‘प्रशासन’ शब्द उद्देश्य से इस कारण से दिया गया है कि प्रशासन में कलेक्टर की नियुक्ति और कुछ इंस्पेक्टर की नियुक्ति शामिल होगी या पुलिस अधीक्षक; इसका मतलब जंगलों का प्रशासन है; इसका मतलब कानून व्यवस्था का प्रशासन है.

जनजाति सलाहकार परिषद् से राज्यपाल से परामर्श किया जाना चाहिए यह सुझाव नहीं है. प्रशासन शब्द जोड़े तो परिणाम यह होगा कि जनजाति सलाहकार परिषद से परामर्श के बिना जिले में छोटे से अनुसूचित क्षेत्र में कुछ भी नहीं किया जा सकता.’

परिषद् के प्रस्तावित संवैधानिक और प्रशासनिक कद के संबंध में भी असहमति में था. उन्होंने कहा कि यह एक पूरी तरह से बेतुकापन है, और इसलिए ‘सलाह’ के स्थान पर ‘सलाह’ दिया गया है. जयपाल के प्रस्तावों को खारिज करने के कारण परिषद के न्यायिक शोषण के रोक का सवाल जंगल में दूर-दूर तक जाएगा.

आदिवासियों की समृद्धि और राहत के लिए राज्यपाल की सहायता प्रशासनिक मशीनरी में किसी भी सुधारात्मक उपाय में निहित नहीं होगी, जब तक कि आदिवासियों की संवैधानिक स्थिति को इस तरह से संशोधित नहीं किया जाता है कि उनकी पहचान, इतिहास और संभावित भेद्यता कायम रहेगी.

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

अयोध्या भूमि घोटाला

Next Post

सरकार के सात साल, कोरोना महामारी और किसानों की बढती मुश्किलें

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

सरकार के सात साल, कोरोना महामारी और किसानों की बढती मुश्किलें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

एस. सिद्धार्थ : सरकारी ही नहीं, प्राईवेट स्कूलों की भी मुश्कें कसनी होगी जनाब

July 8, 2024

इन दिनों ‘कट्टर’ से ‘कट्टा’ हो रहा हूं मैं…!

May 27, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.