Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

होलोकॉस्ट : किताबों से शुद्ध होने के बाद, समाज को शुद्ध करने का अभियान

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 2, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

‘आओ, मिलकर सब पुस्तकें जलायें…’, ओह, ये कविता नहीं…असल आव्हान था. जनता की मानसिक शुद्धि के लिए, राष्ट्र औऱ संस्कृति को पतन से बचाने के लिए, राष्ट्रद्रोही साहित्य जलाने का आदेश हुआ. हर लेखक जो नाजियों के साथ नहीं, हर विचार जो नाजीवाद से मेल न खाए, जला डालने के लिए एक अभियान अप्रैल 1933 में संचालित हुआ. अखिल जर्मनी विद्यार्थी परिषद (दुश्शस्टूडेंटशैफ्ट) का एक स्वतंत्र निर्णय था.

सरकार से इस संगठन का कोई लेना देना नहीं था. वह एक गैर-राजनीतिक संगठन था, जो छात्र कल्याण के लिए प्रयासरत रहता था. उसके तत्वावधान में देश भर में ‘बुक बर्न फेयर’ आयोजित हुए. देश के मशहूर राष्ट्रवादी जैसे जोसेफ भाई गोयबल्स यहां आमंत्रित किये जाते. उनके रोमांचक भाषण के पश्चात, किताबें जलाई जाती.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

ये किताबें शहर की लाइब्रेरियों से ली गयी थी, क्योंकि वहां इनके लिए जगह नहीं बची थी क्योंकि लाइब्रेरी में पहले ही आग जो लगा दी गयी थी. जलती किताबों पर हाथ रखकर देशभक्त युवा शपथ लेते- मैं सिर्फ राष्ट्रवादी साहित्य पढ़ूंगा। राष्ट्रवाद के सिवाय कुछ न पढ़ूंगा. और देश ‘मीन काम्फ’ पढ़ने में जुट गया.

देश के हर शहर में बुक बर्न फ़ेयर हुए. शान्ति, मोहब्बत, विज्ञान, साइकोलॉजी, सैक्स, राजनीतिक विचार पर दुष्ट लेखक जैसे मार्क्स, काफ्का, एच जी वेल्स, रोमा रोलां, अल्बर्ट आइंस्टाइन के लिखित पाल्यूशन से देश को बचाया गया.

लाइब्रेरियन लिंच किये गए. किताबे बचाने, छिपाने वाले जेल भेजे गए. दो साल तक ये आंदोलन चलता रहा, जब तक कि देश मानसिक रूप से पूर्णतः परिशुद्ध न हो गया. किताबों से शुद्ध होने के बाद, समाज को भी शुद्ध करने का अभियान आगे चला. इसे होलोकॉस्ट कहते हैं.

परिशुद्ध हो चुका जर्मन साइंटिस्ट, तत्क्षण प्राण लेने वाली जहरीली गैस बना रहा था. इंजीनियर गैस चेम्बर बना रहा था. आर्किटेक्ट कॉनसन्ट्रेशन कैम्प बना रहा था. एकाउंटेट लूटे गए माल का हिसाब रख रहे थे. और जो बहुत पढ़ा लिखा न था, वो फ़ौज या SS में भर्ती होकर अपने ही लोगों को गोली मार रहा था.

समाज की मेंटल कंडीशनिंग, उसके भविष्य का परिचायक होती है. जर्मनी ने इसे खूब झेला है. खंडहर हुआ, 2 टुकड़े हुआ, विदेशी राज में रहा और अब जब नर्क से गुजरकर समझदार हो चुका है, वहां पब्लिक लाइब्रेरी फिर आबाद हैं.

उन्ही राइटर्स की किताबें फिर से मौजूद हैं, लोग पढ़ते हैं और अपना ओपीनियन बनाते हैं. नाजिज्म, एक बुरा स्वप्न है. लोकतंत्र होने के बावजूद, नाजीवाद के समर्थन में बोलना, कहना बैन है. अपराध है, जेल की सजा है.

किताबें जहां जलाई गई थी, शहर-शहर उन स्थानों पर मेमोरियल बने हैं. याद दिलाने को कि एक भ्रष्ट और क्रूर समाज का दौर किताबें जलाने से शुरू होता है.

  • मनीष सिंह

Read Also –

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

पुलवामा : आदिल अहमद डार, एक शर्मिला कश्मीरी युवा, जिसे भारतीय सेना ने ‘आतंकवादी’ बना दिया

Next Post

अकविता

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

अकविता

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

‘तुमने अभी उस आदमी से क्या कहा ?’

September 22, 2024

कोबरा पोस्ट की खोजी रिपोर्ट: पैसे के लिए कुछ भी छापने को राजी बिकाऊ भारतीय मीडिया

March 27, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.