Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कोरोना वैक्सीन के नाम पर भारतवासियों को गिनी पिग बनाया मोदी सरकार ने

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 17, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
girish malviyaगिरीश मालवीय

सदियों पहले गिरिधर कविराय कह गए हैं – बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछिताय. काम बिगारै आपनो, जग में होत हंसाय. अब पता चला है कि कोरोना वैक्सीन के बारे में भी बिना विचारे बहुत से काम हुए है जो आज लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं.

कल ‘वायर’ ने स्वास्थ्य मामलों से जुड़ी पत्रकार बंजोत कौर की एक रिपोर्ट पब्लिश की है, जो बताती हैं कि भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के लिए किए गए क्लिनिकल ट्रायल के तीन चरणों में कई तरह की अनियमितताएं हुईं है.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

कृष्ण मोहन, जो भारत बायोटेक के निदेशकों में से एक हैं, उन्होंने बताया कि स्वदेशी टीका विकसित करने के लिए ‘राजनीतिक दबाव’ के कारण उन्हें कुछ प्रक्रियाओं को छोड़ना पड़ा. परीक्षण प्रक्रिया में उनके संशोधन नियामक द्वारा ‘पुनरीक्षण’ किए गए थे और कि टीके के क्लिनिकल परीक्षण ‘गति’ द्वारा निर्धारित किए गए थे.

इस रिपोर्ट का अर्थ यही निकाला जा सकता है कि स्वदेशी वैक्सीन बनाने की इतनी जल्दी मचाई गई कि भारत की तत्कालीन और वर्तमान मोदी सरकार ने पूरी ट्रायल प्रक्रिया को ताक पर रख दिया जबकि इस तरह के टीकों के ट्रायल बरसों चलते हैं और पूरी प्रभावकारिता टेस्ट किए जाने पर ही एप्रूव किए जाते हैं.

लेकिन नही ! यहां तो मोदी जी को स्वदेशी वैक्सीन बनाने का श्रेय लूटना था इसलिए वैक्सीन कितनी खतरनाक साबित हो सकती हैं, ये जाने बिना आपको हमको प्रयोगशाला के चूहे यानी गिनी पिग समझ कर वैक्सीन ठोके गए, जिसका नतीजा हम देख ही रहे हैं.

जैसा कि आप जानते ही हैं भारत में दो वैक्सीन को मान्यता दी गई थी और यही देश की 99 प्रतिशत आबादी को लगाई गई कोवीशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने मिलकर बनाया था. इसे भारत में पुणे के अदार पूनावाला की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) वहीं, कोवैक्सिन स्वदेशी वैक्सीन को भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के साथ मिलकर बनाया था.

आपको यह भी याद होगा है कि दोनों वैक्सीन निर्माता कंपनियां ट्रायल डेटा पर आपस में झगड़ पड़ी थी. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के CEO अदार पूनावाला ने फाइजर, मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोवीशील्ड के अलावा बाकी सभी वैक्सीन को पानी की तरह बताया, तो उसके जवाब में भारत बायोटेक के MD कृष्णा एल्ला ने कहा कि एस्ट्राजेनेका ने ट्रायल के दौरान वॉलंटियर्स को वैक्सीन के साथ पैरासिटामॉल दी थी, ताकि वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स (adverse reaction) को दबाया जा सके. यानी दोनों के ही ट्रायल में कई अनियमितताएं थी.

बनजोत जी की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत बायोटेक कंपनी ने चरण 2 परीक्षणों के परिणामों के बिना चरण 3 परीक्षणों को शुरू कर दिया था. भारत बायोटेक के मोहन ने एसटीएटी में स्वीकार किया कि कंपनी ने अकेले जानवरों के अध्ययन के आधार पर तीसरे चरण का परीक्षण शुरू किया था. मोहन ने एसटीएटी को यह भी बताया कि कंपनी ने ‘नियामकों से बार-बार पुशबैक’ के बाद ये फैसले किए थे.

इसके अलावा प्लेसिबो इफेक्ट जो कि किसी भी टीके के ट्रायल में बहुत महत्त्वपूर्ण और निर्णायक प्रोसेस माना जाता है, उसे भी कोवेक्सिन ट्रायल प्रक्रिया में इग्नोर किया गया ( रिपोर्ट में विस्तार से लिखा है, लिंक पर क्लिक कर पढ़ें).

इसके अलावा 2020 के अंत में भोपाल के एक अस्पताल में, जो उन साइटों में से एक था जहां कोवेक्सीन के चरण 3 का परीक्षण किया गया था, Covaxin प्राप्त करने के बाद एक परीक्षण प्रतिभागी की कथित तौर पर मृत्यु हो गई. सरकार ने एक जांच की और बाद में आरोपों को खारिज कर दिया लेकिन इसके निष्कर्षों को कभी सार्वजनिक नहीं किया गया.

इन्ही सब कारणों को देखते हुए WHO ने कोविक्सिन को लंबे समय तक मंजूरी नहीं दी जबकि अन्य देशों की बनाई गई वैक्सीन को उन्होंने तुरंत मंजूरी दे दी थी. यानी मोदी सरकार की इस तथाकथित उपलब्धि की ‘जग में होत हंसाय’ हो चुकी है.

जब 2020 में भारत में वेक्सिन को लेकर जल्दबाजी मचाई जा रही थी, तब ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया वीजी सोमानी ने कहा था कि ‘हम किसी भी ऐसी वैक्सीन को मंजूरी नहीं देंगे जिसकी सुरक्षा को लेकर थोड़ी भी चिंता होगी.’ लेकिन 2022 में हम जान रहे हैं कि ये सब सिर्फ ऊपर-ऊपर कहने की बातें थी और अब हम गिनी पिग बन चुके हैं और हमारे साथ क्या क्या हो रहा है ये बताने की जरूरत नहीं है !

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

कैलाश मनहर : राजस्थान की हिन्दी कविता में प्रतिरोध के एक सशक्त कवि

Next Post

वेद-वेदांत के जरिए इस देश की रग-रग में शोषण और विभाजन भरा हुआ है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

वेद-वेदांत के जरिए इस देश की रग-रग में शोषण और विभाजन भरा हुआ है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

धार्मिक उत्सव : लोकतंत्र के मुखौटे में फासिज्म का हिंसक चेहरा

July 25, 2022

मोदी-शाह कामयाब करना चाहता है सिर्फ आरएसएस का एजेंडा

December 17, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.