Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

रूसी और अमेरिकी साम्राज्यवादी युद्ध के बीच पिसती यूक्रेनी और रुसी जनता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 26, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
रूसी और अमेरिकी साम्राज्यवादी युद्ध के बीच पिसती यूक्रेनी और रुसी जनता
रूसी और अमेरिकी साम्राज्यवादी युद्ध के बीच पिसती यूक्रेनी और रुसी जनता

महीनों से भारतीय मीडिया रूसी हमले की खबर को उन्मादी ढंग से छाप जा रहा है और इसमें अमेरिका की भूमिका को यूक्रेन के मित्र के रूप में पेश किया जा रहा है, क्या यह सच है ? क्या इस युद्ध के पीछे अमेरिकी तथा रूसी साम्राज्यवाद की बाजार विस्तार और यूरोप में अपने वर्चस्व का मुद्दा केंद्र में नहीं है ? क्या इस युद्ध को कहीं से भी आम लोगों का युद्ध कहा जा सकता है ? क्या किसी भी रूप में यह यूक्रेन या रूस की जनता के हितों के लिए लड़ा जा रहा है ?

ख्रूश्चेव के नेतृत्व में जब से समाजवाद की जगह पर पूंजीवाद की पुनर्स्थापना और सामाजिक सम्राज्यवाद की नीति अपनाई गई, सोवियत संघ के अंदर नौकरशाही से लेकर समाज तक में एक छोटे से अल्पतंत्र के हाथों में सत्ता और साधन संकेंद्रित किया जाने लगा, तबसे उनके आंतरिक विरोध तीव्र होते गए.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

सोवियत संघ को बांधकर रखने वाली नियामक शक्ति के रूप में उसकी फौजी ताकत नहीं थी, बल्कि मजदूर तथा मेहनतकशों का यह विश्वास था कि सत्ता हमारी है और यह समान भाव से हम सबों का ख्याल रखती है. इसी भावना से प्रेरित होकर स्तालिन के नेतृत्व में लोगों ने हिटलर के खिलाफ असंभव-सी दिखने वाली जीत को संभव बनाया.

युद्ध के दौरान कोई भी रूसी, यूक्रेनी, जॉर्जियाई नहीं था, सब के सब समाजवादी सोवियत संघ के नागरिक थे लेकिन पूंजीवाद की पुनर्स्थापना ने विभिन्न क्षेत्रों में जो नए पूंजीपति वर्ग को जन्म दिया उसका वर्गीय हित साम्राज्यवाद से गठजोड़ में था. अब उनका हित पूंजी के निवेश तथा स्थानीय व वैश्विक तौर पर बाजार के विस्तार में हिस्सेदारी से प्रेरित था.

साम्राज्यवाद से यह गठजोड़ पुतिन के पहले येल्तसिन के जमाने में रूस तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद व उसके दोस्तों के बीच प्रत्यक्ष देखा जा चुका है लेकिन साम्राज्यवाद का बुनियादी चरित्र उनके बीच एकता का नहीं बाजार और मुनाफे पर नियंत्रण के लिए टकराव में है. इसीलिए समाजवाद के काल में बने हुए अर्थव्यवस्था को तबाह करने के लिए तो अमेरिकी साम्राज्यवाद तथा रूसी साम्राज्यवाद के प्रतिनिधि येल्तसिन में दोस्ती चलती है, लेकिन जल्द ही बाजार और मुनाफे के बंटवारे के लिए वह टकराव में बदल जाता है. आगे रूसी साम्राज्यवाद के नए प्रतिनिधि पुतिन ने न सिर्फ सीरिया में, बल्कि हर संभव जगह पर उनसे टकराव की दिशा में जाता है.

सोवियत संघ के विघटन के समय रूसी साम्राज्यवाद को यह भरोसा था कि यूक्रेन उसकी छत्रछाया में रहेगा लेकिन पूंजीवाद के विकास के साथ यूक्रेन में जिन पूंजी के मालिकों का निर्माण हुआ, उन्हें अपना वर्गीय हित रूसी साम्राज्यवाद के साथ गठबंधन के बजाए अमेरिकी साम्राज्यवाद के गठबंधन के साथ जाने में दिख रहा है इसलिए यूक्रेन रूस से ज्यादा से ज्यादा दूरी बनाता रहा है.

सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था में उद्योग व कृषि दोनों ही क्षेत्रों में ऊक्रेन महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता था लेकिन आज इसका उत्पादन 1990 के स्तर से भी 20% कम है. ऊक्रेन प्राकृतिक संसाधनों में धनी है. रूस को छोड दें, तो यूरोप का एक समृद्ध उपजाऊ काली मिट्टी वाला कृषि प्रदेश है. सोवियत संघ के विघटन के बाद सामूहिक फार्मो को तोड़कर जमीन का बंटवारा कर दिया गया.

वहां के कृषि क्षेत्र में 70% छोटे किसान हैं लेकिन अब भारत के कृषि कानूनों वाली इरादे से इस जमीन पर बड़ी पूंजी के अधिकार के लिए वहां की सरकार प्रयासरत है, जो संभावित विरोध के कारण नहीं कर पा रही है. भूमि के निजीकरण के बावजूद उसकी बिक्री पर रोक लगी हैं, जिसे सरकार बाजार के लिए उपलब्ध कराना चाहती है.

यूक्रेन में कृषि तथा खनन में बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी के निवेश होने की संभावना है, इस कारण से अमेरिका सहित साम्राज्यवाद की नजर वहां के बाजार पर है. हथियारों की बिक्री पर टिकी अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस युद्ध में अपने हथियार यूक्रेन तथा नैटो के देशों को बेचकर मुनाफा कमाने के फिराक में है. जाहिर सी बात है किन हथियारों की कीमत यूक्रेन तथा यूरोप की जनता को चुकानी पड़ेगी जो मंदी के दौर में पहले से ही तबाही झेल रही हैं. पूरी दुनिया की तेल कंपनियां युद्ध के अवसर पर महंगा तेल बेच कर अपना मुनाफा कमाने की ताक में है.

अमेरिकी मीडिया और शासक वर्ग पहले से ही उक्रेन को डटे रहने के नाम पर युद्ध में झोकने की साजिश रच रहे हैं. यह स्पष्ट है कि युद्ध से पूरी दुनिया के बड़े पूंजीपतियों और वित्त पूंजी के मालिक को काफी फायदा होने जा रहा है. यहां तक कि शेयर मार्केट में जब टुटपुंजिया डर से अपने शेयर बेच कर भागेंगे, तो ये वित्त पूंजी और हेज फंड के मालिक कौड़ी के भाव में खरीद कर फिर इसकी कीमत बढ़ाकर बाजार में बेचेंगे.

युद्ध की विभीषिका को झेल चुकी यूक्रेन की जनता आज भी युद्ध से दूर रहना चाहती है, फिर भी अमेरिकी साम्राज्यवाद और उसका यूक्रेनी जूनियर पार्टनर पूंजीपति रूस से टकराव को आगे बढ़ाकर अपने वर्चस्व का झंडा फहराना चाहते हैं. इस तरह से दो साम्राज्यवादी शक्तियों के वर्चस्व के बीच में यूक्रेन की आम जनता युद्ध की तबाही और उसके साए में जीने के लिए अभिशप्त है.

तो निश्चित तौर पर इस मौके पर स्तालिन को याद किया जाना चाहिए जिसने बिना किसी युद्ध के यूक्रेन को अपने साथ रहने और मिलजुल करके विकास करने के लिए तैयार कर लिया था. यह करने में स्तालिन क्यों सफल हुए ? इसकी तलाश की जानी चाहिए कि उनकी सफलता का राज क्या था ?

  • नरेन्द्र कुमार

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Previous Post

रूस को अमेरिकी पिछलग्गु बने युक्रेन हड़प लेना चाहिए

Next Post

शांति बनाम विद्रोह

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

शांति बनाम विद्रोह

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अतीत के नाम पर पीठ थपथपाना बंद करो

May 31, 2022

पुण्य आत्मा को साधु का ज्ञान

March 11, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.