Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

नफरत का कॉमन कॉज़, उसे पहचानिये

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 13, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ये तीन कहानियां तीन अलग अलग समाज की है लेकिन एक किरदार है जो तीनो में मौजूद है. उसे पहचानिये.

नफरत का कॉमन कॉज़, उसे पहचानिये

मैं 84 की सिख विरोधी हिंसा का चश्मदीद हूं. सिखों की दुकानों को पुलिस और प्रशासन की निगरानी में लुटते देखा है. मैं सिख नहीं था तो दूसरी तरफ से इसे देखना आसान था. ये हिंदू समाज के एक तबके की प्रतिक्रिया थी. उस हिंसा और लूट के पीछे मूल भावना न राष्ट्रवाद थी और न ही इंदिरा गांधी के प्रति सम्मान. इसमें इंदिरा गांधी के विरोधी भी शामिल थे. वो भी शामिल थे जो इमरजेंसी में अंडरग्राउंड थे.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

मूल भावना थी सिखों के प्रति ईर्ष्या. उनका बढ़ता कारोबार चुभ रहा था. सिख दूकानदारों के मकान अच्छे हो गये थे. उनकी दूकानें पहले से बड़ी हो गई थी. कुछ व्यापार खासकर मोटर स्पेयर पार्ट्स और रेडिमेड कपड़ों में तो लगभग पूरी पकड़ थी. मेरे एक पड़ोसी एक दुकान से अच्छा खासा माल लूट कर लाये थे. वो जिस दुकान का था वो दिन भर वहीं बैठते थे, उसी की चाय पीते थे, उधार भी लेते थे. ऐसे बहुत से थे.

लूट का माल कुछ दिन में चुक गया और सिख दुकानदार फिर खड़े हो गये. अभी भी व्यापार में वैसा की कब्ज़ा है उनका. जिन्होने सिखों को सबक सिखाने के लिये लूटा था, उन्हें भी देखता हूं. वो भी वहीं हैं जहां थे. वैसे ही मकान, कोई छोटी मोटी नौकरी या दुकान. अगली पीढ़ी भी कुछ खास नहीं कर पाई. शुरुआती गुंडागर्दी के बाद नाली-गिट्टी-खड़िंजे के ठेकेदार ही बन पाये.

2

अस्सी के दशक के बिलकुल शुरुआती दौर की बात है. तब राम मंदिर का मुद्दा पैदा भी नहीं हुआ था लेकिन विश्व हिंदू परिषद था. उसकी एक बैठक घर के पास हो रही थी. जो बाते हो रही थी उसे सुना. बैठक ‘पेट्रो डॉलर’ पर केंद्रित थी. खाड़ी के देशों से मुसलमान के पास पैसा आ रहा था. उसके खिलाफ आंदोलन चलाने की बात हो रही थी.

सत्तर के दशक में बड़ी संख्या में मुसलमान खाड़ी के देशों में काम धंधे के लिये गये. एक गया तो उसने अपने परिवार या जानने वालों में चार और को बुलाया. ये आमतौर पर छोटे काम धंधे वाले लोग थे. जब लौटते थे तो अपने साथ बड़े-बड़े टेप रिकार्डर और इलेट्रॉनिक्स का दूसरा सामान लाते थे. कपड़े सूती की जगह सिंथेटिक हो गये थे इनके. शाम को तैयार होकर, सेंट लगा कर शहर में घूमते थे. विदेशों के किस्से उनसे सुनने पर लगता था कि किसी परी लोक को देख कर आये थे. एक दोस्त था महफूज़. अंडे की दुकान थी उसकी. उसके भाई भी वहां नौकरी करने गये थे. बड़ा टेप रिकार्डर वहीं देखा था पहली बार.

कई साल बाद विश्व हिंदू परिषद के उस ‘पेट्रो डॉलर’ के खिलाफ अभियान और खाड़ी से लौटे मुसलमान के बड़े टेप रिकार्डर का रिश्ता समझ में आया. हां, राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद का आंदोलन शुरु होते ही ये समझ में आ गया था कि इसकी मूल वज़ह बाबर नहीं महफूज़ के भाई का टेप रिकार्डर है.

3

कुछ महीने पहले मेट्रो स्टेशन से घर आ रहा था. रिक्शे पर था. रास्ते में रिक्शेवाले से बात होने लगी. बिहार के छपरा का था. मैंने पूछा किसे वोट दिया था चुनाव में. बिना किसी हिचक के उसने जवाब दिया ‘लालू जी को’. मैंने पूछा क्यों ? उनकी सरकार में कोई विकास नहीं हुआ, घोटाले का आरोप भी लगता है, जेल भी काट आये. उसका जवाब था कि आप शहर में रहने वाले कभी नहीं समझ पायेंगे कि लालू जी ने क्या दिया है हमको.

आगे उसने बताया कि पहले अगर गांव में हम साइकिल पर जा रहे हों और सामने से कोई ‘बड़ा आदमी’ आ जाये तो हम साइकिल से उतरते थे, उसके पैर छूते थे और फिर साइकिल पर चढ़ते थे. लालू जी के आने बाद अब हम किसी के पैर नही छूते हैं, हाथ मिलाते हैं.

  • प्रशांत टंडन

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें] 

Previous Post

भारत की अर्थव्यवस्था के ‘अच्छे दिन’

Next Post

झूठ और फरेब की बुनियाद पर खड़ा नया भारत

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

झूठ और फरेब की बुनियाद पर खड़ा नया भारत

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

‘लिखे हुए शब्दों की अपेक्षा लोगों को फिल्मों से जोड़ना अधिक आसान है’ – हिटलर

March 19, 2022

शववाहिनी गंगा

May 20, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.