Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

बेरोजगारी का दंश और छात्र आन्दोलन का भूकम्प

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 25, 2022
in ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

बेरोजगारी का दंश और छात्र आन्दोलन का भूकम्प

आन्दोलन की आग भड़काने के लिए एक चिनगारी एक जरूरत होती है, वैसी ही एक चिनगारी भड़की कल पटना में. केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में घोषित आरआरबी एनटीपीसी के रिजल्ट में गड़बड़ी के खिलाफ सोमवार को छात्रों का गुस्सा फूट गया. बिना किसा पूर्व सूचना के बड़ी संख्या में आक्रोशित छात्र पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल पहुंच गए. देखते ही देखते छात्रों का हुजूम रेलवे ट्र्रैक पर आ गया और ट्रेनों के परिचालन को ठप कर दिया.

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

केंद्र सरकार की ओर से आरआरबी एनटीपीसी का हाल के दिनों में रिजल्ट जारी किया गया है. छात्रों ने बताया कि परीक्षा का फॉर्म 2019 में भराया गया. 2021 में एग्जाम लिया गया. रिजल्ट 14 जनवरी 2022 को जारी किया गया. कुल मिलाकर 3 साल में एक परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया और उसमें भी काफी धांधली की गई है.

छात्रों का आरोप है एक ही छात्र को कई अलग-अलग पदों पर बहाल कर दिया गया है. यह सरकार की ओर से बहाली नहीं करने की साजिश है और एक ही छात्र का रिजल्ट कई जगह देकर आंकड़ेबाजी का तरीका है, यह नहीं चलेगा. जल्द से जल्द रिजल्ट को सुधारा जाए नहीं तो आंदोलन को तेज किया जाएगा.

रामराज्य की परिकल्पना को साकार करती भाजपा-आरएसएस संचालित भारत सरकार के केन्द्र में देश के चंद औद्योगिक घरानों के अलावा और कोई नहीं है. चाहे वह छात्र हो, युवा हो, किसान हो, मजदूर हो या वैज्ञानिक समुदाय ही क्यों न हो.

सरकारी नौकरी को भारत सरकार खत्म करने पर तुली हुई है. जो कुछ भी सरकारी नौकरियां अभी तक बची है वह वस्तुतः पहले से ही सत्ता प्रतिष्ठान में अपना सर घुसाये बैठे बड़े-बड़े आला अधिकारियों, मंत्रियों वगैरह के संरक्षण में अपने परिवारों को दी जा रही है. फिर भी अगर कुछ सीटें बच जाती है तब बड़े पैमाने पर रूपयों की लेन-देन से पूरी की जाती है. यहां योग्यता कोई पैमाना नहीं है.

मेरे एक परिचित बताते हैं कि जांच परीक्षा महज खानापूर्ति है. भर्तियों के संबंध में परीक्षा होने से बहुत पहले ही लाखों रुपयों की लेन-देन हो चुकी होती है, बांकी सब खानापूर्ति भर है. यहां तक कि अब आईएएस अधिकारी बनने के लिए भी परीक्षा की जरूरत नहीं रह गई है, बिना किसी परीक्षा को पास किये भी आईएएस-आईपीएस अधिकारी बना जा रहा है, तब परीक्षा की खानापूर्ति क्यों ?

परीक्षा की खानापूर्ति दो कारणों से की जाती है. एक तो सामाजिक लज्जा को बचाये रखने के लिए एक फटा हुआ लबादा ओढ़ लेना, जिसके फटे से उसकी सारी नंगई उजागर होती रहती है. दूसरा कारण है करोड़ों की तादाद में फार्म भरने आये छात्रों से फीस के नाम पर हजारों करोड़ की वसूली करना.

आज जब नौकरी, वह भी सरकारी नौकरी स्टेटस सिंबल बन चुका है, और बिना नौकरी पाये युवा हताश होकर आत्महत्या कर रहे हैं या फिर समाज में अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए अपराध जगत की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तब यह सवाल देश की सत्ता के सामने मौजूं है कि आखिर ये करोड़ों युवाओं का होगा क्या ??

भाजपा की मोदी सरकार ने इन युवाओं के सामने लठैत बनने का एक रोजगार खोला है, जिसकी कीमत भी आये दिन कम होती जा रही है. लठैत बने यह युवा किसी शिकार की तालाश में समाज में भटक रहे हैं और पहला मौका मिलते ही हत्या, बलात्कार, दंगा का बाजार गर्म कर देते हैं, जिसे मोदी सरकार सरकारी संरक्षण देती तो है, पर वह खुद ही एक जिंदा लाश बन जाता है क्योंकि भले ही सरकारी मूल्य शेष हो गया हो पर सामाजिक मूल्य अभी भी बांकी है.

समय रहते अगर छात्रों-युवाओं का विशाल हुजूम किसानों, मजदूरों, वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक शक्ति का गठन नहीं करती तो समाज आवारों का विशाल चारागाह बन जायेगा, कहना नहीं होगा इस चारागाह में शिकार वे भी होंगे जो आज इन आवारागर्दों का पोषण कर रहा है.

छात्रों युवाओं द्वारा भड़की यह तत्कालीन भूकंप जो आज पटना के राजेन्द्र नगर टर्मिनल में फूटी है, इस भूकम्प को रोज ही सारे देश में फूटना होगा, तभी लगातार शिक्षा और रोजगार से महरुम होते युवा देश को एक नवीन दिशा दे पायेंगे, वरना आवारागर्दों का विशाल चारागाह इनकी प्रतीक्षा कर रहा है. बहरहाल, किसान आन्दोलन की ही तरह छात्र आन्दोलन जिन्दावाद !

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

संसदीय चुनावों के रणकौशलात्मक इस्तेमाल की आड़ में क्रांतिकारी कार्यों को तिलांजलि दे चुके कम्युनिस्ट संगठनों के संबंध में कुछ बातें

Next Post

बिजली के खम्भे की गूंज – ‘कमल का फूल, सबसे बड़ी भूल’

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

बिजली के खम्भे की गूंज - ‘कमल का फूल, सबसे बड़ी भूल’

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

वर्ग समाज को दफना दो, इससे पहले कि वह हम सबको दफना दे: एलेनोर बर्क लीकॉक का मार्क्सवादी नारीवादी नृविज्ञान का दृष्टिकोण

November 28, 2024

इन दिनों ‘कट्टर’ से ‘कट्टा’ हो रहा हूं मैं…!

May 27, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.