Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

भविष्य महापुराण : पत्नियां कामासक्त हो गई तो कसूर किसका होगा ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 23, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
भविष्य महापुराण : पत्नियां कामासक्त हो गई तो कसूर किसका होगा ?
भविष्य महापुराण : पत्नियां कामासक्त हो गई तो कसूर किसका होगा ?

यह बार-बार प्रचारित किया जाता है कि मुसलमान चार शादी करते हैं, जबकि यह संभव नहीं है. ऐसा करने के लिए पुरुष के मुकाबले स्त्रियों का चार गुना होना जरूरी है जबकि मुसलमानों में स्त्रियां 1000 पुरुष के मुकाबले 951 है. (यह अनुपात हिंदुओं के मुकाबले मुस्लिमों में बेहतर है, जबकि हिंदू स्त्रियों को देवी मान कर पूजा की बात करता है.)

अब मान लो कि किसी व्यक्ति की 4 या 4 से ज्यादा पत्नियां है. उस व्यक्ति के एक बेटे को देखकर कुछ पत्नियां कामासक्त हो गई तो कसूर किसका होगा ? पत्नियों का, बेटे का या पत्नियों के पति का ? मेरे अनुसार तो कसूर बेटे का तो बिल्कुल नहीं है और पत्नियों का भी नहीं है बेशक वह कामासक्त हुई.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

परशुराम की माता रेणुका एक राजा को रानियों के साथ नदी में नहाते और क्रीड़ा करते देख कर काम भावना पैदा हुई तो परशुराम का पिता जमदग्नि क्रोधित हो कर अपने बेटे परशुराम को रेणुका का वध करने का आदेश देता है और परशुराम वध कर भी देता है. गौतम की पत्नी अहिल्या ने भी यह जानते हुए भी कि आगुंतक उसके पति के वेश में उसका पति नही बल्कि इंदर है, उसके साथ संभोग किया.

खुद ब्रह्मा और कृष्ण का भी स्त्रियों को देख कर वीर्य गिरता रहता था. ऋषियों का भी यही हाल था, तब ऋषियों के पत्नियों का क्या दोष ? यह तो सामान्य बात है. अगर स्त्रियों दोषी हैं तो ऋषियों को और भगवानों को दोष क्यों नहीं ?

आज की कहानी भविष्य महापुराण जो ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग’ ने प्रकाशित की है, पर आधारित है. प्रकाशक के अनुसार इस पुराण की पांडुलिपि गोरखपुर यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर रामजी तिवारी ने उपलब्ध करवाई है.

कृष्ण की एक पटरानी जम्बवंती का बेटा साम्ब को देख कर सभी 16000 पत्नियां कामासक्त हो गई तो कृष्ण ने सभी पत्नियों और साम्ब को श्राप दे दिया. कहानी तो यही है लेकिन कहानी की शब्दावली पढ़ कर मजा आयेगा, इसलिए जरूर पढ़ें.

कहानी है भविष्य महापुराण के ब्राह्म पर्व के सप्तमी कल्प के साम्बकृत सूर्यार्धन वर्णन नामक 72/73 वे अध्याय में. शाम्ब या साम्ब नारद मुनि का अपमान करता रहा, जिससे चिढ़कर नारद ने जानबूझ कर कृष्ण को यूं कहा –

‘आपकी यह 16000 स्त्रियां साम्ब को प्रेम करती हैं, क्योंकि चराचर लोक में उसके समान कोई सुंदर नहीं है. ये स्त्रियां सदैव उसको देखने के लिए ललायित रहती हैं.’ कृष्ण ने मन में सोचा कि नारद की बात असत्य नहीं हो सकती. लोक में सुना भी जाता है स्त्रियां चपल होती है.

स्त्रियों के मन को समझने वाले ब्राह्मण लोगों का कहना है कि संभवत: व्यभिचारणी, चपल और स्नेहहीन स्त्रियां पुरुषों द्वारा रक्षित होने के बावजूद पति से असंतुष्ट हो जाती हैं. इस भांति रूप परीक्षा, अवस्था और सुरूप, कुरूप की और इनका कोई ध्यान नहीं रहता, क्योंकि ये केवल पुरुष के आकार मात्र को चाहती हैं.

(स्त्रियों को केवल पुरुष ही चाहिए इसके लिए यह पुरुष की उमर और सुंदरता भी नही देखती. ऐसा ही तुलसीदास ने अपनी रामचरितमानस में स्त्रियों के बारे में लिखा है. भ्राता पिता पुत्र उरगारी । पुरुष मनोहर निरखत नारी।। होइ बिकल मन सकइ न रोकी। जिमि रवि मनि द्रव रविहिं विलोकी।। अरण्यकाण्ड.16.3 अर्थात स्त्री भाई, पिता और पुत्र भी नहीं देखती, बस पुरुष आकार देख कर ही विकल हो जाती हैं.) (1 और 2)

कृष्ण ने नारद से कहा कि मुझे विश्वास नहीं हो रहा तो नारद ने कहा कि वह ऐसा कुछ करेंगे जिस से विश्वास हो जाएं, ऐसा कह कर चले गए. फिर किसी दिन आए तो कृष्ण अपनी 16000 पत्नियों के साथ जलक्रीड़ा करके बाग में मस्ती कर रहे थे. जब स्त्रियां मद्यपान से प्रबुद्ध हो गई (शराब के नशे में डूब गई) तब नारद ने साम्ब के पास जा कर कहा कि आप को महाराज ( कृष्ण ) ने बुलाया है जल्दी चलिए. साम्ब बिना सोचे विचारे नारद के कहने पर एकदम वहां पहुंच गया जहां कृष्ण अपनी रानियों के साथ था. रानियों ने साम्ब को देखा और मन में विकार आ गया. (3)

मद्यपान के कारण स्मृति नष्ट हो जाने से तथा अल्प सत्व के कारण सम्भावत: उनकी जांघें गीली हो गई. पुराणों में भी यह बात प्रसिद्ध है कि ब्रह्मचारिणी होते हुए भी सती स्त्रियों की योनि अत्यंत मनोहर पुरुष को देखकर मैथुन के लिय तर यानी रसर्पूण हो जाती है. लोक में देखा भी जाता है कि मद्यपान के कारण लज्जाशील स्त्रियां भी लज्जा छोड़कर निर्भय हो जाती है क्योंकि मास का भोजन, उत्तम आसव का सेवन और सुगंध पूर्ण उत्तम वस्त्रों का धारण करना स्त्रियों के लिए काम उत्पादक बताएं गए हैं.

नारद भी साथ ही वहां आ गए जिसे देख कर सभी स्त्रियां सम्मान देने के लिय खड़ी हो गई लेकिन यह क्या सभी स्त्रियों के योनि का पानी कपड़ों से निकल कर पत्तों पर गिरा, जिसे देख कर कृष्ण को क्रोध आया और श्राप देने के लिये बोला कि तुम मुझे छोड़ कर किसी और के लिये तुम्हारा मन आसक्त हो रहा है इसलिए तुम्हें पतिलोक और स्वर्गमार्ग की प्राप्ति अंत में होगी.

पतिलोक और स्वर्ग से भ्रष्ट के कारण उस समय अनाथ होने के कारण तुम्हे चोरों के अधीन रहना पड़ेगा. कृष्ण ने फिर अपने पुत्र साम्ब को भी श्राप दिया कि तुम्हारे इस रूप के कारण इन स्त्रियों के मन में कामवासना उत्पन्न हुई इसलिए तुम्हें कोढ़ हो जायेगा. (4 और 5)

  • अशोक तर्कशील

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

बाबू वीर कुंवर सिंह जाति विशेष के नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान के महानायक थे

Next Post

उमर खालिद प्रकरण : संघियों के पापों को धोते कोर्ट को बंद करो और माओवादियों की जन अदालतों को मान्यता दो

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

उमर खालिद प्रकरण : संघियों के पापों को धोते कोर्ट को बंद करो और माओवादियों की जन अदालतों को मान्यता दो

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अमेरिकी साम्राज्यवाद के निशाने पर परमाणु वैज्ञानिक और महत्वपूर्ण राजनयिक

December 23, 2021

कोरोना टीकाकरण के खिलाफ समूची दुनिया में उठ रहा आन्दोलन

February 5, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.