Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

एयर इंडिया : बाप दादों की सम्पत्ति बेच खाना ही सरकार की सफलता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 16, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

एयर इंडिया : बाप दादों की सम्पत्ति बेच खाना ही सरकार की सफलता

एक इन्डस्ट्रीयलिस्ट थे, खानदानी बिजनेसमैन. हिंदुस्तान का बड़ा घराना. जेआरडी टाटा को जीवन में पहले से ही बहुत मिला था, मगर इससे कुछ नया करने के जोश में कोई कमी नहीं आई थी. साहब ने 1932 में दो पायलट, चार इंजीनियर और कुछ लोगों को मिलाकर एक कम्पनी बनाई और हवाई डाक का ठेका लिया. ये भारत की पहली एयरलाइन थी. अगले दस सालों में ये कम्पनी सवारी भी ढोने लगी, विदेश में भी.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

एविएशन दुनिया का नया सेक्टर था. आजादी के वक्त छोटी-बड़ी कोई 9 कम्पनी थी इस क्षेत्र में. 1954 में नेहरू ने इसे नेशनलाइज कर दिया. सबको मिलाकर दो कम्पनी बनी. घरेलू सेवा के लिए इंडियन एयरलाइन्स और विदेश के लिए एयर इंडिया.

विदेश में एयरलाइंस के संचालन का अनुभव टाटा को था. बाइज्जत, नेहरू ने जेआरडी टाटा को एयर इंडिया चेयरमैन पद के लिए आमंत्रित किया. टाटा आये और एयर इंडिया दुनिया के आकाश पर छा गयी. हिंदुस्तान का पहला और अकेला इंटरनेशनल ब्रांड.

परफेक्शनिस्ट टाटा एक-एक बात पर निगाह रखते. विमानों में सफर करते, खाने पीने, जहाज के इंटीरियर, कर्मचारियों के व्यवहार … हर चीज में वे परफेक्शन लाते. मुनाफा बंटता, सरकार भी खुश, टाटा भी और पब्लिक भी. सरकारी कंपनी होने के बावजूद टाटा ही एयर इंडिया के जार थे. शास्त्री और इंदिरा ने भी इस इज्जत को बनाये रखा.

1977 में आई जनता सरकार. मोरारजी प्रधानमंत्री हुए. शुद्ध शाकाहारी, कड़े अनुशासन और हाई थिंकिंग के संस्कृतिवादी जीव. एक बार एयर इंडिया से कहीं गए, दारू के लिए पूछ लिया गया. मने हद्द है कि नई ?

मोरारजी ने टाटा को बुलाया, बोले – ‘ये दारू बन्द कर भाई. दारू से लीवर खराब हो जाता है. हमरी संस्कृति के खिलाफ है. टाटा ने नेहरू, शास्त्री, इंदिरा के काल में स्वतंत्रता से कम्पनी चलाई थी. सरकार को मुनाफा दे रहे थे. फिर काहे झुकते. मना कर दिया, कहा – ‘ऐसे एयरलाइन नहीं चलती.’

प्रधानमंत्री साहब 56 इंची थे, ठांय से टाटा को हटा दिया. दारू बन्द की, लिवर बचा लिया. अगले बरस एयर इंडिया ने इतिहास में पहली बार घाटा दर्ज किया. शुद्ध शाकाहारी एयरलाइन में इंटरनेशनल पैसिंजर बैठना ही नहीं चाहते थे. 80 में इंदिरा लौटी, टाटा भी वापस आये. डैमेज कन्ट्रोल की कोशिश हुई, मगर एयरइंडिया टॉप से खिसक चुका था.

बाजार फिर भी बना रहा. फिर आया लिब्रेलाइजेशन का दौर. 1994 में खुले आकाश की नीति बनी. वो नरसिंहराव का आखिरी साल था. नई एविएशन कम्पनियां आयी. 2004 आते-आते फायदे के सारे बड़े रास्ते प्राइवेट कंपनियों को देकर इंडिया शाइन कर दिया. एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स, बीएसएनएल वीरगति को प्राप्त हुए.

मनमोहन सरकार में प्रफुल्ल पटेल आये. एक सिरियस कोशिश हुई. दोनों कम्पनी मर्ज कर दी. संयुक्त घाटा कोई पांच सौ करोड़ था. जहाज पुराने थे, फ्लीट बेहतर करने के लिए नए जहाज खरीदे गए तो कर्जा और चढ़ गया. नए जहाज उड़ाते कहां ? पिछली सरकार में रुट हाथ से निकल चुके थे, उसे वापस ले न सके, लिहाजा उतनी कमाई हुई नहीं. आने वाले बरसों में किंगफिशर और जेट जैसे ब्रांड भी बाजार का दबाव न झेल सकी तो एयर इंडिया का ‘लीवर’ तो पहले से ही खराब था. अब कोई भंगार के भाव नहीं ले रहा.

एयर इंडिया की कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि प्रधानमंत्री को अपनी नाक हर जगह नहीं घुसेरनी चाहिए. मगर हमारे नेताओं ने ये शिक्षा नहीं ग्रहण की. ग्रहण ये किया कि सरकारी कम्पनी घाटे में आये तो कोई खरीदेगा नहीं इसलिए मुनाफे में है, तभी बेच दो. वैसे भी अपन के रहते, आज नहीं तो कल, घाटे में आयेगी ही.

बाकायदा ‘बाप दादों की प्रॉपर्टी बेच खाओ मंत्रालय’ बना है. इसका फैंसी नाम ‘डिसइन्वेस्टमेंट मिनिस्ट्री’ है. कहना न होगा कि ये मिनिस्ट्री सबसे पहले अटल जी ने बनाई थी. इस मंत्रालय का काम एयर इंडिया के किस्से सुनाना और पब्लिक को इमोशनल करके, मुनाफे वाले दूसरे उद्योग को बेचना है. नेहरू की अय्याशी के क़िस्सों से तंग आकर आप भी नेहरू की विरासतें बेचने के लिए सहमत हैं.

हालात ये है कि एयर इंडिया को बेच देना ही सरकार की बड़ी सफलता होगी. बिका हुआ एक महाराज, एविएशन की गद्दी पर बिठाया गया है. उसकी सफलता यही होगी कि महाराजा को बेच दें. सवाल यही है कि जमीर की तरह नेशनल कैरियर का अच्छा सौदा निकाल सकेंगे या नहीं. सिविल एविएशन का बहादुरशाह जफर बन सकेंगे या नहीं ?

खैर, तो कहना ये था कि दारू बिल्कुल मत पीना, दारू पीने से लीवर खराब हो जाता है और ज्यादा संस्कृति से दिमाग. सरकार का अभी वही हाल है.

  • मनीष

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

सम्राट और जुता

Next Post

आत्महत्या के लिए मजबूर हताश व निराश बेरोजगार युवा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

आत्महत्या के लिए मजबूर हताश व निराश बेरोजगार युवा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

दानिश सिद्दीक़ी को समर्पित : आवारा गोली

July 18, 2021

जब मैं पाकिस्तान का नामोनिशान मिटाने पाकिस्तान पहुंचा

October 9, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.