Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मुख्यधारा के नाम पर संघ के सांस्कृतिक फासीवाद का पर्दाफाश करो !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 22, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
मुख्यधारा के नाम पर संघ के सांस्कृतिक फासीवाद का पर्दाफाश करो !
मुख्यधारा के नाम पर संघ के सांस्कृतिक फासीवाद का पर्दाफाश करो !
हिमांशु कुमार

इस वीडियो में जिस पहले युवक से मैं बात कर रहा हूं जब इसे गिरफ्तार किया गया था तो पुलिस इसकी हत्या करने के लिए ले जा रही थी. सोनी ने मुझसे फोन करके कहा कि आप तुरंत यह खबर फेसबुक पर फैला दीजिए ताकि पुलिस इसकी हत्या न कर पाए, मैंने ऐसा ही किया. इस तरह इस युवक की जान बच गई. बाकी लोगों की बातें भी सुनिए.

http://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2022/10/312268713_903080464191914_8908842951105504766_n.mp4

बस्तर के आदिवासी किस तरह बार-बार फर्जी इल्जाम पर जेल में डाल दिए जाते हैं. वे अदालत द्वारा बार-बार रिहा होते हैं, फिर जेल में डाल दिए जाते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आदिवासी डर जाएं और जब सरकार पूंजीपतियों के लिये इनकी जमीनें छीने तो यह लोग लड़ने की हिम्मत ना कर सकें. सभी मामले छत्तीसगढ़ के हैं. (इसके साथ ही संघी फासीवाद यह भी चाहता है कि -)

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

  • आदिवासियों को मुख्यधारा में लाना चाहिये.
  • मुसलमानों को मुख्यधारा में लाना चाहिये.
  • दलितों को मुख्यधारा में लाना चाहिये.
  • कश्मीरियों को मुख्यधारा में लाना चाहिये.
  • पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को मुख्यधारा में लाना चाहिये.
  • दक्षिण भारतीयों को मुख्यधारा में लाना चाहिये.

ऊपर लिखे गये ये सारे लोग मिला लिये जायें तो यह पूरा भारत हो गया. इसमें उत्तर भारत के कुछ अमीर मर्द शामिल नहीं हैं, जो सुबह खाकी नेकर पहन कर पार्क मे लाठी लेकर जमा होते हैं. यही मुट्ठीभर मर्द भारत की मुख्यधारा तय करते हैं. यही पतली-सी नाली ही मुख्यधारा घोषित कर दी गई है. तो सरकार चाहती है कि भारत के सभी लोगों को इस मुख्यधारा में शामिल किया जाये.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay

यानी मुसलमान औरतें अपने बच्चों को कृष्ण बनाती है तो वो मुख्यधारा में हो जाती हैं लेकिन जो मुसलमान सच्चर कमेटी की रिपोर्ट लागू करने की मांग करते हैं वो मुख्यधारा के मुसलमान नहीं हैं. जो आदिवासी सेना में शामिल होकर कश्मीर में मारा जाता है, वह आदिवासी तो मुख्यधारा का आदिवासी मान लिया जाता है लेकिन जो आदिवासी ज़मीन और जंगल को अपना कहता है और उस जंगल पर किसी कंपनी के कब्ज़े के विरोध की लड़ाई लड़ता है, वह आदिवासी मुख्यधारा में नहीं है.

तो भारत की मुख्यधारा का मतलब क्या है –

  • भारत की आर्थिक सत्ता जिन अमीर पूंजीपतियों की मुट्ठी में है, उनका समर्थन करना.
  • इन अमीरों के लिये देश के आदिवासियों, किसानों की ज़मीनों पर कब्ज़े का समर्थन करना.
  • इन अमीरों के लिये देश की बहुसंख्य आबादी यानी किसानों, मजदूरों, आदिवासियों, छात्रों, औरतों पर लाठी चलाने वाली, गोली चलाने वाली और जेलों में ठूंसने वाले सशस्त्र सैनिकों को समर्थन देना.

नागरिक होने का अर्थ यह भी मान लिया गया है कि – व्यक्ति सरकार के आदेशों का पालन करे. सरकार कहे कि अपना खेत अडानी को दे दो तो किसान अपने खेत अडानी को दे दें, तब वह अच्छे नागरिक मान लिये जायेंगे. और अगर किसान कहें कि आपने मेरी ज़मीन छीनने के लिये मेरी बेटी के गुप्तांगों में पत्थर क्यों भरे ?और किसान सरकार के खिलाफ अदालत मे मुकदमा दायर कर दे तो वह किसान अच्छा नागरिक नहीं माना जायेगा.

यानी संविधान मे दिये गये ‘हम भारत के लोग’ के अधिकार के अनुसार भारत मे रहने की कोशिश करोगे तो मारे जाओगे. पूंजीपतियों की जेब में पड़ी हुई सरकार की हां में हां मिलाओगे तो अच्छे भारतीय माने जाओगे. संविधान मे वर्णित ‘हम भारत के लोग’ बनने की कोशिश करोगे तो देशद्रोही घोषित कर दिये जाओगे.

मुख्यधारा का अर्थ है इन चन्द मुट्टी भर लोगों के धर्म को पूरे देश का धर्म मानना. इन चन्द मुट्टी भर लोगों की संस्कृति, घूंघट, पैर छूना आदि को भारतीय संस्कृति मानना. बस्तर की लड़कियां अपनी उम्र के लड़के लड़कियों के साथ रात रात भर घूमती हैं. शादियों में बिना माता पिता को साथ लिये नाचने जाती हैं. बस्तर की युवतियां मेले में रात भर नाचती हैं. सिर नहीं ढकतीं, पैर नहीं छूतीं, करवा चौथ का व्रत नहीं रखतीं. देश की ज़्यादातर औरतें करवा चौथ का नाम तक नहीं जानती लेकिन करवा चौथ को भारतीय संस्कृति मान लिया गया है, हद है.

भारत की कोई मुख्यधारा नहीं है. करवा चौथ, पैर छूना, घूंघट करना भारत की मुख्य संस्कृति नहीं है. लड़कियों का शाम से पहले घर के भीतर घुस जाना भी भारतीय संस्कृति नहीं है. भगवान को मानना भी भारतीय संस्कृति नहीं है. करोड़ों आदिवासी भगवान जैसे किसी जन्तु को नहीं जानते. साड़ी, बिंदी, राम, कृष्ण, पीपल की पूजा भी भारतीय संस्कृति नहीं है.

इस देश मे हज़ारों संस्कृतियां हैं. कोई मुख्यधारा नहीं है. मुख्यधारा के नाम पर संघ के सांस्कृतिक साम्राज्यवाद का पर्दाफाश करने की ज़रूरत है. हमें खुद को सरकार से डरने वाला नागरिक नहीं बनाना है. हम संविधान के वह जन्मदाता हैं जो संविधान को आत्मार्पित करते हैं यानी खुद ही संविधान निर्माता और संरक्षक है. हम भारत के लोग हैं.

Previous Post

हिंदू धर्म का कलंकित चेहरा – देवदासी, धर्म के नाम पर यौन शोषण

Next Post

ऊर्जा संकट ने यूरोप में मचाई हाहाकार, महंगाई और युद्ध (नाटो) का विरोध हुआ तेज़

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

ऊर्जा संकट ने यूरोप में मचाई हाहाकार, महंगाई और युद्ध (नाटो) का विरोध हुआ तेज़

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अच्छा हुआ वशिष्ठ बाबू चले गए

November 15, 2019

उत्तर कोरिया की आम जनता का जीवन स्तर अमेरिका के बराबर या कई मायनों में अमेरिका से भी उपर ही है

August 29, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.