Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home कविताएं

जिन्दा अतीत से साक्षात्कार

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 2, 2022
in कविताएं
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

अतीत को न्याय दिलाने वाले
इस ‘राष्ट्रीय खुदाई अभियान’ में
अन्ततः मैं भी शामिल हो गया !

फावड़ा लेकर मैं निकल पड़ा अतीत की ओर…

You might also like

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

SEDITIOUS RIVER

कौन है श्रेष्ठ ?

खोदते खोदते जब मैं थक रहा था
तो अचानक कुछ टकराया,
मैंने जल्दी – जल्दी मिट्टी हटाई
लेकिन यहां किसी मंदिर का अवशेष नहीं
बल्कि एक कंकाल था
कंकाल एक महिला का
मैं बेहद आश्चर्यचकित
क्योंकि महिला की योनि पर ताला जड़ा था.
ताले में भरसक जंग लग गया था
लेकिन वह टूटा नहीं था.
तभी वह दर्द से कराही
मैं डरकर पीछे हट गया
वह अपने आप में कुछ कह रही थी
मैंने कान लगाया
‘मेरी योनि को मुक्त करो !
इसकी चाभी खोजो और मुझे मुक्त करो !!’
मैं पसीने से तरबतर
ये कैसे हो सकता है
सदियों से यह महिला
अपनी योनि पर लगे ताले के खुलने के इंतजार में मरी नहीं है.
घबराकर मैंने खुदाई बन्द कर दी.

दूसरे दिन मैंने दूसरी जगह खुदाई शुरू की
इस बार जब टन्न की आवाज आयी
तो मैं हैरान
यह तो सिर्फ सिर का कंकाल है.
धड़ कहां है ?
सर के इस कंकाल को जैसे ही मैंने हाथ में लिया.
यह कांपा
और कहीं से बारीक-सी आवाज आई
‘मेरे धड़ को ढूंढो !
‘बिना उसके मैं कैसे मर सकता हूं
‘हमारे सिर को तो पेशवाओं ने फुटबॉल बना कर खेला
‘धड़ का क्या किया
‘हमें पता नहीं.’
मैंने धड़ की तलाश में चारों तरफ तेज़ी से खुदाई कर डाली
लेकिन हर तरफ सिर का ही कंकाल मिला
फुटबॉल की तरह हिलते डुलते
सदियों बाद भी मरने से इंकार करते.

अचानक मेरी नज़र
कुछ अकड़े काले पड़ गए कंकालों पर पड़ी
ये तो आग में जले मालूम होते हैं
मैं सहमते सहमते उनके नज़दीक गया
मुझे देखते ही उन्होंने करवट बदल ली
अरे, ये भी ज़िंदा हैं !
मैंने साहस करके पूछा
तुम्हारा तो अंतिम संस्कार हो चुका है
फिर तुम ज़िंदा क्यों हो ?
उनमें से एक ने लगभग खीझते हुए कहा
‘हमें अपनी झोपड़ियों में हमारे बच्चों सहित फूंक दिया गया था’
मैंने आश्चर्य से पूछा
‘क्यों ?’
‘क्योंकि हमने पहली बार अपने खाने में घी का तड़का लगाया था !
‘दक्षिण टोले से जाने वाली घी की महक उन्हें बहुत नागवार गुजरी !
‘क्योंकि घी के स्वाद पर उनका ही अधिकार था
‘इसलिए खाने से पहले ही हमें जला दिया गया !
‘हम अभी भी भूखे हैं
‘तो फिर मर कैसे सकते हैं ?’
मैं पसीने से तरबतर वहां से भागा…
मुझे लगा मैं पागल हो जाऊंगा…

लेकिन कुछ दिनों बाद
इन सबको दिमाग से निकाल कर
मैंने फिर खुदाई शुरू की
इस बार एक जर्जर हवेली की खुदाई करते हुए
मुझे उसकी नींव में एक के ऊपर एक कई साबुत कंकाल मिले.
वे भी मरे नहीं थे, बल्कि कराह रहे थे
उन्होंने फुसफुसा कर मुझसे कहा
‘इस महल को बनाते हुए हम इसी में दब गए
‘इसकी नींव हो गए.
‘राजा ने महल की सुरक्षा का वास्ता देकर
‘हमारे परिवार वालों को यहां आने से रोक दिया.
‘बिना अंतिम संस्कार, हम मर कैसे सकते हैं ?’

मैं वहां से भी जान बचाकर भागा
अंततः एक खुले मैदान की मैंने खुदाई शुरू की
रात भर खुदाई के बाद जब मैं पस्त हो चुका था.
तो अल्लसुबह जो मैंने देखा
उसने मेरे होश उड़ा दिये.
यहां वहां बिखरे थे हज़ारों कंकाल
लेकिन कोई साबुत नहीं था.
किसी की टांग गायब थी, किसी का हाथ
और किसी की आंख
मुझे आश्चर्य हुआ, कि ये भी मरे नहीं हैं !
सब कसमसा रहे हैं
मानो मिट्टी का बोझ हटने से
अब उठना चाह रहे हों
उनमें से किसी एक ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा
‘अंधायुग’ में हम जिस राजा के ख़िलाफ़ लड़े
‘उसे तो हम नहीं ही जानते थे
‘लेकिन जिस राजा के लिए लड़े, उसके बारे में भी हमें कहां पता था !
‘विजयी और पराजित राजा
‘दोनों ने संधि की
‘और हमें छोड़कर चले गए.
‘हम अपने परिवार वालों के इंतजार में
‘अभी भी मरने का इंतजार कर रहे हैं
‘क्या तुम उन्हें इत्तिला दे सकते हो ?’

मैं परेशान
कि यह सब क्या हो रहा है
कहीं यह कोई दुःस्वप्न तो नहीं है
अतीत इस कदर ज़िंदा कैसे है !

मैंने फावड़ा फेंका
और हताश होकर समुद्र में छलांग लगा दी
जब सांस रोके समुद्र की गहराई में गोते लगाता
तलछट पर पहुंचा
तो यहां भी आश्चर्य ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा
मैंने जो देखा, वह भयावह था !
कल्पना से परे था !
समुद्र की तलहटी पर लाखों कंकाल बिछे हुए थे…
इनके न सिर्फ हाथ और पैर बंधे थे
बल्कि वे एक दूसरे से भी बांधे गए थे !

मुझे समझते देर न लगी
जरूर गुलाम विद्रोह के कारण इनके जहाज डूबे होंगे
मैंने सोचा कि पानी मे तो निश्चित ही ये मर चुके होंगे.
लेकिन मैं यहां भी गलत था
नज़दीक पहुंचने पर मैंने देखा कि वे हिल रहे हैं
उन्हें लहरें हिला रही हैं या वे खुद हिल रहे हैं पता नहीं
लेकिन मुझे देखते ही
सभी कमज़ोर आवाज में, मगर एक स्वर में बोलने लगे
‘संकोफ़ा, संकोफ़ा…’
मैं समझ गया
ये मुझे सुदूर अतीत में भेजकर
अपने लिए कुछ मंगाना चाहते हैं
ताकि अपनी यातनादायी बेड़ियां तोड़ सकें !
मुक्त होकर एक दूसरे के गले लग सकें !!
और चैन से मर सकें !!!
या अफ्रीकी मुहावरे में कहें तो चैन से जी सकें !

अब मेरी सांस घुटने लगी थी
मुझे अतीत से बाहर आना ही पड़ा
समुद्र के ऊपर आकर लम्बी लम्बी सांस भरकर

मैं सोचने लगा
अतीत तो सचमुच ज़िंदा है, पूरी तरह ज़िंदा !
ठीक हमारी ही तरह
और न्याय के इंतजार में है
ठीक हमारी ही तरह…

  • मनीष आज़ाद

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

कांग्रेस प्रवक्ताओं की पार्टी बन गई है

Next Post

पृथ्वीराज चौहान : एक व्यभिचारी के ‘वीरता’ की कहानी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
कविताएं

SEDITIOUS RIVER

by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
कविताएं

कौन है श्रेष्ठ ?

by ROHIT SHARMA
July 31, 2025
कविताएं

स्वप्न

by ROHIT SHARMA
June 26, 2025
कविताएं

ढक्कन

by ROHIT SHARMA
June 14, 2025
Next Post

पृथ्वीराज चौहान : एक व्यभिचारी के 'वीरता' की कहानी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

गोगोई ने पद स्वीकार कर अवाम के मन में न्यायपालिका के प्रति एक तरह का अविश्वास पैदा कर दिया है

February 14, 2021

कॉरपोरेटपरस्त राम और उसकी ब्राह्मणवादी संस्कृति के खिलाफ आदिवासियों की लड़ाई से जुड़ें

January 15, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.