Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home कविताएं

मनुवाद का तीर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 22, 2021
in कविताएं
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

जी करता है दिखा दूं सीना चीर के,
कलेजा छलनी हुआ पड़ा है,
मनुवाद के तीर से !

हमारे पूर्वज राक्षस और राक्षसों के,
अवतार हो गये !!
इस तरह हम चक्रवर्ती से कुर्मी और कुम्हार हो गये !

You might also like

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

SEDITIOUS RIVER

कौन है श्रेष्ठ ?

ये आर्य भारत में शरणार्थी बन कर आये थे !
रोटी भी हम लोगों से मांग कर खाये थे !!
फिर धीरे-धीरे वो हमारे,
कबीलों के सरदार हो गये !!
इस तरह हम चक्रवर्ती से पाल और कलार हो गये !!

हमारी संस्कृति और सभ्यता को मिटाया था, जान ना ले हकीकत इसलिए,
हमारा इतिहास भी जलाया था !
रहते थे जो फिरंगी मेहमान बन कर
वो राजा, वजीर और सूबेदार हो गये !
इस तरह हम चक्रवर्ती से कहार हो गये !!

वैदिक सभ्यता थी इनकी सनातन धर्म था !
जो इंसान को इंसान ना समझे,
वो धर्म नहीं ऐसा अधर्म था !!
वर्णवाद और जातिवाद के कारण,
समाज के टुकड़े हजार हो गये !
इस तरह हम चक्रवर्ती से तेली, नाई, लोधी और महार हो गये !

सरेआम बहन-बेटियों की इज्ज़त को ,
नीलाम करवा दिया !
बांध कर गले में हांड़ी और पीछे झाड़ू,
आत्मसम्मान भी हमारा खत्म करवा दिया !
देख-देख हाल अपने समाज का,
हम शर्मसार हो गये !
इस तरह हम चक्रवर्ती से अहिरवार हो गये !!

जिह्वा कटवाते थे,
कानों में शीशा डलवाते थे !
मर जाता था प्यासा एक अछूत,
मगर ना उसको पानी पिलाते थे !
ऐसा गुलामी भरा जीवन पाकर,
हम कुत्तों से भी बेकार हो गये !
इस तरह हम चक्रवर्ती से रावत, कोरी और बरार हो गये !

‘अपना दीपक खुद बनो’ महात्मा बुद्ध ने,
सत्य की राह दिखाई थी !
क्या होती है तर्क और विवेक की शक्ति,
हम सब को बतलायी थी !!
लेकर बुद्ध की शिक्षा ‘सम्राट अशोक’
अरब देशों के पार हो गये !
इस तरह हम चक्रवर्ती राजा से, केवल मौर्या हो गये !

कह गये सतगुरु रविदास ‘मन चंगा तो कठौती
में गंगा’ पढ़े हमारे समाज का हर एक बंदा !
मधुमक्खियों की तरह रहो मिलकर ताकि,
ले ना सके कोई तुमसे पंगा !
पाकर ऐसा रहबर, पाकर ऐसा सतगुरु
परमात्मा के भी साक्षात्कार हो गये !
इस तरह हम चक्रवर्ती से अहीर और लुहार हो गये !

‘बाबा आंबेडकर साहेब’ ने शिक्षा, संघर्ष और
संगठन का गहरा नाता बताया था !
लिख संविधान हर गुलाम को,
गुलामी से मुक्त कराया था !
पर अब भूलकर बाबा साहेब को ,
देवी-देवता तुम्हारे अपार हो गये !
इस तरह हम चक्रवर्ती से चमार हो गये।

  • विक्की सिंह अम्बेडकर

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

घाटी में आतंक रोकने की जिम्मेदारी किसकी है ?

Next Post

किसान और क्रांति यानी मजदूर-किसान गठबंधन

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
कविताएं

SEDITIOUS RIVER

by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
कविताएं

कौन है श्रेष्ठ ?

by ROHIT SHARMA
July 31, 2025
कविताएं

स्वप्न

by ROHIT SHARMA
June 26, 2025
कविताएं

ढक्कन

by ROHIT SHARMA
June 14, 2025
Next Post

किसान और क्रांति यानी मजदूर-किसान गठबंधन

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

सरकारी बैंकों के प्राइवेट होने में जानिए अपना नफा-नुकसान

December 10, 2021

सेलेब्रिटीज के ट्वीट्स : इस बनावटी खेल को समझिए

February 6, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.