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Home कविताएं

अपने-अपने भगवान

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 4, 2022
in कविताएं
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मैंने अपने धर्म के नारे लगाए
उसने अपने धर्म के
मैंने अपने भगवान का झंडा उठाया
उसने अपने भगवान का

बात बढ़ती ही चली गई
और वहीं पहुंच गई
जहां अक्सर पहुंचती है

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वो भी मारा गया
मैं भी मारा गया
घर उसका भी गया
घर मेरा भी गया

बड़ी मुश्किल से बचाए हमने
अपने-अपने धर्म
और
अपने-अपने भगवान

2

अच्छी बात नहीं है
अपने पड़ोसी को मार देना
यह बात मैं अच्छी तरह जानता था
और मानता भी था

पर इन दिनों
मैं अपने धर्म और जाति पर
बहुत अधिक गर्व महसूस कर रहा था
गर्व की ऐसी गहरी अनुभूति
मुझे आज से पहले कभी भी महसूस नहीं हुई थी

बस गर्व करते-करते
एक दिन मेरा पड़ोसी मेरे ही हाथों मारा गया
किसी गर्वीले ने उसका घर भी जला दिया

‘शर्म नहीं आई ?’
– मां ने सवाल किया
‘शर्म किस बात की !’
मैंने गर्व से कहा !

  • जयपाल

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