Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

शराबी बुजुर्ग – ‘अब कोई बांझ नहीं कहेगा’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 8, 2021
in लघुकथा
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

आधी रात का समय था. रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के नशे में अपने घर की तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था. रास्ते में एक खंभे की लाइट जल रही थी. उस खंभे के ठीक नीचे एक 15 से 16 साल की लड़की पुराने फटे कपड़े में डरी सहमी सी अपने आंसू पोछते हुए खड़ी थी. जैसे ही उस बुजुर्ग की नजर उस लड़की पर पड़ी, वह रूक सा गया.

लड़की शायद उजाले की चाह में लाइट के खंभे से लगभग चिपकी हुई सी थी. वह बुजुर्ग उसके करीब गया और उससे लड़खड़ाती जबान से पूछा – तेरा नाम क्या है, तू कौन है और इतनी रात को यहां क्या कर रही है…?

You might also like

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

एन्काउंटर

लड़की चुपचाप डरी सहमी नजरों से दूर किसी को देखे जा रही थी. उस बुजुर्ग ने जब उस तरफ देखा जहां लड़की देख रही थी तो वहां चार लड़के उस लड़की को घूर रहे थे। उनमें से एक को वो बुजुर्ग जानता था. लड़का उस बुजुर्ग को देखकर झेंप गया और अपने साथियों के साथ वहां से चला गया.

लड़की उस शराब के नशे में धुत्त उस बुजुर्ग से भी सशंकित थी फिर भी उसने हिम्मत करके बताया – मेरा नाम रूपा है. मैं अनाथाश्रम से भाग आई हूं. वो लोग मुझे आज रात के लिए कहीं भेजने वाले थे. दबी जुबान से बड़ी मुश्किल से वो कह पाई.

बुजुर्ग – क्या बात करती है…तू अब कहां जाएगी… ?

लड़की – नहीं मालूम…!

बुजुर्ग – मेरे घर चलेगी…?

लड़की मन ही मन सोच रही थी कि ये शराब के नशे में है और आधी रात का समय है, ऊपर से ये शरीफ भी नहीं लगता है, और भी कई सवाल उसके मन में धमाचौकड़ी मचाए हुए थे !
बुजुर्ग – अब आखिरी बार पूछता हूं मेरे घर चलोगी हमेशा के लिए…?

बदनसीबी को अपना मुकद्दर मान बैठी गहरे घुप्प अंधेरे से घबराई हुई सब कुछ भगवान के भरोसे छोड़कर लड़की ने दबी कुचली जुबान से कहा – जी हां

उस बुजुर्ग ने झट से लड़की का हाथ कसकर पकड़ा और तेज कदमों से लगभग उसे घसीटते हुए अपने घर की तरफ बढ़ चला. वो नशे में इतना धुत था कि अच्छे से चल भी नहीं पा रहा था. किसी तरह लड़खड़ाता हुआ अपने मिट्टी से बने कच्चे घर तक पहुंचा और कुंडी खटखटाई.

थोड़ी ही देर में उसकी पत्नी ने दरवाजा खोला और पत्नी कुछ बोल पाती कि उससे पहले ही उस बुजुर्ग ने कहा ये लो सम्भालो इसको – बेटी लेकर आया हूं हमारे लिए. अब हम बांझ नहीं कहलाएंगे. आज से हम भी औलाद वाले हो गए.

पत्नी की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे और उसने उस लड़की को अपने सीने से लगा लिया.

  • आशुतोष कुमार सिंह

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

महंगाई का सपोर्टर एक नया बेशर्म राजनीतिक उत्पाद है

Next Post

अब अंग्रेजों के हवाले काशी विश्वनाथ मंदिर

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
लघुकथा

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

by ROHIT SHARMA
March 11, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
Next Post

अब अंग्रेजों के हवाले काशी विश्वनाथ मंदिर

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के घर पर छापामारी करती नरेन्द्र मोदी की पुलिस, मोदी का ‘मनोरोग’ या कुछ और ?

February 23, 2018

देश में भाजपा विरोधी एक ही पार्टी है

February 12, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.