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CISF की 3094 पदों को समाप्त कर आखिर क्या संदेश दे रही है मोदी सरकार ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 6, 2022
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CISF की 3094 पदों को समाप्त कर आखिर क्या संदेश दे रही है मोदी सरकार ?
CISF की 3094 पदों को समाप्त कर आखिर क्या संदेश दे रही है मोदी सरकार ?

सीआईएसएफ की 3094 पदों को समाप्त कर दिया गया है और उसकी जगह 1924 निजी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है. वहीं, आरएसएस जैसे आतंकी संगठन के मुख्यालय की सुरक्षा सीआईएसएफ के हवाले कर दी गई है. इसके क्या मायने हैं ? गिरीश मालवीय लिखते हैं – जैसा आपको कुछ दिनो पहले आगाह किया था कि देश के तमाम एयरपोर्ट पर हमारी सुरक्षा में तैनात सीआइएसएफ की भर्ती बंद की जा रही है, वैसा ही हुआ है. आज मीडिया में खबर आई है कि मोदी सरकार ने 3,000 से ज्यादा सीआईएसएफ पदों को खत्म कर दिया है. अब उनकी जगह पर हवाईअड्डों पर निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएंगे. अभी कुल 1,924 निजी सुरक्षाकर्मी तैनाती की बात की जा रही है.

सीआईएसएफ 1.63 लाख कर्मियों वाला मजबूत राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा बल है. 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान अपहरण के बाद, जिसे अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था, सीआईएसएफ को एयरपोर्ट सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी. अब आप समझ ही सकते हैं कि यह कितनी महत्वपूर्ण संस्था है. अब देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआइएसएफ के बजाए अडानी जी के प्राईवेट गार्डों के हवाले की जा रही है.

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लेकिन निजी उद्योगपतियों को सीआईएसएफ से प्रॉब्लम क्या है ? ये भी समझिए, दरअसल निजीकरण के बाद सीआइएसएफ का बकाया उद्योगपतियों पर चढ़ गया है. 2019 में सीआईएसएफ का नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 788 करोड़ रुपये बकाया था.

उस वक्त सीआईएसएफ के डीजी राजेश रंजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी थीं कि इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा देने के एवज में सीआईएसएफ का 788 करोड़ रुपये बकाया है. वहीं एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़े हवाई अड्डों को सुरक्षा देने में सीआईएसएफ के 90 करोड़ रुपये बकाया है. डीजी राजेश रंजन ने यह भी जानकारी दी कि पीपीपी मॉडल वाले एयरपोर्ट को भी लगभग 880 करोड़ रुपये सीआईएसफ को देने हैं, वह भी अभी उन्होंने नहीं दिए हैं.

दरअसल घरेलू यात्री से हवाई सफर के लिए पैसेंजर सर्विस फीस 130 रुपए लिए जाते हैं. इसी फंड से सीआइएसएफ का खर्च चलता है अब सरकार नई व्यवस्था ला रही है. अब हवाई यात्रियों को पैसेंजर सर्विस फीस (पीएसएफ) की जगह एएसएफ यानि एविएशन सिक्योरिटी फीस का भुगतान करना होगा. पीएसएफ के मुकाबले एएसएफ की दर ज्यादा है. अब हवाई यात्रियों को पहले की अपेक्षा डेढ़ गुना शुल्क चुकाना पड़ रहा है, इसी वजह से हवाई टिकट भी महंगे हुए हैं.

इसका अच्छा प्रभाव यह हुआ है कि अब सीआइएसएफ को और अधिक आसानी से भूगतान किया जा सकता है लेकिन निजी उद्योगपति ऐसा क्यों चाहेंगे भला ? उन्हें तो हर चीज में प्रॉफिट चाहिए, लिहाजा वे अपने निजी गार्ड की नियुक्ति पर जोर दे रहे हैं ताकि उनसे भी इक चौथाई तनखा में चार गुना काम ले और एविएशन सिक्योरिटी फीस में भी पैसे बचा ले इसलिए सरकार पर दबाव डाल कर, सीआईएसएफ को एयरपोर्ट सुरक्षा से बाहर किया जा रहा है.

गिरीश मालवीय का विश्लेषण यहां समाप्त हो जाता है. लेकिन सवाल इससे भी बड़ा है. यह सवाल जुड़ जाता है देश की सुरक्षा से. गुजरात के अडानी पोर्ट को भी निजी सुरक्षाकर्मियों के हवाले किया गया था और उसका परिणाम निकलकर आया ड्रग्स तस्करों का सुरक्षित पनाहगार.

इस अडानी पोर्ट को उसके निजी सुरक्षाकर्मियों ने ड्रग्स आयात करने और देश के युवाओं को नशे की कुंड में झोंक देने का जो कारनामा किया है, अब उससे भी बड़ा कारनामा एयरपोर्ट को निजी सुरक्षाकर्मियों के हवाले करने से होगा. गुजरात के अडानी पोर्ट से हजारों टन मादक पदार्थ (हेरोइन, चरस वगैरह) की बरामदगी से आगे बढ़कर अब एयरपोर्ट से जल्दी और सुरक्षित निकालने के लिए निजी सुरक्षाकर्मियों का इस्तेमाल होगा.

अब इन एयरपोर्ट के माध्यम से बड़ी ही आसानी से तमाम अवैध कामों को अंजाम दिया जायेगा और देश के अंदर युवाओं को गलत रास्ते पर ले जाने के लिए मादक पदार्थों, अवैध हथियारों आदि का देश के अंदर बेरोकटोक आवाजाही को संचालित किया जायेगा.

इसमें इस तथ्य को ध्यान रखना जरूरी है कि सरकारी सीआईएसएफ के भ्रष्ट होने के बाद भी अनेकों ऐसे जवान निकल आते हैं जो देश के लिए सचमुच ईमानदारी से काम करते हैं. अडानी और उसके माफिया गिरोहों के लिए ऐसे जवान बेहद खतरनाक होते हैं, जबकि निजी सुरक्षाकर्मियों के अंदर देश का जज्बा बिल्कुल ही नहीं होता है. वह कम वेतनमान पर काम करने वाला केवल भाड़े का टट्टू होता है, जो अपने मालिक के इशारे पर कुछ भी करने को तैयार होता है, गलत और सही का फर्क किये वगैर.

ऐसे में पोर्ट (बंदरगाह) की तरह एयरपोर्ट को भी अडानी के निजी सुरक्षाकर्मियों के हवाले करना न केवल देश की सीमाओं को देश के दुश्मनों, माफियाओं के सामने खुला छोड़ देना है, बल्कि देश के भविष्य बनने जा रहे युवाओं को भी भ्रष्ट और नशे में डुबो देना जैसा खतरनाक योजना भी है.

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि चीन जैसे विशाल देश पर कब्जा करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने चीन के युवाओं को अफीमची बना कर उसे न केवल भ्रष्ट ही बना दिया था अपितु अपने लिए भाड़े का टट्टू भी तैयार कर लिया था जो अपने ही देश के लोगों के खिलाफ लड़ रहा था. इन अफीमचियों की भांति भारत के युवाओं को बनाने की मोदी सरकार की कबायद देश को बर्बाद कर देगा.

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