Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

‘ओ लोगों, क्या मैं इसे मार दूं ?’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 25, 2021
in लघुकथा
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

'ओ लोगों, क्या मैं इसे मार दूं ?'

वह जूडाई का गवर्नर था. जूडाई रोमन राजाओ का जीता हुआ इलाका था. साम्प्रदायिक तनाव के बीच एक अशान्त एशियन इलाका. झगड़े झंझट रोज की बात थे. रोमन सैनिक से पॉलिटिशियन तक का सफर तय करने वाले पाइलेट को, गवर्नर बने रहना रहना था. गवर्नर होने का मतलब इलाके को शांत रखो, कब्जे में बनाये रखो और ज्यादा से ज्यादा टैक्स का पैसा रोम भिजवाते रहो.
यहूदियों के बीच आपसी झगड़े से उन्हें मतलब नही था. मगर इस बार का झगड़ा अलग था.

You might also like

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

एन्काउंटर

एक साधु किस्म का व्यक्ति धार्मिक त्योहार के समय, सैकड़ों समर्थकों के साथ यरुशलम में घुस आया था. वह खुद भी यहूदी था, पर यहूदियों की धार्मिक कुरीतियों का मजाक उड़ाता. सभायें लेता, लोगो को धार्मिक शिक्षा देता, खुद को ईश्वर का सच्चा बेटा कहता. उसका समर्थन बढ़ रहा था. यही उसका अपराध था.

उसे पकड़कर दरबार मे लाया गया. मौत की सजा की मांग की गई. पाइलेट ने पूछा – क्यों ? उत्तर – इसलिए कि जनता ऐसा चाहती है. इसे न मारा तो दंगा हो जाएगा. यहूदी विद्रोह कर देंगे. इसे मारने पर जनता खुश होगी, राज्य स्थिर होगा.

पाइलेट ने पूरा मुकदमा सुना. उसे अब भी इस आदमी को मारना उचित नही लगता था, मगर यहूदी भीड़ उफान पर थी. त्योहार के कारण एक अपराधी को छोड़ने की प्रथा थी मगर लोग इस आदमी की जगह एक अन्य हत्यारे को माफी देना चाहते थे. महल के आगे भीड़ लगी थी. उसने जनता से पूछा- क्या मैं इसे मौत की सजा दूं ? जनता ने कहा एक स्वर में हामी भरी.

इसका खून किसके हाथों पर होगा  ? – पाइलेट ने पूछा. वह अब भी इस कत्ल की जिम्मेदारी नही लेना चाहता था.

हम पर, हमारे बच्चो पर, हम यहूदियों के हाथ पर यह खून होगा – एकत्रित भीड़ ने समवेत स्वर में कहा.

अब खून यहूदियों के सर था. उनके बच्चों के सर था. अपराधी को कांटों का ताज पहनाया गया, घसीटा गया, थूका गया. एक ऊंची पहाड़ी पर ले जाकर दर्दनाक मौत दी गयी. लोग खुश हुए. जीत का अहसास लेकर घर गए.

वक्त का पहिया घूमा, मारा जाने वाला व्यक्ति देवता हो गया. दुनिया उसकी मुरीद हो गयी और यहूदी…!!!

पाइलेट के महल के सामने वो महज कुछ सौ यहूदी थे. मुट्ठीभर उन्मादियों ने जीसस क्राइस्ट के खून से अपने हाथ रंगे, जीत का अहसास किया, इस कृत्य ने पूरी कौम पर अपराध डाल दिया.

हजारों सालों बाद उनकी कौम, उनकी पीढियां अभिशप्त जी रही हैं. एक अदद धरती के टुकड़े, एक देश, एक शांत सुरक्षित जीवन के लिए.

मौत की सजा के मुकर्रर करने के बाद गवर्नर पाइलेट ने देर तक अपने हाथ धोए. यह संकेत था कि वह इस हत्या का दोषी नही. मगर उसका अंत भी आत्मघात से हुआ. मासूम खून के दाग किसी को नही बख्शते.

मुट्ठी भर नफरती, उन्मादियों को भड़काकर, उन्हें एक साथ इकट्ठा कर, सत्ता के ऊंचे आसन को हासिल करने वाले भी हर कत्ल से पहले पूछते हैं.

– ओ लोगों, क्या मैं इन्हें मार दूं ?

मुट्ठी भर भीड़ मचलती है, किलकारियां भरती है, मकतूलों का बहता खून अपने हाथ मे लेती है. अपनी आने वाली पीढ़ियों के सर लेती है. वह ये खून अपने धर्म के सर लेती है. अपने देश के सर लेती है. बार बार, हर रोज लेती है. उसे बहते खून से ताकत का अहसास होता है. और राजा उनकी खुशी के लिए, मासूमों को मारने का आदेश कर अपने हाथ धो लेता है.

क्या आश्चर्य की तमाम त्याग, कोशिशों, संसाधनों और योग्यताओं के बावजूद हम तेजी से फिसलते जा रहे हैं, गिरते जा रहे हैं. हमारे बच्चे उन्मादी बन रहे हैं, कुंठित हो रहे हैं. हमारी मेहनतों के फल नही मिलते. हम घरों में बंद होकर भुखमरी और मौत का इंतजार कर रहे हैं. जिस ओर देखिये, भविष्य अंधकार में दिखता है.

आप यकीन नही करेंगे. मगर सच यही है कि सैंकड़ो अखलाकों का खून अपना रंग दिखा रहा है. उन्माद अब भी शबाब पर है तो अभी ये रंग, और गहरे, और बदरंग होने है. सनद रहे, यह खून राजा के हाथ पर नही है.

  • मनीष सिंह

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

जय भीम : केवल कम्युनिस्ट ही आंदोलन करते हैं, तब लाल झंडा कैसे छिपाया जा सकता है ? – टीजे ज्ञानवेल

Next Post

डाक्यूमेंट्री : हमारे करीबी रिश्तेदार The Great Apes की भावनाएं मानव को अपने बारे में क्या बता सकती हैं ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
लघुकथा

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

by ROHIT SHARMA
March 11, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
Next Post

डाक्यूमेंट्री : हमारे करीबी रिश्तेदार The Great Apes की भावनाएं मानव को अपने बारे में क्या बता सकती हैं ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

राहुल गांधी का दार्शनिक जवाब और संघियों की घिनौनी निर्लज्जता

May 26, 2022

एकबार फिर पलटी के बाद नीतीश कुमार का कोई भविष्य शेष नहीं रहेगा

February 1, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.