Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सनद रहे, यह खून राजा के हाथ पर नहीं है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 8, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
सनद रहे, यह खून राजा के हाथ पर नहीं है
सनद रहे, यह खून राजा के हाथ पर नहीं है
मनीष सिंह

ओ लोगों, क्या मैं इसे मार दूं ?

महल की मुंडेर से पिंतोआस पाइलेट ने पूछा. वह जूडाई का गवर्नर था. जूडाई रोमन राजाओ का जीता हुआ इलाका था.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

साम्प्रदायिक तनाव के बीच एक अशान्त एशियन इलाका. झगड़े झंझट रोज की बात थी.

2

रोमन सैनिक से पॉलिटिशियन तक का सफर तय करने वाले पाइलेट को, गवर्नर बने रहना था. गवर्नर होने का मतलब इलाके को शांत रखो, कब्जे में बनाये रखो, और ज्यादा से ज्यादा टैक्स का पैसा रोम भिजवाते रहो.

यहूदियों के बीच आपसी झगड़े से उन्हें मतलब नहीं था, मगर इस बार का झगड़ा अलग था. एक साधु किस्म का व्यक्ति धार्मिक त्योहार के समय, सैकड़ों समर्थकों के साथ यरुशलम में घुस आया था.

वह खुद भी यहूदी था, पर यहूदियों की धार्मिक कुरीतियों का मजाक उड़ाता. सभायें लेता, लोगों को धार्मिक शिक्षा देता, खुद को ईश्वर का सच्चा बेटा कहता. उसका समर्थन बढ़ रहा था. यही उसका अपराध था.

3

उसे पकड़कर दरबार मे लाया गया. मौत की सजा की मांग की गई.

पाइलेट ने पूछा – क्यों ?
उत्तर- इसलिए कि जनता ऐसा चाहती है. इसे न मारा तो दंगा हो जाएगा. यहूदी विद्रोह कर देंगे. इसे मारने पर जनता खुश होगी, राज्य स्थिर होगा.

पाइलेट ने पूरा मुकदमा सुना. उसे अब भी इस आदमी को मारना उचित नहीं लगता था. मगर यहूदी भीड़ उफान पर थी. त्योहार के कारण एक अपराधी को छोड़ने की प्रथा थी. मगर लोग इस आदमी की जगह एक अन्य हत्यारे को माफी देना चाहते थे. महल के आगे भीड़ लगी थी.

उसने जनता से पूछा- क्या मैं इसे मौत की सजा दूं ?
जनता ने कहा एक स्वर में हामी भरी.

4

इसका खून किसके हाथों पर होगा ? पाइलेट ने पूछा. वह अब भी इस कत्ल की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता था.

‘हम पर, हमारे बच्चों पर, हम यहूदियों के हाथ पर यह खून होगा’ – एकत्रित भीड़ ने समवेत स्वर में कहा.

अब खून यहूदियों के सर था. उनके बच्चों के सर था. अपराधी को कांटों का ताज पहनाया गया, घसीटा गया, थूका गया. एक ऊंची पहाड़ी पर ले जाकर दर्दनाक मौत दी गयी. लोग खुश हुए.

जीत का अहसास लेकर घर गए.

5

वक्त का पहिया घूमा,
मारा जाने वाला व्यक्ति देवता हो गया.

दुनिया उसकी मुरीद हो गयी. और यहूदी…!!! पाइलेट के महल के सामने वो महज कुछ सौ यहूदी थे. मुट्ठी भर उन्मादियों ने जीसस क्राइस्ट के खून से अपने हाथ रंगे, जीत का अहसास किया.

पूरी कौम पर इस कृत्य का अपराध डाल दिया.

हजारों सालों बाद उनकी कौम, उनकी पीढियां, अभिशप्त जीवन जी रही हैं. घरती के किसी कोने पर उनकी जगह नहीं. एक देश, एक घर, एक शांत-सुरक्षित जीवन भी जघन्य संधर्ष है.

6

मौत की सजा के मुकर्रर करने के बाद गवर्नर पाइलेट ने देर तक अपने हाथ धोए. यह संकेत था, कि वह इस हत्या का दोषी नहीं. मगर उसका अंत भी आत्मघात से हुआ. मासूम खून के दाग किसी को नहीं बख्शते.

मुट्ठी भर नफरती, उन्मादियों को भड़काकर, उन्हें एक साथ इकट्ठा कर, सत्ता के ऊंचे आसन को हासिल करने वाले भी, हर कत्ल से पहले आपसे पूछते हैं.

– ओ लोगों, क्या मैं इन्हें मार दूं ?

मुट्ठी भर भीड़ मचलती है. किलकारियां भरती है. मशीन का बटन दबाती है, करंट लगाती है. मकतूलों का बहता खून अपने हाथ में लेती है.

अपनी आने वाली पीढ़ियों के सर लेती है. वह ये खून अपने धर्म के सर लेती है. अपने देश के सर लेती है.

बार बार, हर रोज लेती है.
उसे बहते खून से ताकत का अहसास होता है.

और राजा … उनकी खुशी के लिए, मासूमों को मारने का आदेश कर, अपने हाथ धो लेता है.

7

क्या आश्चर्य की तमाम त्याग, कोशिशों, संसाधनों और योग्यताओं के बावजूद हम तेजी से फिसलते जा रहे हैं, गिरते जा रहे हैं. हमारे बच्चे उन्मादी बन रहे हैं, कुंठित हो रहे हैं. हमारी मेहनतों के फल नहीं मिलते. जिस ओर देखिये, भविष्य अंधकार में दिखता है.

आप यकीन नही करेंगे. मगर सच यही है कि सैंकड़ों अखलाकों का खून अपना रंग दिखा रहा है. उन्माद अब भी शबाब पर है तो अभी ये रंग, और गहरे, और बदरंग होने हैं.

सनद रहे, यह खून राजा के हाथ पर नहीं है.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

कांग्रेस मुसलमान विरोधी साम्प्रदायिकता पर सीधे और स्पष्ट स्टैंड क्यों नहीं लेती …?

Next Post

अमृत पाल सिंह का ये वक्तव्य समझिए कि…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

अमृत पाल सिंह का ये वक्तव्य समझिए कि...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

फीस बढ़ाना ज़रूरत या साज़िश ?

November 19, 2019

मरम्मत से काम बनता नहीं

November 25, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.