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उड़ीसा के कंधमाल में रुसी पर्यटकों की मौत

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 31, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
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उड़ीसा के कंधमाल में रुसी पर्यटकों की मौत
उड़ीसा के कंधमाल में रुसी पर्यटकों की मौत
girish malviyaगिरीश मालवीय

चार रूसी पर्यटक उड़ीसा के दुर्गम आदिवासी इलाके में आखिर कौन-सा पिकनिक मना रहे थे ? अगर मीडिया आपको बढ़चढकर किसी घटना के बारे में बता रहा है तो आपको ये समझना चहिए कि वो कुछ छुपाने की कोशिश कर रहा है. कुछ दिनों पहले उड़ीसा में एक के बाद एक यानी, दो रूसी पर्यटकों की रहस्यमई ढंग से मृत्यु हो गई.

यह घटनाक्रम ओडिशा के रायगढ़ जिले के एक होटल में हुआ. सबसे पहले 22 दिसंबर को व्लादिमीर बेदेनोव होटल के कमरे में बेहोश पड़े मिले, जिनकी अस्पताल ले जाते वक्त उनकी मृत्यु हो गई. उसके 2 दिन बाद 24 दिसंबर को उसी होटल की तीसरी मंजिल से गिरने से उनके साथी रूसी सांसद और अरबपति बिजनेसमैन 65 साल के पावेल एंटव की मौत हो गई.

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मीडिया हमें यह बता रहा है कि मरने वाले रूसी सांसद एंटव राष्ट्रपति पुतिन के विरोधी थे. एंटाव ने रूस के यूक्रेन पर हमले को लेकर आलोचना भी की थी. मीडिया बार-बार यूक्रेन के कीएव पर मिसाइल हमले पर एंटव की आलोचना’ का ज़िक्र कर रहा है. साफ़ दिख रहा है कि शक की सुई पुतिन की तरफ घुमाई जा रही है, लेकिन इस घटना का एक पहलू और है, जिसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं है. सोचने की बात यहां ये है कि एक अरबपति रूसी अपने तीन साथियों के साथ उड़ीसा के आदिवासी इलाकों में क्या कर रहा था ?

खोजबीन करने पर पता चला है कि 19 दिसंबर को कुल 4 रूसी पर्यटक व्लादिमीर बेदेनोव और पावेल एंटव अपने दो अन्य साथियों – मिखाइल तुरोव (63), उनकी पत्नी नातालिया पानासेंको और दिल्ली के एक ट्रैवल एजेंट के साथ उड़ीसा आए थे. वे 22 दिसम्बर से पहले दक्षिणी ओडिशा के आदिवासी इलाकों में भ्रमण कर चुके थे. वे कंधमाल जिले में भी घूम रहे थे. कंधमाल वही जिला है जहां 2008 में ईसाई आबादी के ऊपर कट्टरपंथी ताकतों ने हमला कर 35 लोगों की जान ली थी.

कंधमाल ओडिशा का एक बेहद पिछड़ा हुआ जिला है, जहां कांध आदिवासियों की बहुतायत है, जिनकी आबादी क्षेत्रीय जनसंख्या का 51% है. यहां ईसाई आबादी बड़ी संख्या में है.

यह पूरा क्षैत्र माओवादियों का गढ़ बताया जाता है. माओवादी विद्रोहियों ने मार्च 2012 में कंधमाल से दो इतालवी नागरिकों, बासुस्को पाओलो और क्लाउडियो कॉलेंजेलो का अपहरण कर लिया था, जिन्हें बाद में छोड़ा गया. कहा जाता है कि ये इटालियंस शीर्ष माओवादी नेता सब्यसाची पांडा के पास थे, सब्यसाची के पिता ओडिशा में कम्यूनिस्ट पार्टी से विधायक रह चुके हैं. (बाद में सब्यसाची पांडा माओवादियों पर अनेक आरोप लगाकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया और बाद में माओवादियों ने पांडा को गद्दार घोषित कर भगोड़ा बताया-सं.)

पांडा पर 2008 में कंधमाल जिले में हुए स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार सहयोगियों की हत्या सहित 50 से ज्यादा आपराधिक मामलों में शामिल होने के आरोप हैं. स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या के बाद क्षेत्र में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में कम से कम 38 लोग मारे गए थे. ईसाइयों पर स्वामी की हत्या का आरोप लगाते हुए उग्र भीड़ ने ईसाइयों के घरों पर हमले किए थे, जिसके बाद लगभग 25 हजार ईसाइयों को पलायन करना पड़ा था. हालांकि पुलिस ने आश्रम में हुई हत्याओं के आरोप नक्सलियों पर ही लगाए थे.

साफ़ समझ में आ रहा है कि यहां लंबे समय से ईसाई और धर्मांतरण विरोधी कट्टरपंथियों के बीच संघर्ष चल रहा है जिसमें नक्सल भी शामिल हैं. तो आखिर ऐसे क्षैत्र में चार रूसी कैथोलिक ईसाई पर्यटकों की उपस्थिति का क्या मतलब निकाला जाना चाहिए ?

बताया गया कि एंटव की मौत होटल की खिड़की से नीचे छत पर गिरने से हुई. लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि होटल के किसी कर्मचारी ने गिरने की कोई आवाज़ नहीं सुनी. पुलिस के अनुसार पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रूसी सांसद एंटोव की मौत गिरने के कारण आंतरिक चोट की वजह से और बिडेनोव की हृदयाघात से होने का संकेत मिला है. लेकिन पावेल का विसरा सैंपल तक सुरक्षित नहीं रखा गया जबकि ऐसे मामलों मे एक साल तक उसे सुरक्षित रखने का नियम है.

बड़ी बात यह भी है एंटोनोव एक ईसाई थे और उन्हें दफनाया जाना चाहिए था लेकिन उनके शव को जला दिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एंटोव और बुडानोव के परिवार ने अपने साथ सफर कर रहे रूसी कपल को पावर ऑफ अटॉर्नी दी थी. उसी के आधार पर जलाने का निर्णय लिया गया. यह सारी बातें शक पैदा करती है कि कुछ न कुछ जरूर छिपाया जा रहा है, जिसका संबंध पुतिन से नहीं बल्कि स्थानीय मुद्दों से है.

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