Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अदाणी पावर को इस साल का बेस्ट कर्मचारी अवार्ड नरेंद्र मोदी को क्यों नहीं देना चाहिए ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 14, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

अदाणी पावर को इस साल का बेस्ट कर्मचारी अवार्ड नरेंद्र मोदी को क्यों नहीं देना चाहिए ?

Saumitra Rayसौमित्र राय

अदाणी पावर को इस साल का बेस्ट कर्मचारी अवार्ड नरेंद्र मोदी को क्यों नहीं देना चाहिए ? मैं प्रधानमंत्री शब्द इसलिए नहीं लिख रहा हूं, क्योंकि इस पद पर रहकर मोदी ने अदाणी के लिए श्रीलंका में 500 मेगावाट विंड पावर प्रोजेक्ट का ठेका देने का दबाव डाला क्योंकि मोदी ने कोयले पर इम्पोर्ट ड्यूटी जीरो की. अदाणी के मुनाफे के लिए कोयला आयात किया क्योंकि मोदी ने अदाणी के लिए ड्रोन शो आयोजित करवाया और ब्रांडिंग की.

इतना सब करने के बाद भी मोदी अदाणी की कंपनी के कर्मचारी क्यों नहीं बनते ? मोदी को कुर्सी छोड़कर अदाणी पावर जॉइन कर लेना चाहिए. दोहरा लाभ कमाकर एक फकीर कितना झोली भरेगा ? पूछिये तो देश के प्रधानमंत्री से ?

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

मोदी सरकार ने 2018 में देश के 6 एयरपोर्ट के निजीकरण को मंजूरी दी, तब यह फैसला सीधे अदाणी को फायदा पहुंचाने के लिए लिया गया था. असल में इस ठेके के लिये नियम और शर्तों को बदलकर बिना अनुभव वाली कंपनियों को बोली लगाने की इजाज़त दी गई. नतीज़ा यह रहा कि गौतम अदाणी को ठेका मिल गया.

ठीक इसी तरह श्रीलंका में 500 मेगावाट विंड एनर्जी का ठेका भी मोदी ने अपने उसी दोस्त अदाणी को दिलवा दिया, जिसके विमान में बैठकर वे 2014 में शपथ लेने दिल्ली आए थे. 2018 और 2022 के बीच अदाणी देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटर, पोर्ट ऑपरेटर और थर्मल कोल उत्पादक बन गए. साथ में मोदी को दूसरी बार सत्ता मिली.

अदाणी और मोदी के रिश्ते और 500 मेगावाट विंड एनर्जी का ठेका दिलाने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति पर भारतीय प्रधानमंत्री के दबाव को उजागर करने वाले एमएमसी फर्डीनांडो ने इस्तीफा दे दिया है. सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के पूर्व प्रमुख ने NDTV को वह चिट्ठी भेजी है, जो उन्होंने श्रीलंका के वित्त मंत्रालय को लिखी थी.

चिट्ठी में साफ लिखा है कि श्रीलंकाई पीएम के निर्देश पर अदाणी के प्रस्ताव को फौरन मंज़ूरी दी जाए. चिट्ठी यह भी कहती है कि अदाणी के प्रोजेक्ट को अनुमति देने पर भारत और श्रीलंका सरकार सहमत हैं.दिवालिया हो चुके श्रीलंका के राष्ट्रपति आरोपों से मुंह छिपा रहे हैं और मोदीजी की ज़ुबां पर ताले लगे हैं.

क्या बदला ? देश में बहुत ज़्यादा ताक़त चंद हाथों में समा गई. विपक्ष को अब खेल समझ आया है, जब ताक़त उसके हाथ से छिनकर सिस्टम में समा चुकी है. अदाणी की हैसियत आज ठीक वैसी ही है, जैसी 20वीं शताब्दी में अमेरिका के आयल मैगनेट जॉन डी रॉकफेलर की थी. भारत के हालात भी ठीक वैसे ही हैं, जैसे 1990 में रूस के थे. मोदी और अदाणी का रिश्ता अभी से नहीं, 2003 से है.

अदानी का त्वरित विकास

गुजरात दंगों में 1000 से ज़्यादा लोगों के कत्लेआम (ज़्यादातर मुस्लिम) के बाद दुनिया ही नहीं, व्यापारिक समुदाय ने भी मोदी को नकार दिया था, तब अदाणी ने अपने दोस्त का साथ दिया. वाइब्रेंट गुजरात का मोदी का नारा और CII को दरकिनार कर अदाणी का जोखिम जुआ खेल गया और जीता भी.

आप जिसे क्रोनी कैपिटलिज्म कहते हैं, वह तो कांग्रेस राज की देन था, लेकिन सत्ता, कॉर्पोरेट और मीडिया को मिलाकर जो खेल खेला गया, मोदी का नया भारत उसी की उपज है. इस नए भारत में एक तरफ अदाणी और अम्बानी जैसे चंद कॉरपोरेट्स के पैसों की ताकत है तो दूसरी ओर सत्ता और सत्ता के हाथों बिकी हुई संस्थाओं, एजेंसियों और समूचे सिस्टम की ताकत है, जो बुलडोज़र के रूप में दिखती है.

इन दोनों के बीच मैं और आप कहां हैं ? किस हैसियत में हैं ? ज़रा सोचिएगा, बहुत से मुगालते दूर हो जाएंगे. इन दोनों ताकतों के बीच यह देश, देश के मुद्दे, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र कहां है ? यह भी सोचिएगा. यह भी कि मीडिया क्यों अपना 75% वक़्त हिन्दू-मुसलमान करने में बिता रही है ? यह भी सोचने वाली बात है.

महंगाई की दर अप्रैल के 7.79% से मई में 7.04% पर ज़रूर आई है, लेकिन यह आधा सच है, पूरा सच यह है कि शहरों में महंगाई अप्रैल के 7.09% से मई में 7.08% ही रही, जबकि गांवों में महंगाई 8.38% से 7.01% पर आई है.

खाद्य वस्तुओं की महंगाई शहरों में अभी भी 8.2% है, जो अप्रैल में 8.09% थी. ईंधन और बिजली की दरों में महंगाई अप्रैल के 10.8% से मई में 9.54% हुई है. आवागमन और संचार के क्षेत्र में महंगाई अप्रैल में क्रमशः 10.8 और 11% से मई में 9.54% पर रही.

भारत में यह लगातार पांचवां महीना है, जब महंगाई की दर रिज़र्व बैंक की उच्च सीमा 6% से अधिक है. मोदीजी और उनके गुर्गों को विकास की बकवास अब बंद कर देनी चाहिए.

अदाणी ने 1990 में मुन्द्रा पोर्ट का लाइसेंस लिया था, उसके बाद से अदाणी का व्यापार लोन पर ही चल रहा है. क्रेडिट सुइस ने 2015 में हाउस ऑफ डेट- रिपोर्ट में आगाह किया था कि अदाणी भारत के उन 10 व्यापारिक घरानों में शामिल है, जिनका लोन जोखिम में है. फिर भी उसे धड़ल्ले से लोन मिल रहा है.

मोदी अपने दोस्त का पूरा साथ दे रहे हैं. मिसाल के लिए अदाणी ग्रीन, जिसका मुनाफ़ा जीरो है, लेकिन कंपनी के पास 863 मिलियन डॉलर का लोन है. आज विदेशी निवेशकों का सारा पैसा उन्हीं कंपनियों को जा रहा है, जो सत्ता से साठ-गांठ कर कानून और टैक्स नियमों को चकमा दे सकते हों.

झारखंड में अदाणी के गोड्डा ताप विद्युत संयंत्र को मोदी ने 2019 के आम चुनाव से पहले ही सेज़ में तब्दील कर दोस्ती निभाई थी. अब लोग भारत में सबसे महंगी बिजली का दाम चुकाएंगे और अदाणी टैक्स छूट के मजे लेगा.

खैर, क्या आप जानते हैं सत्ता और पूंजी के इस केंद्रीकरण का नतीज़ा क्या होने वाला है ? बेतहाशा महंगाई, लूट, शोषण और गुलामी. और जब आप इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएंगे तो बुलडोज़र आपके घर पर भी चलेगा. लाज़िम है हम भी देखेंगे.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

पापा, ये मुसलमान है या हिन्दू ?

Next Post

भागे भूत मिटै सब पीरा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

भागे भूत मिटै सब पीरा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

ब्राह्मणों से ज्यादा खतरनाक ब्राह्मणवादी शुद्र है

May 2, 2022

‘वो गुज़रा ज़माना’: नमक के खंभों पर टिका समय…!

July 7, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.