Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

समाजवाद ही मानवता का भविष्य है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 6, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

समाजवाद ही मानवता का भविष्य है
समाजवाद ही मानवता का भविष्य है

मुनेश त्यागी

पूरी मानवता का अस्तित्व समाजवाद में ही है. समाजवाद लेता और बांटता नहीं है. यह जनता को जोड़ता है और संसाधनों को एकजुट करता है और उन्हें पूरे समाज और देश के लिए प्रयोग करता है। तोड़ने और ध्वस्त करने का विचार लुटेरी पूंजीवादी व्यवस्था का विचार रहा है। पूंजीवादी व्यवस्था पूरी दुनिया को लूटती है, पूरी दुनिया पर, उसके संसाधनों पर कब्जा करना चाहती है, उसे अपनी प्रभुत्व में लेना चाहती है और उसका मुख्य मकसद केवल और केवल मुनाफा कमाना और अपनी तिजोरियां भरना ही रह गया है, उसका जनकल्याण से कोसों दूर का भी कोई वास्ता नहीं है.

मार्क्स और एंगेल्स के वैज्ञानिक समाजवाद के विचारों को, 1917 में लेनिन के नेतृत्व में किसानों मजदूरों की सरकार ने रूस में मानव इतिहास में सबसे पहले धरती पर उतारा और मानव इतिहास में किसानों मजदूरों को पहली दफा अपना भाग्यविधाता बनाया. सोवियत यूनियन की समाजवादी व्यवस्था में राज्य को आर्थिक सामाजिक संगठन के रूप में धरती पर उतारा गया और इस व्यवस्था के द्वारा संसाधनों का जनता में न्यायपूर्ण वितरण किया गया. सारे उत्पादन को सामाजिक जीवन के लिए किया गया और सामाजिक जीवन ने मिलकर उत्पादन प्रणाली को विकसित किया.

राजनेता जो बोते हैं, वही काटते हैं. अगर वे जनता के बीच भाईचारा एकजुटता और सद्भाव बोयेंगे तो वहां अच्छाई उपजेगी. अगर वे विवाद और झगड़े बोयेंगे, तो वहां झंझट और विवाद बढ़ेंगे. इन दोनों विरोधी विचारों की व्यवस्थाओं को पूरी दुनिया में देखा जा सकता है. समाजवाद जहां जनता को एकजुट करता है, पूंजीवादी व्यवस्था वहीं दुनिया को, जनता को बांटती है, उसे अलग-थलग करती है, उसे जाति, धर्म और नस्ल के आधार पर बांटती है.

पूरी समाजवादी व्यवस्था ने दुनिया में एकजुटता का यही काम किया गया है. रूस, चीन, वियतनाम, क्यूबा, कोरिया और पूर्वी यूरोपियन देशों में उत्पादन, जनता की जरूरतों के हिसाब से किया गया. वहां जनता के अंदर आपसी भाईचारा कायम किया गया, सारी की सारी नीतियां जनता के कल्याण के लिए बनाई गईं. ‘सबको शिक्षा, सबको काम’ के नारे को अमलीजामा पहनाया गया. सब को भोजन, सबको कपड़ा, सबको घर, सबको काम, सब को अनिवार्य और आधुनिक शिक्षा दी गई, सबको आधुनिक और मुफ्त इलाज दिया गया. सारी जनता का सांस्कृतिक स्तर सुधारा गया, सबको लिखना, पढ़ना, नाच गाना और मनोरंजन उपलब्ध कराया गया.

हजारों साल पुराने जुल्मों सितम, अन्याय, अभाव, वंचना, पिछड़ेपन और अभावग्रस्तता को खत्म कर दिया गया. कुछ लोगों की बेहतरी के स्थान पर, पूरे समाज की कल्याण की नीतियां, उत्पादन और वितरण किया गया, जिससे कि समाज दनादन आगे बढ़ते चले गए. अज्ञानता, अंधविश्वास, धर्मांधता और पाखंडों का साम्राज्य धराशाई करके, ज्ञान-विज्ञान, विवेक, खोज, अन्वेषण और विवेक का जीता जागता साम्राज्य कायम किया गया और देखते ही देखते समाजवादी व्यवस्था और उसकी आंखें खोलने वाली उपलब्धियां, पूरी दुनिया की सिरमोर बन बैठी.

समाजवाद की अद्भुत उपलब्धियों के बाद पूंजीवादी लुटेरी व्यवस्था बौखला गई. उनके वैश्विक लूट, वैश्विक प्रभुत्व और कब्जाने की नीतियों और सोच की नींव हिल गई है. उन्होंने समाजवादी व्यवस्था को अपना जानी दुश्मन मान लिया और समाजवाद की कार्यप्रणाली में खलल डालना शुरू कर दिया और समाजवादी दुनिया के खिलाफ, इन पूंजीवादी लुटेरों ने जनता की लुटेरी पूंजीवादी ताकतों को एकजुट करना शुरू कर दिया और वे एक-एक करके जनता के दुश्मन निजामों का समर्थन करने लगे और उन्हें स्थापित करने लगे.

समाजवादी दुनिया के खिलाफ, अमेरिका और यूरोप के लुटेरे, साम्राज्यवादी और जनविरोधी निजामों को एकजुट करके, अमेरिका ने नाटो को बरकरार रखा. सारी संधियों और नैतिकता को तोड़ मरोड़ कर, नाटो के तमाम देश रूस के संसाधनों को लूटने और रूस को तोड़ने और उसके टुकड़े-टुकड़े करने के लिए एकजुट हो रहे हैं और अब रूस यूक्रेन युद्ध में तमाम नाटो के देश, यूक्रेन की आर्थिक और सैन्य मदद कर रहे हैं.

उधर एशिया में इन साम्राज्यवादी लुटेरी ताकतों द्वारा, समाजवादी नीतियों को लागू करने वाले चीन (पूर्व समाजवादी – सं.) को घेरने की तमाम चालें चली जा रही हैं. अमेरिका चीन के विरोधियों को उकसाने की पूरी कोशिश कर रहा है. उसके खिलाफ लामबंदी कर रहा है, तरह-तरह के गुट बना रहा है, उसके खिलाफ लोगों को भड़काया जा रहा है. ये लुटेरे चीन की उपलब्धियों और महाशक्ति बनने से लगातार परेशान हो रहे हैं.

इस प्रकार आज हम देख रहे हैं कि लुटेरी पूंजीवादी व्यवस्था के पास दुनिया को देने के लिए कुछ भी नहीं है. विकास, चुनाव, डेमोक्रेसी, स्वतंत्रता, जन कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य की जन कल्याण की नीतियों को उन्होंने छोड़ दिया है. उनके लिए पूरी दुनिया से मुनाफा कमाना और पूरी दुनिया के संसाधनों को लूटना और उन्हें अपने कब्जे में करना है और दूसरे देशों में हस्तक्षेप करके वहां की सरकारों को अस्थिर करना और उन देशों पर अपना कब्जा करना ही इनका एक मात्र काम और उद्देश्य रह गया है. अब इन सब मामलों को लेकर वे सब पूरी दुनिया के सामने नंगे हो गए हैं और उनकी लुटेरी नीतियों ने, पूरी दुनिया की जनता के सामने, उनकी पोल खोल दी है. अपनी पोल खुलने के कारण दुनिया की तमाम लुटेरी साम्राज्यवादी ताकतें बौखला गई है.

समाजवादी व्यवस्था को प्रत्येक देश और काल की परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जा सकता है, ढाला जा सकता है. पिछले वर्षों में समाजवाद के निर्माण में और उसकी नीतियों को लागू करने में जो थोड़ी बहुत खामियां और कमियां आ गई थीं, उन्हें दुनिया की सारी समाजवादी ताकतें मिलकर दूर करने की कोशिश कर रही हैं. आज समाजवादी मिशन को आगे बढ़ाना ही सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है. आज हम देख रहे हैं और समझ रहे हैं कि समाजवादी व्यवस्था, संस्कृति, सोच और शासन प्रशासन से ही दुनिया की जनता की समस्याओं को खत्म किया जा सकता है.

आज समाजवाद ही दुनिया और मानवता का भविष्य और आशा बन रह गई है. समाजवादी व्यवस्था ही दुनिया को न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, विकास, समता, समानता, शांति अमनचैन और भाईचारा प्रदान कर सकती है. आओ, दुनिया के भविष्य यानी समाजवाद को ही अपनी कथनी और करनी बनाएं. समाजवाद ही दुनिया की आशा और मानवता का भविष्य है.

Read Also –

मार्क्स की 200वीं जयंती के अवसर पर
सोवियत किताबों का उपकार भूल जाना अनैतिक होगा
चीन : एक जर्जर देश के कायापलट की अभूतपूर्व कथा
चीन एक नयी सामाजिक-साम्राज्यवादी शक्ति है ! 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

गरीबी की कोख से जन्मी मजबूरी इंसानियत का भी भक्षण कर लेती है

Next Post

शहर के आख्यान की तलाश में

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

शहर के आख्यान की तलाश में

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

क्या ओडिशा सरकार ने वेदांता के प्रोजेक्ट विस्तार के लिए जनसुनवाईयों को जल्दबाज़ी में निपटाया ?

October 18, 2020

बुलडोजर पर झूमने वालों से कह दो कि बुलडोजर सिर्फ ध्वंस करता है

April 20, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.