Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अब देश में दो ही काम बचे हैं – 1. चुनाव 2. त्यौहार

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 7, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
Ravindra Patwalरविन्द्र पटवाल

बचपन में मैं जापानी राष्ट्रवाद से बहुत हद तक प्रभावित था. यह बात हाई स्कूल, इंटर के दिनों की है. तब मैंने लाइब्रेरी से जापान के प्रमुख उद्योगपतियों की जीवनी निकालकर पढ़ी थी. उसमें अनेकों उद्योगपतियों के जीवन के बारे में और साथ ही जापान के मजदूर वर्ग के बारे में बताया गया था कि कैसे जापान में यदि जूता फैक्ट्री में हड़ताल हो जाती थी तो वह प्रोडक्शन बंद नहीं करते थे, बल्कि एक ही पैर के जूते का उत्पादन लगातार करते रहते थे. बहुत बाद में जाकर पता चला कि जापान तो अमेरिका का सैनिक अड्डा है, और यह सारी प्रगति जापान के चंद हिस्सों के ही नसीब में आई थी.

अब उम्र के पांचवें दशक में जब हूं तो लगातार चीनी राष्ट्रवाद आकर्षित करता है. चीन की विशिष्टता वहां पर कम्युनिस्ट पार्टी के शासन की है, जिसमें 140 करोड़ लोगों के विकास के लिए और साथ ही देश के समग्र विकास के लिए नीतियों का कुछ ऐसा समायोजन किया गया है कि अमेरिका और यूरोप तो छोड़िए हमारे जैसे भारत के वामपंथियों तक के लिए इस गुत्थी को समझ पाना आसान नहीं रहा और आज भी नहीं है. आज चीन न सिर्फ एक मजबूत देश है, बल्कि दुनिया की दूसरी महाशक्ति बन चुका है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

अर्थव्यवस्था के लिहाज से दुनिया की पहली अर्थव्यवस्था बनने के बेहद करीब है, लेकिन यह इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उसने अपने व्यापक आबादी को जितनी तेजी से गरीबी की रेखा से ऊपर उठा कर मध्यवर्ग की स्थिति में लाने का काम किया है, वह काम यूरोप और अमेरिका को करने में 300 साल लग गए.

भारत जो कि चीन से 2 साल पहले आजाद हुआ था, वह 50 से 80 के दशक में जरूर कुछ हद तक अमीरी और गरीबी की खाई को पाटने में सफल रहा, लेकिन नौकरशाही और पूंजीवाद के मजबूत होने के साथ वह एक ऐसी चकरघिन्नी में फंस गया कि वह सीधे औंधे मुंह नव उदारवादी व्यवस्था के चंगुल मे जा फंसा. आज हालत यह है कि यूरोप और अमेरिका के पूंजीपति तक भारत के क्रोनी कैपिटल के विकास को देखकर जल भुन रहे हैं.

हमारा देश आज दुनिया में सबसे तेजी से गैर-बराबरी को बढ़ाने में अग्रसर है, और इस लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला गरीब देश बन चुका है. या कह सकते हैं कि दुनिया के 70% प्रतिशत गरीब जल्द ही सिर्फ भारत में पाये जाएंगे. आपको कौन सा मॉडल पसंद है ? भूखे पेट रहकर ऐसे लोकतंत्र का जिसमें सिर्फ अब कहने भर को आजादी है – बोलने की, खाने की, पीने की, सोचने की. लेकिन सरकार के पास तमाम अधिकार हैं आपको बोलने, खाने-पीने, सोचने पर पाबंदी लगाकर जेल में ठूंसने और यूएपीए लगाकर बदनाम करने की.

2

मेक इन इंडिया के तहत एक भारतीय हार्ड वर्क करने वाली फार्मा कंपनी ने जाम्बिया में खांसी की ऐसी दवा निर्यात की कि उससे 66 बच्चे मर गये. WHO ने इसकी जानकारी दुनिया को दे दी है. भारत में जांच दल पहुंच रहा है. हार्ड वर्क पर यह जोर पिछले कुछ वर्षों से अधिक दिए जाने और पूंजीपति वर्ग को आर्मी से बड़ी देश सेवा का खिताब देने के बाद भारत में तो सभी को सांप सूंघ गया था. लेकिन दुनिया तो खामोश नहीं बैठने वाली.

सोचिये दो दिनों से देश में कितने हादसे हुए ? उत्तराखंड में दो भयानक हादसे, 40 से अधिक मौत. जगह-जगह दशहरे में लोग जल रहे, बह रहे. एक लाइन के ट्वीट में दुःख जता कर धूमधाम से अगले त्योहार के लिए तैयारी में जोर शोर से जुटे रहो. अब देश में दो ही काम बचे हैं. 1. चुनाव 2. त्यौहार. सारे देश को 8 साल से इवेंट मैनेजर ने इवेंट देखो और ताली थाली पीटते रहो, पर लगा रखा है.

पूरा उत्तराखंड इस इवेंट के चलते जगह-जगह से धंस गया है. लोगबाग खेत बेचकर किसी होटल-रिसोर्ट में चौकीदार, माली, खानसामा, दलाल बन चुके हैं. टैक्सी ड्राइवर की एक नई जमात है. इलाहाबाद के संगम की तरह यहां भी पंडित और मल्लाह वाली खेमेबाजी और ग्राहक बटोर अभियान और गिरोहों की भरमार होने वालीं है. यही किया है आज तक तो यही रोजगार मिलेगा. घटिया सामग्री, दवा घर में तो दहाड़ते हुए चलेगी, लेकिन दुनिया वालों का क्या करोगे हुजूर ?

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

सामाजिक क्रांति के खिलाफ गांधी प्रतिक्रांति के सबसे बड़े नेता थे ?

Next Post

मुसलमानों के हाथों पांच मुस्लिम वैज्ञानिकों का भाग्य

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

मुसलमानों के हाथों पांच मुस्लिम वैज्ञानिकों का भाग्य

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जल्द ही हिटलर की तरह ‘अन्तिम समाधान’ और ‘इवैक्युएशन’ का कॉल दिया जाएगा

January 6, 2020

यह सरकार है या डाकू

November 12, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.