Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

वाल्मीकि

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 29, 2021
in लघुकथा
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
वाल्मीकि

मैं भी ख़ुश था ‘वाल्मीकि’ शब्द अपनाकर लेकिन उसने मेरा सारा भरम तोड़ दिया.

बात उन दिनों की है जब मेरा एडमिशन इंटर कॉलेज की कक्षा 6 में हुआ था. नए स्कूल में तमाम नए और अजनबी छात्र मिले. हर कोई मुझसे मेरी जाति जानना चाहता था. उनमें से अधिकांश को इससे कोई मतलब नहीं था कि मैं भी साफ़ सफाई से स्कूल आता हूं.

You might also like

एन्काउंटर

धिक्कार

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

जाति वाले प्रश्न मुझे विचलित कर देते थे क्योंकि आसपास के लोगों ने, प्राइमरी स्कूल के अध्यापकों और वहां के बच्चों ने मुझे कक्षा 5 तक बता दिया था कि मैं ‘अजीब तरह का इंसान’ हूं. जानवरों को छुआ जा सकता है, उनके मलमूत्र को छुआ जा सकता है लेकिन मैं, मैं और मेरी जाति के दूसरे लोग ऐसे अजीबोगरीब इंसान हैं, जो छूने योग्य नहीं हैं.

लोग जानवरों के मल मूत्र, यहां तक कि मानव मल तक को देखकर इस तरह से मुंह नहीं बिचकाते हैं जिस तरह से मुझे देखकर…

मैं कक्षा 9 में पहुंचा. इसी बीच न जाने कहां से मेरी जाति को एक नया नाम दे दिया गया.

‘वाल्मीकि’, जी हां वाल्मीकि. नया नाम मिल जाने से मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था. ख़ुशी-ख़ुशी मैंने और मेरी जाति के दूसरे लोगों ने यह नाम अपना लिया. अपनाता कैसे नहीं, उस ‘भंगी’ शब्द ने मेरे मानव होने पर प्रश्नचिन्ह जो लगा रखा था. जब भी कोई तिरस्कार भरी आवाज़ से ‘भंगी’ कहता था, ऐसा लगता था जैसे ‘पिघला हुआ शीशा’ मेरे कानों में उसने भर दिया हो.

अपनाता कैसे नहीं यह नाम ? जब मैं मासूम बच्चा था, नहीं जानता था क्या होती है जाति ? साथ के अगड़ी जातियों के बच्चों से दुत्कारा गया, कभी अध्यापक द्वारा क्रूरतापूर्ण तरीके से सजाएं दीं तो कभी दुकानों से उठाकर भगा दिया गया, बस यही भंगी होने के कारण.

अब मैं बगैर किसी झिझक के मैं अपनी जाति बता देता था. नया नाम पाकर मैं कल्पनाओं में उड़ने लगा था. मैं सोचने लगा था कि अब मुझे भी लोग इंसान मानेंगे.

कक्षा 9 में मुझे कई नए छात्र मिले. हर कोई मुझसे मेरी जाति पूछना चाहता था. मैं सभी को अपनी जाति ‘वाल्मीकि’ बता देता था लेकिन मेरी ख़ुशी क्षणिक थी. नया नाम मिल जाने से लोगों के मेरे प्रति व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया. तभी एक घटना ने मेरी कल्पनाओं के पंखों को जलाकर भस्म कर दिया.

छुट्टी के समय एक ब्राह्मण छात्र ने मुझसे कहा ‘तुम अपनी जाति क्या बताते हो …?’

मैंने जवाब दिया – वाल्मीकि.’

उसने मुझसे पूछा – ‘वाल्मीकि’ किस जाति के थे…?

मैंने जवाब दिया – मेरी जाति के.

उसने पूछा – भंगी…?

मैंने जवाब दिया – हां

इस पर वो गरजते हुए बोला – वाल्मीकि ब्राह्मण थे. किसी दूसरे ब्राह्मण को मत कह देना कि वाल्मीकि भंगी थे, बहुत पिटोगे.

तब से समय काफी आगे निकल चुका है. बहुत कुछ बदल चुका है. मेरे नाम के साथ जुड़कर एक ब्राह्मण ऋषि ‘अछूत’ हो गया है. दुनिया हाईटेक युग में प्रवेश कर चुकी है.

मैं एक अध्यापक बन चुका हूं. नहीं बदला है तो उनका मेरे प्रति व्यवहार.

मैं आज भी एक ‘अछूत’ हूं. आज भी लोग मेरे पास से निकलने से बचते हैं कि कहीं छू न जाएं.

मैं भी बदला हूं.

मैंने लोगों को अपनी जाति ‘वाल्मीकि’ बताना बन्द कर दिया. उनके बताए धर्म और ईश्वर को हमेशा के लिए अपने अंदर से मार दिया. मानवता के उन दुश्मनों की एक एक रीति रिवाज को त्याग दिया, जिन्होंने इस देश पर जातिप्रथा थोपी.

मालूम नहीं कब यह देश जागेगा ! जब भी जागेगा उन लोगों को कभी माफ़ नहीं करेगा जिन्होंने यहां के समाज को ‘जातियों की गंदगी’ से भरे टैंक में सड़ने के लिए डाल दिया है.

  • शैलेन्द्र फ्लेमिंग

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

पिता-पुत्र संवाद : भगवान बनाम मानव

Next Post

बांग्लादेश से आदर्श संबंध : जब सरकार ही आदर्श बोल रही है तो हम आप क्या बोलेंगे ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
लघुकथा

इतिहास तो आगे ही बढ़ता है…

by ROHIT SHARMA
January 5, 2026
लघुकथा

सवाल

by ROHIT SHARMA
August 16, 2025
Next Post

बांग्लादेश से आदर्श संबंध : जब सरकार ही आदर्श बोल रही है तो हम आप क्या बोलेंगे ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भाषा जब खत्म होती है

November 13, 2021

मुर्गे की बांग

December 11, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.