Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रायरे : अच्छी और अर्थपूर्ण शिक्षा दिलाने वाली अभिनव प्रणाली के प्रणेता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 21, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
पाउलो फ्रायरे : अच्छी और अर्थपूर्ण शिक्षा दिलाने वाली अभिनव प्रणाली के प्रणेता
पाउलो फ्रायरे : अच्छी और अर्थपूर्ण शिक्षा दिलाने वाली अभिनव प्रणाली के प्रणेता

1930 के शुरुआती सालों में में दुनिया भयानक मंदी के दौर में थी. ये साल पाउलो फ्रायरे के स्कूल जाने के दिन थे, जिन्हें याद करते हुए उन्होंने अपने बायोग्राफर को बताया था – ‘भूख की वजह से मेरी समझ में कुछ नहीं आता था. मैं बुद्धू नहीं था अलबत्ता मेरे भीतर दिलचस्पी की कोई कमी नहीं थी. मेरे परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति मुझे इस बात की इजाजत नहीं देती थी कि मैं अच्छी शिक्षा हासिल कर सकूं. अनुभवों ने मुझे सिखा दिया था कि सामाजिक स्थिति और ज्ञानार्जन के बीच क्या सम्बन्ध होता है.’

अपने शुरुआती बचपन में सहपाठियों से चार क्लास पिछड़ गए पाउलो ने मोहल्ले के गरीब बच्चों के साथ चीथड़ों से बनी फुटबॉल खेलते हुए समय गुजारा और जीवन के सबसे जरूरी सबक सीखे. उन्होंने तभी तय कर लिया था कि वे बड़े होकर गरीबों को शिक्षा दिलाने की दिशा में काम करेंगे.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

19 सितम्बर 1921 को ब्राजील के पेर्नामबूको में जन्मे पाउलो फ्रायरे जब हाईस्कूल में पहुंचे तो उन्हें एक स्कूल में ग्रामर टीचर की नौकरी मिल गयी. 23 की उम्र में उन्होंने एक प्राइमरी स्कूल टीचर एल्जा माइया कोस्टा डी ओलिविएरा से शादी की. इस विवाह से उनके पांच बच्चे हुए जिनमें से तीन बाद में शिक्षक बने. एल्जा ने अपने पति को लगातार उत्साहित किया कि वे अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करें.

1946 में उन्हें कामगारों और उनके परिवारों की मदद के लिए स्थापित की गयी एक संस्था का शिक्षा निदेशक बनाया गया. इस पद पर काम करते हुए उन्होंने देखा कि उनके देश की कुलीन शिक्षा पद्धति और निर्धन लोगों के जीवन की वास्तविकता के बीच कैसी गहरी खाई है. यहीं से उन्होंने अपने असल काम को शुरू किया और समाज के सबसे वंचित तबके को अच्छी और अर्थपूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए एक अभिनव प्रणाली का विकास किया.

पाउलो फ्रायरे की शिक्षा पद्धति में बच्चा शब्द के साथ-साथ संसार का भी संधान करता है. उसे अपनी ऐतिहासिक और सामाजिक स्थिति का आकलन करने और उस पर सवाल उठा सकने लायक बनाया जाता है. रट्टा लगाने वाली पढ़ाई को छोड़ अध्यापक और छात्र के बीच एक डायलॉग स्थापित करना इस पद्धति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था. इस डायलॉग से दोनों को लाभ पहुंचता और एक दूसरे की बेहतर समझ भी हासिल होती. बच्चों से बेहतर संवाद बनाने के लिए अध्यापक को लोगों-परिवारों के बीच जाकर उनसे सम्बन्ध बनाने होते और अपनी कक्षाओं के लिए बेहतर कच्चा माल इकठ्ठा करना होता.

1962 में फ्रायरे ने इस पद्धति के पहले प्रयोग 300 खेत मजदूरों के साथ किए. पेर्नामबूको के खेतों में पेड़ों के नीचे क्लास चलाई गईं और केवल 45 दिनों में उन्हें लिखना-पढ़ना सिखा दिया गया. कुछ समय बाद सरकार को इस प्रयोग की जानकारी मिली तो उसने सारे ब्राजील में इस तरह के स्टडी सर्कल बनाने का फैसला किया.

इस काम के अंजाम तक पहुंचने से पहले ही 1964 में ब्राजील में सेना ने तख्तापलट कर दिया. नई सरकार ने पाउलो फ्रायरे को राष्ट्रद्रोही करार दिया और जेल में बंद कर दिया. 70 दिन जेल में रहने के बाद उन्हें देश से बाहर खदेड़ दिया गया. उन्हें बोलिविया जाना पड़ा जहां वे पांच साल रहे. यहीं उन्होंने अपनी पहली किताब ‘एजूकेशन एज द प्रैक्टिस ऑफ़ फ्रीडम’ प्रकाशित की. इस किताब के प्रकाशन ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाई और वे हार्वर्ड में विजिटिंग प्रोफ़ेसर के रूप में बुलाये गए. उनके अपने मुल्क ब्राजील में यह किताब अगले सात साल तक बैन रही.

फिर उन्हें जेनेवा बुलाया गया, जहां उन्होंने विशेष शिक्षा सलाहकार के तौर पर दस साल काम किया. इन सालों में उन्होंने दुनिया भर में शिक्षण-सुधारों को लागू करने के बारे में काम किया और जगह-जगह भाषण दिए.

15 साल के देश निकाले के बाद ब्राजील की सरकार को उनकी याद आई और उन्हें अपने वतन लौटने की इजाजत मिल गयी. अगले साल यानी 1980 में वे वापस ब्राजील लौटे. 1988 में वर्कर्स पार्टी की सरकार बनी तो पाउलो फ्रेयरे को साओ पाओलो का शिक्षा मंत्री बनाया गया. उनके सम्मान में 1991 में सरकार ने पाउलो फ्रेयरे इन्स्टीट्यूट की स्थापना की. आज 18 देशों में इस इंस्टीट्यूट की 21 शाखाएं काम कर रही हैं.

2 मई 1997 को उनका देहांत हुआ. उनकी मौत के बारह साल बाद 2009 में ब्राजील की सरकार ने पाउलो फ्रेयरे से उनके साथ हुए अन्याय के लिए सार्वजनिक माफी मांगी. एक मर चुका आदमी आपकी माफी स्वीकार नहीं कर सकता. ब्राजील में आज पाउलो फ्रायरे के नाम पर स्थापित कुल 340 स्कूल उनकी बनाई शिक्षा पद्धति पर चलाये जाते हैं. प्रेम, सहानुभूति, उम्मीद और पाउलो फ्रायरे – ब्राजील के निर्धनों-कामगारों के बीच इन चार संज्ञाओं को पर्यायवाची शब्द समझा जाता है.

  • अशोक पांडे

Read Also –

अब हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई : भाषा के नीम हकीम और मेडिकल शिक्षा
शिक्षक दिवस पर विशेष : शिक्षा, शिक्षक और लोकतंत्र की चुनौतियां
भारत में ब्राह्मणवादी शिक्षा प्रणाली को खत्म कर आधुनिक शिक्षा प्रणाली का नींव रख शूद्रों, अछूतों, महिलाओं को शिक्षा से परिचय कराने वाले लार्ड मैकाले
नई शिक्षा नीति के राजमार्ग पर चलकर ‘विश्वगुरु’ होने की मंजिल 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

श्रद्धा हत्या सन्दर्भ : लिव इन रिलेशन यानी, मौजूदा सामाजिक कमिटमेंट से मुक्ति का प्रयास

Next Post

यही है भारत का गौरवशाली इतिहास !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

यही है भारत का गौरवशाली इतिहास !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

दूसरा कौन ?

May 21, 2024

दक्षिण अफ़्रीका में हिंसा और लूट-पाट की घटनाएं : भूख-बेरोज़गारी से त्रस्त ग़रीबों के ग़ुस्से का इज़हार

August 26, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

March 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

March 7, 2026

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.