Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

हर जिंदादिल इंसान को मजहब नहीं, सच के साथ खड़े हो जाना चाहिए

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 13, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

पिछले 100 सालों में दुनिया तेजी से बदली है. 1920 कि दुनिया और 2020 कि दुनिया मे जमीन आसमान का फर्क है. इस दौरान दुनिया के तमाम धर्मों ने अपनी आस्थाओं में बदलाव किए हैं. चर्च ने गेलिलियो से माफी मांगी, यहूदियों ने ईसाइयों के साथ बुरे दौर की यादें भुला दीं, ब्राह्मणधर्म ने भी फौरी तौर पर ही सही लेकिन बलि प्रथा और मनुस्मृति जैसे ग्रंथों में लिखी जातिवादी/नारीविरोधी बातों से खुद को अलग कर लिया.

लेकिन इस्लामिक मानसिकता में थोड़ा भी फेरबदल नहीं हुआ. सौ साल पहले भी वे खिलाफत को बचाने की खातिर ब्रिटेन का विरोध करने सड़कों पर थे, आज सौ साल बाद भी पैगम्बर के नाम पर मुसलमान सड़कों पर हैं.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

अल्लाह ने कायनात बनाने से पहले ही जिसकी रूह को अपने नूर से बना डाला था और जिसे वह एक लाख चौबीस हजार में सबसे अव्वल मानता है, उसकी तौहीन शैतान के बहकावे में आये हुए कुछ ‘काफरीन’ कर देते हैं और उनको सबक सिखाने की खातिर कुछ ‘मोमिनीन’ सर तन से जुदा करने पर उतारू हो जाते हैं. फर्श पर होने वाला यह सब तमाशा अर्श पर बैठा वह रब्बुलालमिन देख रहा है और करता कुछ नहीं.

अल्लाह का पूरा निजाम तहस-नहस हो रहा है. उसकी मख़लूकें एक दूसरे की खून की प्यासी हैं. उसके सबसे प्यारे नबी की इज्जत दांव पर है लेकिन उसे कोई परवाह नहीं. कड़वा सच तो यह है कि ऐसा कोई खुदा है ही नहीं और जो नहीं है उसके नाम पर लड़ों मरो मारो काटो तबाह हो जाओ या तबाह कर दो, यही तो मजहबों की ज़िद है और इसी ज़िद में आस्थाओं की जीत भी छुपी हुई है.

गाय के नाम पर या कार्टून के नाम आहत होने वाली भावनाएं असल में बीमार मानसिकता की कुंठित आस्थाएं होती हैं, जिन्हें हम पीढ़ी दर पीढ़ी आंख बंद किये ढोते चले आ रहे हैं और इसी को धर्म कह कर इतरा भी रहे हैं. धर्म की इस युगों पुरानी अफीम में नफरतों का नशा होता है और नफरतों का यह नशा समय के साथ बढ़ता चला जाता है, जिसका परिणाम सिर्फ तबाही ही होती है.

शताब्दियों पुरानी यह सड़ी गली आस्थाएऔ नफरतों पर सवार होकर ही आज यहां तक पहुंचीं हैं और आज तबाहियों की नई दास्तानें लिख रही है. जब तक आस्थाओं के विषाणु इंसानी दिमागों में जिंदा रहेंगे, ये तबाही आगे भी यूंही बदस्तूर जारी रहेगी.

फर्ज कीजिये कि कल किसी कम्युनिटी की आस्था मच्छरों में बस जाए और वह मांग करे कि ऑलआउट कछुआ छाप ऑडोमास से हमारी भावनाएं आहत होती हैं इसलिए इन सब पर रोक लगे, मलेरिया के टीके बन्द हों, नालियों की सफाई बन्द हो और डेंगू की रोकथाम के लिए किये जाने वाले सारे उपाय बन्द हो, तब क्या हो ?

आस्था के नाम पर किसी को भी मनमानी करने की छूट देने का मतलब मानवता को तबाही की ओर ले जाने की छूट देना ही है. आज कार्टून से जिनकी भावनाएं आहत हो रही हैं, कल तस्वीरों से भावनाएं आहत होंगीं और परसों आपके और मेरे जिंदा रहने से.

इसलिए हर जिंदादिल इंसान को सच के साथ खड़े हो जाना चाहिए. जिनकी आस्थाएं आहत होती हैं, होने दें. जिनका मजहब मरता है, मरे बस इंसानियत नहीं मरनी चाहिए.

  • शकील प्रेम

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

खुलकर अपने लोकतंत्र, अपने संविधान और अपने देश के मुसलमानों के साथ खड़े हों !

Next Post

सावरकर के युग में गांधी और नेहरू एक बार फिर लाज बचाने के काम आ रहे हैं

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

सावरकर के युग में गांधी और नेहरू एक बार फिर लाज बचाने के काम आ रहे हैं

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

हरित क्रांति, डंकल प्रस्ताव, कांन्ट्रैक्ट फार्मिंग और किसान आंदोलन

June 26, 2021

CAA-NRC-NPR : छंटने लगी है धुंध अब

February 25, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.