Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कुरआन और प्रिंटिंग प्रेस : शिक्षा एवं कला में मुसलमान 500 साल पीछे

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 26, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

दुनिया का पहला प्रिंटेड कुरआन 1537 में इटली के शहर वीनस के एक प्रिंटिंग प्रेस में छापा गया. दूसरा कुरआन 1694 में जर्मनी के शहर हैंम्बर्ग में और तीसरा कुरआन रूस में छापा गया. ये वो वक़्त था जब मुस्लिम देश या मुस्लिम समुदाय में किसी भी तरह का प्रिंटिंग प्रेस लगाना या कोई प्रिंटेड किताब रखना हराम और सख़्त जुर्म था.

सुल्तान बायज़ीद दोम नामी एक ख़लीफा ने 1485 में उलेमाओं की मदद से प्रिंटिंग प्रेस और उससे छपने वाली वस्तुओं को हराम क़रार दे कर मुस्लिम देशों में बैन कर दिया. उसके बाद 1515 में सुल्तान सलीम नामी एक बादशाह ने उससे भी दो क़दम आगे बढ़कर ये फरमान जारी किया कि ‘सल्तनत उस्मानिया में किसी भी नागरिक के पास कोई प्रिंटेड किताब पकड़ी गई तो उसे क़त्ल कर दिया जाएगा.’ ये वो वक़्त था जब यूरोप में दो करोड़ से ज्यादा प्रिंटेड किताबें बेची जा चुकी थी.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

उससे पहले 1492 में सल्तनत उस्मानिया के रियासत एंदोलसिया (एंदोलस स्पेन) के कुछ यहूदियों ने सुल्तान से निवेदन किया कि उनके पास अपनी प्रिंटिंग प्रेस है और वह उन्हें इससे फायदा उठाने की इजाज़त दें. सुल्तान ने इस शर्त पर इजाज़त दी कि तुम किसी भी मुसलमान को कोई किताब नहीं बेचोगे. तो इस तरह स्पेन के यहूदियों और ईसाइयों ने अपने अपने प्राइवेट प्रेस से लाखों किताबें छापीं और उससे मुसलमानों को छोड़कर सभी क़ौमों को फायदा पहुंचा.

ये वो वक़्त था जब यूरोप और नये-नये अमेरिका में शिक्षा एवं कला अंगड़ाईयां लेकर बेदार हो रही थी और मुस्लिम देश कोताही और जिहालत का चादर ओढ़कर सोने की तैयारी कर रही थी. इसी किताबी क्रांति से हजारों डाक्टर, शिक्षक, दार्शनिक और वैज्ञानिक पैदा हुए. हालांकि सातवीं सदी से तेरहवीं सदी तक सारा यूरोप जिहालत की नींद सो रहा था और शिक्षा एवं कला का ख़ज़ाना मुसलमानों के पास था.

पहली सलीबी जंग जो कि ग्यारहवीं सदी में लड़ी गई, जिसमें ईसाइयों ने यरुशलम पर क़ब्जा किया और बहुत सारे धन दौलत के साथ काग़ज़ भी उनके हाथ लगा. इसी काग़ज़ से बाद में उन्होंने एक बहुत बड़ी क्रांति ला दी.

सत्रहवीं सदी तक मुसलमानों पर ये जहालत पूरी तरह बरकरार रहा. अंततः 1720 में एक नव मुस्लिम इब्राहिम अलमुक़ातिर (जो कुछ महीने पहले ही ईसाई से मुसलमान हुआ था) ने उस वक़्त के मुफ्ती आजम के पास एक अर्जी लेकर गया कि 300 साल हो गये यूरोप में प्रिंटिंग प्रेस को. खुदा के लिये अब तो जाग जाओ और मुस्लिम देशों में भी इसकी इजाज़त दे दो.

फिर उसने अपने हाथ से लिखी हुई कई सौ पृष्ठ की एक किताब मुफ्ती आजम को दी जो प्रिंटिंग प्रेस के बारे में थी. किताब को पढ़कर मुफ्ती साहब इम्प्रेस हो गये लेकिन उन्होंने तीन कड़ी शर्तों के साथ उसकी इजाज़त दी –

  1. कोई भी अरबी की किताब प्रिंट नहीं होगी.
  2. कोई इस्लामी किताब प्रिंट नहीं होगी.
  3. हर छपने वाली किताब हुकूमत से स्वीकृत होगी.

इस तरह सल्तनत उस्मानिया में लूली लंगड़ी प्रिंटिंग प्रेस आई लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. यूरोप शिक्षा एवं कला में मुसलमानों से 300 साल आगे निकल चुका था और अब ये फासला 500 साल तक पहुंच चुका है.

  • मोहम्मद शहजाद कुरैशी

Read Also –

मुसलमानों के हाथों पांच मुस्लिम वैज्ञानिकों का भाग्य
दुनिया में मुसलमानों के पतन के कारण
सेकुलर ‘गिरोह’ की हार और मुसलमानों की कट्टरता
सिवाय “हरामखोरी” के मुसलमानों ने पिछले एक हज़ार साल में कुछ नहीं किया

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

चुनाव बहिष्कार ही एकमात्र रास्ता : रामपुर उपचुनाव के खौफनाक संकेत

Next Post

एनडीटीवी पर अडानी का कब्जा : सूचना के स्रोतों पर अधिकाधिक कब्जा करने की जंग

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

एनडीटीवी पर अडानी का कब्जा : सूचना के स्रोतों पर अधिकाधिक कब्जा करने की जंग

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

राहुल गांधी की बात को हवा में मत उड़ाइये वरना…

November 6, 2025

साध्वी प्रज्ञा की दरकार किसे थी ?

June 3, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.