Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

धर्मान्ध यानी चलता फिरता आत्मघाती बम

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 4, 2022
in लघुकथा
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

मैट्रो में सीट हथियाने में कामयाब एक सज्जन भरी भीड़ में अपने मोबाइल पर जोर-शोर से माता की भेंटे सुन रहे थे. जैसे कि ज्यादातर होता है उनका यह भजन किसी फिल्मी गीत की पैरोडी था, जिसे वे परम मुदित भाव से सुने जा रहे थे. उन्हें आस पास की जरा भी चिंता नही थी. विवश लोग इधर उधर देख रहे थे.

दो-एक मिनट बाद दूसरे किसी और सज्जन ने जेब से एक इयरफोन निकाला और विनम्रतापूर्वक उनकी तरफ बढ़ाया –

You might also like

एन्काउंटर

धिक्कार

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

‘क्या है…’ भक्ति में व्यवधान से विचलित वो बोले.

‘ये ले लीजिए, इसे लगा कर सुनिए अच्छा लगेगा.’

‘आपको क्या मैं कंगला दिखता हूं ? ये साठ हजार का फोन है. समझे तो क्या मैं मामूली इयरफोन नहीं खरीद सकता ?’ सज्जन ने बात को व्यक्तिगत समझ लिया था. शायद भावनाएं आहत हो गई थीं.

‘नहीं भाईसाहब, ये हम आपके लिए नहीं अपने लिए कह रहे हैं. यहां कई लोग हैं जो शायद अभी भजन ना सुनना चाह रहे हों.’ दूसरे सज्जन ने धीरे से निवेदन किया.

‘क्या जमाना आ गया है. लोग अब भगवान के भजन भी नहीं सुनना चाह रहे. बताओ भला तभी तो दुनिया डूब रही है. तुम्हें तो थैंक्यू होना चाहिए कि मैं अपने फोन से सबको सुबह-सुबह भजन सुना रहा हूं, उल्टे आप मेरी इंसल्ट कर रहे हो !’

‘ये हिंदुस्तान है कि पाकिस्तान ? बताओ भला ? यहां भजन और भेंटे नहीं बजेगीं तो कहां बजेगीं ? अब क्या हिंदू भजन भी नहीं सुने…? अभी नमाज होती तो कोई कुछ नहीं बोलता.’

हर जेनुइन भक्त की तरह वो सज्जन भी अब मसले को हिंदू-मुसलमान दिशा में मोड़ने में कामयाब हो रहे थे.

‘भाईसाहब जिसे भजन सुनने की इच्छा होगी वो सुन लेगा. मेरा जब मन होगा में भी सुन लूंगा. अभी तो आप मेहरबानी से इसे लगाकर सुनिए.’

‘नही लगाऊंगा, बिलकुल नहीं लगाऊंगा. मैं वाल्यूम और तेज कर देता हूं, देखता हूं क्या करते हैं आप ? साले- सेक्युलर, नक्सली कहीं के !’ कहते हुए उन्होंने वाल्यूम को और बढ़ाया पर वाल्यूम था कि पहले से ही फुल था, सो बदस्तूर बजता रहा.

पूरे वाल्यूम पर तीन भेंटें सुनकर वे अपना स्टेशन आने पर ही उतरे. डिब्बे में सन्नाटा छाया था. मुझे लगा ये मैट्रो नहीं यही हमारा देश हैं.

  • अशरत परमानंद

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

पलायन

Next Post

ये बादशा का हुक्म है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
लघुकथा

इतिहास तो आगे ही बढ़ता है…

by ROHIT SHARMA
January 5, 2026
लघुकथा

सवाल

by ROHIT SHARMA
August 16, 2025
Next Post

ये बादशा का हुक्म है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

निजी शिक्षण संस्थान बड़े बड़े आर्थिक और शैक्षणिक घोटालों का गढ़ तो नहीं ?

July 3, 2024

यह जोगी नहीं यह सत्ता के नशे में मदहोश हत्यारों की सरकार है

September 14, 2017

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.