Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

EVM विवाद की इतिहास यात्रा – रविश कुमार

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 20, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

 

2009 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी आडवाणी जी EVM के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. उसके बाद आडवाणी धीरे-धीरे पार्टी में साइडलाइन हो गए.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

संघ के तथाकथित बुद्धिजीवी इलेक्शन ऐनालिस्ट जीवीएल नरसिम्हा राव ने 2010 में EVM के प्रयोग के विरोध में एक पुस्तक लिखी, जिसका विमोचन तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गड़करी ने किया. उसके बाद नितिन गडकरी को दूसरा कार्यकाल नहीं मिला बल्कि सही शब्दों में लिखूं तो संघ की पूरी कोशिश के बाद भी नहीं मिला. कारण कुछ और पेश किए गए.

आम आदमी पार्टी ने 2017 में पंजाब चुनाव के बाद EVM पर सवाल उठाए. आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने विधान सभा में सत्र के दौरान EVM को हेक करके दिखाया. सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि किसी भी चुनाव से दो घंटा पहले आप हमें सारी EVM मशीन दे दो और विधान सभा तो दूर की बात है, कोई बूथ जीतकर दिखा दो. उसके बाद पता नहीं क्या हुआ, सौरभ भारद्वाज आज तक EVM के विरोध में नहीं बोले.

इसके बाद चुनाव आयोग को एक हेकाथॉन करवाने का ड्रामा करना पड़ा, जिसमें उन्होंने सभी को इन्वाइट किया कि कोई भी EVM को हेक करके दिखाए. चुनाव आयोग ने शर्त बड़ी शानदार रखी थी – आपको EVM हेक करनी है लेकिन उसे छुए बिना. अब आप ही बताइए EVM को कोई आंख के इशारे से कैसे सेट करे ? इस शर्त के चलते कोई उसे हेक नहीं कर पाया और EVM पाक साफ़ घोषित हो गयी.

सुप्रीम कोर्ट ने हर EVM में VVPAT लगवाने का आदेश दे दिया. अब VVPAT से पर्ची तो निकलती है लेकिन गिनी नहीं जाती थी. फिर कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट गए तो सुप्रीम कोर्ट ने हर विधान सभा में रैंडम तरीक़े से कम से कम पांच बूथ की VVPAT पर्चियों का EVM से मिलान का आदेश दिया, जिसका किसी भी चुनाव की गिनती में या तो मिलान नहीं होता या फिर मिलान अंत में होता है, तब सरकार बन जाती है और प्रत्याशी अधिकारियों के दबाव में आ जाता है.

2019 के चुनाव में 370 से ज़्यादा लोकसभा सीट पर पड़े गए वोट और गिने गए वोट मैच नहीं हुए. हंगामा हुआ. चुनाव आयोग ने अपने साइट से पड़े गए वोट की इन्फ़र्मेशन ही हटा दी. बदायूं लोकसभा सीट पर पड़े गए वोट और गिने गए वोट में 25 हज़ार से ज़्यादा वोट का अंतर था. सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव इसके ख़िलाफ़ हाई कोर्ट गए लेकिन उसके बाद इस केस में क्या हुआ, ना तो किसी को पता है और ना ही धर्मेंद्र यादव ने कभी इसका कोई ज़िक्र किया है.

अब EVM का सबसे क्लासिक केस बताता हूं. अभी कुछ महीने पहले ही महाराष्ट्र विधान सभा के स्पीकर और कांग्रेसी नेता नाना पटोले ने विधान सभा के पटल पर EVM के सम्बंध में एक बिल रखा, जिसमें पास होना था कि महाराष्ट्र के किसी भी चुनाव में EVM का प्रयोग नहीं होगा. बिल पास होने से पहले अगले ही दिन अचानक नाना पटोले को कांग्रेस ने महाराष्ट्र का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया और उन्होंने स्पीकर के पद से इस्तीफ़ा दे दिय. बिल कहां ग़ायब हो गया, यह आज तक नहीं पता चला.

लगभग हर राजनीतिक दल मानता है कि EVM के चलते निष्पक्ष चुनाव नहीं होते, फिर भी कोई भी राजनीतिक दल इसका खुलकर विरोध नहीं करता. जब आपको EVM पर भरोसा नहीं है, जब आपको लगातार EVM की निगरानी करनी पड़ती है, जब आपको हर चुनाव में EVM के ख़राब होने और कोई भी बटन दबाने पर कमल को वोट जाने की शिकायत मिलती है, जब हर चुनाव में EVM के बक्से कभी भाजपा नेता के होटल में, कभी भाजपा नेता की गाड़ी में, कभी ट्रक में मिलते हैं तो फिर आप लोग EVM से चुनाव लड़ने को तैयार क्यों होते हो ? ऐसा कौन-सा दबाव है जो आप EVM का पूरी तरह विरोध नहीं कर पाते हो ?

वो कौन है जिसके दबाव में हम उस प्रणाली को अपनाए हुए हैं जो अमेरिका, फ़्रान्स, जापान जैसे विकसित देश तक नहीं अपनाते ? किसका दबाव है ? इतना ही बता दो कि दबाव देश के भीतर से ही किसी का है या कोई देश के बाहर बैठा हुआ भी सब कुछ मैनिज कर रहा है ?

नोटः बंगाल में ममता जीते और पंजाब में आप जीते और यूपी में सपा जीते तब भी मैं EVM पर यक़ीन नहीं करता. इसका बीजेपी की हार या जीत से कोई संबंध नहीं है. चुनाव में उसी चीज का इस्तेमाल होना चाहिए जो सब समझ सकें, जिसे समझने के लिए इंजीनियर होना ज़रूरी न हो !

  • रविश कुमार

ईवीएम सिस्टम को बॉयोमीट्रिक वोटिंग में समय रहते रिप्लेस कीजिये
ईवीएम का विरोध देश की जनता के जनादेश का अनादर है ?
हवाना सिंड्रोम भी होता है लेकिन ईवीएम में छेड़छाड़ नहीं हो सकती
ईवीएम और हत्याओं के सहारे कॉरपोरेट घरानों की कठपुतली बनी देश का लोकतंत्र
“बिन ईवीएम सब सून !”

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

‘The Last War’ : भारत 10 दिनों में चीन से युद्ध हार सकता है

Next Post

पर्यायवाची

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

पर्यायवाची

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

खतरे में लोकतंत्र और उसकी प्रतिष्ठा

May 12, 2018

Karnataka State Shops and Establishments Act : यानी काम के 14 घंटे !

July 24, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.