Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

ऐतिहासिक पराजय : विराट और रिज़वान का मिलना यानी मिलकर भी न मिलना

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 26, 2021
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

मोदी राज में हर कार्य ऐतिहासिक होता है. इससे कम तो बिल्कुल नहीं. पेट्रोल की कीमत अगले वर्ष 200 रूपये पार होने जा रहा है जो भी ऐतिहासिक ही होगा. उसी तरह भारत-पाकिस्तान के बीच खेले गये क्रिकेट विश्व कप में भारतीय क्रिकेट टीम का शून्य विकेट से पाकिस्तान के हाथों पराजय भी ऐतिहासिक ही है, जो पिछले 70 साल के इतिहास में पहली बार हुआ है, जैसा कि मोदी और गोदी हर मामले को पहली बार होना बताता है.

क्रिकेट मैच शुरू होने के पहले गिद्ध मीडिया इस क्रिकेट कप में भारतीय क्रिकेट टीम की संभावित जीत को मोदी की जीत कहकर भुनाया जा रहा था, लेकिन ज्यों ही इस मैच में भारत की ऐतिहासिक हार सामने आयी, भाजपा आईटी सेल तत्क्षण सक्रिय हो गया, और बताया जाने लगा कि जो कोई भी देश में पटाखा चलायेगा, भारत की इस ऐतिहासिक हार को देखते हुए उसे गद्दार माना जायेगा. इस बेबकूफ को यह भी नहीं पता है कि देश में चन्द दिनों बाद ही दीपावाली और छठ पर्व मनाया जाने वाला है, जहां पटाखे ही नहीं दीप भी जगमगायेंगे.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

बहरहाल, इस ऐतिहासिक हार का उत्सव वे सभी मना रहे हैं जो इस हार में अरबों-खरबों की कमाई किया है, मसलन, कनाडियन नागरिक अक्षय कुमार, गृहमंत्री अमित शाह का बेटा जय शाह वगैरह. इस ऐतिहासिक कमाई में आम जनता के हाथों में केवल गद्दार और देशद्रोही बनना ही लिखा है, जो दीपावली और छठ के उत्सव को भी माताम में बदलने का संघी एजेंट आह्वान कर रहा है.

बीते सात सालों में इस देश की जनता देशद्रोही, खालिस्तानी, पाकिस्तानी, चोर, गुण्डा, हैवान, शैतान, मवाली सब बन गई है. भारत के प्रसिद्ध पत्रकार रविश कुमार क्रिकेट के इस खेल के बाद खीची गई एक तस्वीर के बहाने भारत-पाकिस्तान के संबंध की पड़ताल कर रहे हैं, जो इस प्रकार है.

विराट और रिज़वान का मिलना यानी मिलकर भी न मिलना
फ़ोटो इंटरनेट से

इस तस्वीर को देखा तो ख़ूब गया है मगर जी भर किसी ने नहीं देखा. यह तस्वीर फैज़ की नज़्म-सी है. हारे हुए विराट का हाथ रिज़वान के कंधे पर है. विराट के चेहरे पर विजय की मुस्कान है. विराट के हाथ रख देने भर से रिज़वान का कंधा पिघल गया है. बाबर जैसे गले से लिपटने को तैयार है मगर कदम ठिठके से हैं. इक़बाल बानो की आवाज़ कहीं से चली आ रही है.

हम कि ठहरे अजनबी, इतनी मदारातों के बा’द,
फिर बनेंगे आश्ना कितनी मुलाक़ातों के बा’द।

ज़माने से खो चुकी आश्नाई एक मुलाक़ात में हासिल नहीं हो सकती. कई और मुलाक़ातों की ज़रूरत होगी. विराट और रिज़वान की जैसे मुलाक़ात तो हुई मगर बात नहीं हो सकी. बाबर जैसे इक़बाल बानो को ही सुन रहा हो –

कब नज़र में आएगी बे-दाग़ सब्ज़े की बहार,
ख़ून के धब्बे धुलेंगे कितनी बरसातों के बाद।

ज़माने तक लड़ने के बाद दो पड़ोसी किसी वजह से मिल जाते हैं तो इसी तरह नज़र मिला कर नहीं मिलाते हैं, जैसे किसी तरह उस अतीत से पीछा छुड़ा लेना चाहते हों, जिसमें न जाने ख़ून की कितनी गहरी नदियां बहती हैं मगर रिश्ता भी तो ख़ून का ही है. मैंने अपने जीवन में ऐसी कई तस्वीरें देखी हैं. झगड़े के बाद बच्चे की शादी में एक हुए रिश्तेदार एक दूसरे से नज़रे बचाते हुए कैसे बाराती के लिए मेज़ लगा रहे होते हैं. दोस्त से ज़्यादा दोस्त होने लगते हैं.

बहुत दिनों की बंद हो चुकी बातचीत के बाद जब किसी पुराने दोस्त के घर जाना होता था तो इसी तरह हर चीज़ पर पहले की तरह हाथ धर देने की इच्छा होती थी जैसे विराट ने रिज़वान के कंधे पर रखा था. कुछ बहाने खोज कर उसके हाथ से सामान लेकर वहां रख देने के लिए जी दौड़ पड़ता था. बहुत से दोस्तों के बीच नज़र हटा कर उससे बात कर लेना और और नजर मिलाते मिलाते नज़र हटा लेना. बहुत तकलीफ होती थी, दोस्ती तोड़ कर दोस्त होने में.

दिल तो चाहा पर शिकस्त-ए- दिल ने मोहलत न दी,
कुछ गिले शिकवे भी कर लेते, मुनाजातों के बाद

यहां कोई किसी को रोक नहीं रहा है. रुक रहे हैं मगर बढ़ भी रहे हैं. आप इस तस्वीर को ठीक से देखिए. हम इस तस्वीर को भारत और पाकिस्तान के रिश्तों की वास्तविकता से अलग कर नहीं देख सकते. लेकिन इसे देखते ही एक अलग सी वास्तविकता बन जाती है. कुछ देर पहले इसी स्टेडियम में खेल भावना के नाम पर मुट्ठी भींचते और चीखते दर्शकों का चेहरा काफी ख़तरनाक लगा था. लग रहा था कि क्रिकेट इन्हें वहशी बना रहा है.

यहां से निकलने के बाद एक चौके और एक छक्के पर मुट्ठी तानने वाले ये लोग अपने पड़ोसी को देख इसी तरह मुट्ठी तानते होंगे. अपने हमवतन को किसी का चौका और छक्का समझने लगे हैं. मुझसे देखा नहीं गया. पांच मिनट में ही टीवी बंद कर दिया.

ज़माने बाद क्रिकेट देखने की कोशिश की लेकिन दर्शकों को देख कर लगा कि एक शालीन खेल किस तरह से उनके भीतर उपद्रवी होने की संभावना को मान्यता दे रहा है. वैसे भी अब क्रिकेट में क्रिकेट कम दिखता है, जैसे न्यूज़ में न्यूज़ कम दिखती है. हर चौके के बाद विज्ञापन आ जाता है.

आप इस तस्वीर को थोड़ी देर देख लीजिए. जल्दी ही भारत और पाकिस्तान के बीच नफरतों की आंधी इसे उड़ा ले जाने वाली है. भारत और न्यूज़ीलैंड के खिलाड़ियों के साथ इसी तरह की तस्वीर होती तो खेल भावना की रुटीन तस्वीर मानी जाती लेकिन यह तस्वीर क्रिकेट भर की नहीं है. ऐसी तस्वीरें लंबी तरस के बाद बूंद की तरह टपकती और धूप खिलने के बाद ओस की बूंदों की तरह ग़ायब हो जाती हैं. झूठी हैं मगर सच्ची हैं.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

जो ना पूछे आपको, पूछो ना उसके बाप को

Next Post

बंधक सपनों का अतीत

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

बंधक सपनों का अतीत

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

पश्चिमी कैलेंडर को खुले हृदय से अपनाया जाए

January 2, 2023

आरएसएस-भाजपा के दो महत्वपूर्ण तथ्य

July 30, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

March 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

March 7, 2026

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.